journalism students : सारा जैकब देश की जानीमानी पत्रकार और टीवी ऐंकर हैं, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 दशकों से अधिक समय तक महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है. एनडीटीवी के साथ अपने लंबे सफर में उन्होंने देशविदेश की अनेक महत्त्वपूर्ण घटनाओं को कवर किया, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की और लोकप्रिय कार्यक्रम ‘वी द पीपल’ की मेजबानी भी की.

आप की शिक्षा और कैरियर की यात्रा कई दिलचस्प पड़ावों से हो कर गुजरी है. सब से पहले अपने बचपन, पारिवारिक माहौल और उन शुरुआती अनुभवों के बारे में बताएं जिन्होंने आप को आज की सारा जैकब बनाया?

मेरा जन्म दिल्ली में हुआ लेकिन मेरी शुरुआती पढ़ाई ऊटी के लौरेंस स्कूल, लवडेल में हुई जो एक बोर्डिंग स्कूल है. वह अनुभव मेरी लाइफ के सब से महत्त्वपूर्ण अनुभवों में से एक रहा. मैं आज भी मानती हूं कि बोर्डिंग स्कूल बच्चों को आत्मनिर्भर बनाता है, हालांकि यह हर बच्चे के लिए उपयुक्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है. यह बच्चे के स्वभाव पर निर्भर करता है कि वह उस माहौल में कितना सहज और सफल हो पाता है. लेकिन जिन के बच्चे बोर्डिंग के माहौल में रह सकें. उन के मातापिता को मैं निश्चित रूप से इस की सिफारिश करूंगी.

इस के बाद मैं आगे की स्कूली पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गई. ग्रैजुएशन के लिए मैं ने लेडी श्रीराम कालेज में एडमिशन लिया. उस समय एलसीआर में पत्रकारिता का कोर्स बिलकुल नया शुरू हुआ था और मैं उस के दूसरे बैच की ही स्टूडैंट थी. यह लगभग 25-30 साल पहले की बात है, जब भारत में सैटेलाइट टैलीविजन का दौर शुरू हो रहा था और ब्रौडकास्ट जर्नलिज्म अपने पीक पर था. मैं मानती हूं कि सही समय पर सही अवसर मिलना मेरे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण रहा.

क्या बचपन से आप ने एक जर्नलिस्ट बनने का सपना देखा या रास्तों ने आप की मंजिल खुद तय कर दी?

मैं उन बच्चों में से नहीं थी जिन्हें बचपन से ही पता हो कि उन्हें जीवन में क्या बनना है. मैं ने कभी बहुत दूर तक की योजना नहीं बनाई थी लेकिन एक बात हमेशा स्पष्ट थी, मेरे विचार मजबूत थे और किसी भी तरह के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से मैं कभी पीछे नहीं हटती थी. अगर कहीं किसी के साथ गलत हो रहा होता तो मैं सब से पहले उस के पक्ष में खड़ी होने वालों में होती थी.

मुझे यह भी अच्छी तरह पता था कि गणित और विज्ञान मेरे विषय नहीं हैं, इसलिए मैं ने आर्ट्स चुना, आर्ट्स में आने के बाद मुझे लगा कि पत्रकारिता मेरे लिए सही दिशा हो सकती है, हालांकि उस समय मेरी रुचि प्रिंट पत्रकारिता में जाने की थी.

आप की शिक्षा ने आप की सोच और काम करने के तरीके को किस तरह प्रभावित किया? क्या कोई ऐसी सीख थी जिस की अहमियत आप को बाद में समझ आई?

मेरे लिए लेडी श्रीराम कालेज सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं था बल्कि एक ऐसी जगह थी जिस ने मेरी सोच और व्यक्तित्व को शेप किया, उसे आकार दिया. एक गर्ल्स यूनिवर्सिटी में पढ़ने से आत्मविश्वास, पहल करने की भावना और अपनी बात खुल कर रखने की हिम्मत मेरे अंदर पैदा हुई.

हमारे शिक्षकों ने हमें केवल विषय नहीं पढ़ाए बल्कि महिलाओं के अधिकारों, समानता, सामाजिक न्याय, जाति, आर्थिक असमानता और विशेषाधिकार जैसे मुद्दों पर भी सोचने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने हमें सिखाया कि समाज को संवेदनशील नजरिए से कैसे देखा जाए और उन लोगों की आवाज कैसे सुनी जाए जिन्हें अकसर अनदेखा कर दिया जाता है.

मुझे लगता है कि पत्रकार के रूप में मेरी सोच, मेरे मूल्य और समाज को देखने का मेरा दृष्टिकोण काफी हद तक वहीं से विकसित हुआ.

पत्रकारिता में वास्तविक अनुभव की बड़ी भूमिका होती है. आप की शिक्षा ने आप को क्या सिखाया और कौन सी सीख आप को काम के दौरान मिली?

मैं मानती हूं कि पत्रकारिता ऐसी चीज नहीं है जिसे आप सिर्फ क्लासरूम में बैठ कर सीख सकते हैं. युवा पत्रकारों को मैं यही सलाह दूंगी कि वे सिर्फ पत्रकारिता की डिगरी पर निर्भर न रहें. इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीति या किसी अन्य विषय की गहरी सम?ा विकसित करना उतना ही महत्त्वपूर्ण है.

कैरियर के दौरान मुझे न्यूयौर्क यूनिवर्सिटी में ब्रौडकास्ट जर्नलिज्म पढ़ने के लिए फुल स्कौलरशिप मिली. उस समय मैं एनडी टीवी में काम कर रही थी और उस दौरान मुझ से बहुत से सीनियर लोगों ने मुझसे सवाल किए कि जब आप देश के सर्वश्रेष्ठ न्यूज संस्थान में काम कर रही हैं और इस लगातार बदलती फील्ड में है तो फिर आप ब्रेक क्यों लेना चाहती हैं और पत्रकारिता पढ़ने की अब जरूरत क्या है? लेकिन मेरे लिए न्यूयौर्क शहर स्वयं एक कक्षा था. मैं ने महसूस किया कि एक पत्रकार की सब से बड़ी शिक्षा अनुभवों से आती है.

पत्रकारिता में केवल थियोरिटिकल नौलेज काम नहीं आती है, अलगअलग लोगों, समाजों और परिस्थितियों को समझना, जमीन पर जा कर रिपोर्टिंग करना और जीवन के विविध अनुभव हासिल करना ही असली सीख है. न्यूजरूम में आप की पहली स्टोरी अकसर किसी भी डिगरी से कहीं ज्यादा सिखाती है. इसलिए मेरे लिए अनुभव ही सब से बड़ा शिक्षक रहा है.

बीते सालों में जर्नलिज्म की फील्ड में काफी बदलाव हुए हैं. आज की जैनरेशन को इस तेजी से बदलते परिवेश में खुद को उपयोगी साबित करने के लिए क्या नई स्किल्स जरूर सीखनी चाहिए?

मुझे लगता है आज की जैनरेशन के पास काफी स्किल्स हैं जिन को अब हमारी जैनरेशन को सीखने की बहुत जरूरत है. अब सवाल यह कि मैं ने कैसे इन सब बदलावों के साथ खुद को ढाला. मुझे लगता है आज के जर्नलिज्म की सब से अच्छी बात यह है कि टैक्नोलौजी ने अब सब को जर्नलिस्ट बनने का मौका दिया है. हां, आज जो कुछ भी हो रहा है, उस में कई नकारात्मक पहलू भी हैं लेकिन मुझे लगता है इस बदलाव के बहुत से फायदे भी हैं.

वर्तमान में युवा पत्रकारों को कौन सी स्किल्स पर जरूर ध्यान देना चाहिए?

आज के युवा पत्रकारों के लिए सब से जरूरी स्किल है रिसर्च करने की क्षमता और रिसर्च में वास्तविक रुचि. आज सब से बड़ी समस्या यह है कि हर चीज इतनी तेजी से हो रही है कि फैक्ट चैकिंग के लिए समय ही नहीं बचता. इतिहास को समझने, घटनाओं की पृष्ठभूमि जानने, चीजों को सही संदर्भ में रखने की अहमियत भी कम होती जा रही है.

आज जो भी पत्रकारिता में आ रहा है, अगर वह यह कर सकता है तो वही उस की सब से बड़ी ताकत होगी. आज एआई है, सोशल मीडिया है और चारों तरफ गलत जानकारी (मिसइन्फौर्मेशन) फैली हुई है. ऐसे समय में क्या आप तथ्यों की पुष्टि कर सकते हैं? क्या आप पहचान सकते हैं कि आप के सामने जो जानकारी रखी जा रही है वह फेक न्यूज है या नहीं?