CA after 12th commerce : कीर्ति ने कौमर्स में 12वीं कक्षा पास तो कर ली लेकिन जब किसी डिगरी या कैरियर का सवाल आया तो वह शंका से ही घिर गई. उसे पता है कि सीए, सीएफआर, एमबीए या कोई बड़ी मैनेजमैंट डिगरी करना उस के बस की बात नहीं. लेकिन आम डिगरी से भी तो अच्छे कैरियर का स्कोप छोटा रह जाता है. इसलिए वह इसी चिंता में पड़ी है कि क्या करे?
कीर्ति की चिंता कोई खास या अलग नहीं. यह बहुत ही आम परेशानी है. स्टूडैंट्स अकसर इन चिंताओं से घिरे रहते हैं क्योंकि बहुत कम स्कूल के समय में अपने कैरियर को ले कर गंभीर और कौन्फिडैंट होते हैं कि उन्हें आगे भविष्य में क्या करना है, क्या नहीं. वे उस की तैयारी बहुत पहले से शुरू कर देते हैं लेकिन अधिकतर स्टूडैंट्स तो 12वीं पास करने के बाद कैरियर की सोचते हैं जो उन के कैरियर के लिए एक देरी या शंकाओं का घेरा बनाता है. इस से बहुत से स्टूडैंट्स अपने कैरियर में अच्छा नहीं कर पाते. इसलिए अपने कैरियर के लिए पहले से विचार करें.
कौमर्स बैकग्राउंड के कुछ छोटे लेकिन कैरियर औरिएंटेड कोर्सेज
अकाउंटिंग और टैक्सेशन कोर्स: इस में टैली, जीएसटी और बिजनैस अकाउंटिंग ऐंड टैक्सेशन (बीएटी) शामिल हैं. भारतीय जौब मार्केट में टैली और जीएसटी की बहुत मांग है. इस में आप को सिर्फ सौफ्टवेयर चलाना और अकाउंटिंग के बुनियादी नियम सीखने होते हैं. इस कोर्स में 2 से 6 महीने का समय लगता है.
फाइनैंस और बैंकिंग कोर्स: इस में आप बिजनैस और इनवैस्टमैंट से जुड़ा कैलकुलेशन वर्क, ऐक्सैल, स्प्रैडशीट आदि काम सीखते हैं. यह कोर्स बैंकिंग, फाइनैंसियल ऐनालिसिस के सैक्टर में नौकरी दिलाने में मदद करता है. इस कोर्स की समय अवधि 3 से 6 महीने की होती है.
डिजिटल और क्रिएटिव मार्केटिंग कोर्स: इन कोर्सेज में गणित या ऊंचे अंकों को नहीं बल्कि आप की क्रिएटिविटी और बातचीत के तरीके को देखा जाता है. यहां फाइनैंसियल कैलकुलेशन नहीं बल्कि डिजिटल वर्क प्रेजैंटेशन पर काम किया जाता है. इस से आप कंटैंट स्ट्रैटेजिस्ट या सीईओ स्पैशलिस्ट बन सकते हैं. यह कोर्स 1 से 6 महीने का होता है.
मार्केट रिसर्च और स्टौक मार्केट कोर्स: यहां आप एनआईएसएम या एनसीएफएम सर्टिफिकेशंस कर सकते हैं. भारतीय फाइनैंशियल सैक्टर में एनआईएसएम सर्टिफिकेट बहुत जरूरी माने जाते हैं. इन्हें पाने के लिए आप को बस इन के कुछ खास मौड्यूल्स जैसे म्यूच्युअल फंड या इक्विटी डैरिवेटिव्स का ऐग्जाम पास करना होता है. यह कोर्स 1 से 3 महीने का है.
कुछ डिप्लोमा और अन्य कोर्सेज
डिप्लोमा इन बैंकिंग ऐंड फाइनैंस: यह आप को कमर्शियल बैंकिंग में शुरुआती लैवल की नौकरियों के लिए तैयार करता है.
डिप्लोमा इन फौरेन ट्रेड ऐक्सपोर्ट मैनेजमैंट: इस में आप लौजिस्टिक्स, ग्लोबल सप्लाई चेन और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नियमों के बारे में सीखते हैं.
डिप्लोमा इन रिटेल मैनेजमैंट: यह कोर्स लोकल कम्युनिटी कालेजों या कुछ बड़े कालेजों के औनलाइन प्लेटफौर्म पर उपलब्ध है. यह इन्वैंटरी मैनेजमैंट या स्टाफ और ग्राहकों से अच्छे रिश्ते बनाने सीआरएम की समझ देता है.
फौरेन लैंग्वेज कोर्सेज: विदेशी भाषाएं सीख कर कैरियर के नए मौके बनाएं.
फाइनैंशियल मौडलिंग में सर्टिफिकेट: यह प्रोग्राम आमतौर पर 3 से 6 महीने का होता है. इस में आप को फाइनैंशियल ऐनालिसिस, बिजनैस वैल्यूएशन और ऐक्सैल मौडलिंग की तकनीकें सिखाई जाती हैं.
12वीं के बाद फाइनैंस और इनवैस्टमैंट सैक्टर में कैरियर बनाने के इच्छुक स्टूडैंट्स के लिए यह सब से बेहतरीन कोर्स है.
आज बहुत से छोटेछोटे इंस्टिट्यूट और कई बड़े कालेज भी ये कोर्सेज प्रदान कर रहे हैं. इन कोर्सेज को स्टूडैंट्स औनलाइन प्लेटफौर्म जैसे कौरसेरा या डैमी से भी सीख सकते हैं. आज छोटेबडे़ हर फाइनैंसियल, बैंकिंग, मैनेजमैंट, इनवैस्टमैंट आदि सैक्टर में इन जौब प्रोफाइल यानी इनस्किल्स को जाननेसीखने वाले के लिए नौकरियां हैं. इसलिए बड़ी डिगरी नहीं करने की क्षमता, मार्क्स कम हैं, बड़े कालेज में एडमिशन नहीं मिला आदि परेशानियों से बाहर निकलें और इन कोर्स से अपना भविष्य उज्ज्वल बनाएं.
आप यह न सोचें कि व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी या गूगल से आप को पूरी जानकारी मिल जाएगी. वह जानकारी जो मुफ्त में मिल रही है असल में आप को साइट पर बने रहने के लिए मिलती है. इस के साथ ही आप को बिना रिकोग्नाइज्ड कोर्सेज के एड्स भी मिलने शुरू हो जाएंगे और कुछ तो ऐसी हैं ही जो इन एड्स की लच्छेदार भाषा से इंप्रैस हो कर पूरा कोर्स देख डालेंगी और पैसा भी दे देंगी. जो गूगल पर एडक्टाइलिंग कर रहा है, वह भरपूर कमा रहा है, यह न भूलें.

