Graphic designing career : 12वीं की परीक्षा के बाद जब सारी दुनिया अपनी पसंद की फील्ड की ओर भाग रही है तो कुछ स्टूडैंट्स अभी भी दूसरों का मुंह ताक रहे हैं या इस प्रश्न से घिरे हैं कि मैं किया करूं? जिस की एक वजह तो उन का अपने भविष्य के प्रति गंभीर न होना और दूसरा पढ़ाई करते हुए भी जिज्ञासु या अवगत न होना. अधिकतर स्टूडैंट्स सिर्फ स्कूल बुक की दुनिया तक सीमित है जो ठीक नहीं. उन्हें और भी किताबें और पत्रिकाएं पढ़नी चाहिए ताकि उन्हें नई फील्ड्स, कैरियर औप्शन को जानने का मौका मिले.
जहां आज दुनिया तेजी से टैक्नोलौजी के साथ भाग रही और वे तो अभी चलना कहां है, कहां नहीं यही डिसाइड नहीं कर पा रहे हैं. बहुत से स्टूडैंट्स को यह भी पता है कि डाक्टर, इंजीनियर या मैनेजमैंट की पढ़ाई उन के बस की नहीं है. तो क्या इन के अलावा और भी बेहतर कोर्स हैं क्या?
जी हां हैं. बहुत से हैं और उन में से एक है विजुअल ऐंड ग्राफिक डिजाइन. आज जैसेजैसे टैक्नोलौजी और डिजिटल वर्ल्ड बढ़ते जा रहा है उस के साथ ही विजुअल ऐंड ग्राफिक डिजाइन का सैक्टर भी ऐक्सपैंड हो रहा है क्योंकि विजुअल ऐंड ग्राफिक डिजाइन फील्ड टैक्नोलौजी और डिजिटल वर्ल्ड का ही अभिन्न अंग है.
इनडिजाइन में आप को किसी आइडिया या आर्ट को नैचुरल फार्म यानी कि हैंड मेड आर्ट से ले कर सौफ्टवेयर टूल्स जैसे एडोब फोटोशौप, इलस्ट्रेटर और इंडिजिन ट्यूटोरियल का इस्तेमाल कर विजुअल कम्युनिकेश, मोशन, लेआउट, कलर थ्योरी और टाइपोग्राफी स्किल्स सिखाई जाती हैं जो आप को प्रोडक्ट डिजाइन, ऐनीमेशन, फैशन डिजाइनिंग, प्रोडक्ट ब्रैंडिंग, मार्केटिंग, पब्लिकेशन, मीडिया जैसे क्षेत्रों में अच्छे कैरियर अवसर प्रदान करती हैं.
एडमिशन के लिए योग्यता
यहां ज्यादातर कोर्स के लिए पहले से आर्ट बैकग्राउंड होना जरूरी नहीं है. इस का मतलब आप ने 12वीं किसी भी बैकग्राउंड से की हो आप डिजाइनिंग प्रोग्राम में एडमिशन ले सकते हैं.
डिगरियां और कोर्सेज
ग्रैजुएशन डिगरी: ग्रैजुएशन डिगरी में कुछ मुख्य प्रोग्राम है जैसे बी.डीईएस, बीए, बीएफए जो 3 से 4 साल का प्रोग्राम है. इस प्रोग्राम में एडमिशन के कुछ मानदंड है जैसे 12वीं के मार्क्स को देखा जाता है, बड़े कालेज (जैसे NID, NIFT, NIDS, Pearl Academy) ऐंट्रैंस टैस्ट और इंटरव्यू लेते हैं. साथ ही पोर्टफोलियो और इंटरव्यू देखा जाता है. वहीं कुछ प्राइवेट यूनिवर्सिटी में 12वीं के नंबरों के आधार पर सीधा एडमिशन भी मिल जाता है.
डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स: डिप्लोमा के लिए 10वीं पास और एडवांस सर्टिफिकेशन कोर्स के लिए 12वीं पास होना जरूरी है. यह मार्क्स का कोई खास मानदंड नहीं होता. आप सीधे तौर पर या छोटे से टैस्ट के आधार पर एडमिशन ले सकते हैं. साथ ही इस की समय अवधि 3 महीने से 2 साल की होती है.
पोस्ट ग्रैजुएशन डिगरी: मास्टर जैसे एमडीईएस, एमए के लिए डिजाइन या संबंधित फील्ड में ग्रैजुएशन अनिवार्य है. साथ ही कंप्यूटर साइंस या इंजीनियरिंग ग्रैजुएट स्टूडेंट्स भी अपने पोर्टफोलियो के आधार पर एडमिशन ले सकते हैं. यहां एडमिशन सीईईडी या कालेज के अपने ऐंट्रैंस ऐग्जाम, पोर्टफोलियो और इंटरव्यू के आधार पर होता है.
शौर्टटर्म बूटकैंप और कुछ औनलाइन कोर्स. इन्हें कोई भी कर सकता है और उम्र या पुरानी पढ़ाई की कोई पाबंदी भी नहीं है.
प्रोग्राम में एडमिशन के बाद विजुअल ऐंड ग्राफिक डिजाइन की पढ़ाई करते समय कुछ बहुत ही जरूरी सौफ्टवेयर और टूल्स हैं जिन पर स्टूडैंट्स को फोकस रहना चाहिए जैसे फिगमा, स्कैच, अडोब क्रिएटिव सूट, साथ ही कुछ बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्किल्स भी जैसे विजुअल हायरार्की, ब्रैंड स्ट्रैटेजी, साइकोलौजी औफ सिंप्लिसिटी.
विजुअल ऐंड ग्राफिक्स डिजाइनिंग के कुछ प्रचलित स्पैशलाइजेशन.
यूआई/यूएक्स डिजाइन.
मोशन ग्राफिक्स.
ब्रैंड आइडैंटिटी.
प्रोडक्ट डिजाइन.
ऐनीमेशन ऐंड गेम डिजाइन.
विजुअल आइडैंटिटी डिजाइन.
मार्केटिंग ऐंड एडवरटाइजिंग डिजाइन.
पब्लिकेशन डिजाइन.
फैशन.
डिजाइन कैरियर में आज ट्रेंडिंग या लोकप्रिय हैं
डिजिटल और वैब डिजाइनर: यहां डिजिटल मार्केटिंग मैर्टरियल, सोशल मीडिया ग्राफिक्स और वैबसाइट/ऐप के लेआउट तैयार करते हैं. आप का मुख्य ध्यान यूजर कन्वर्शन और विजुअल सुंदरता पर होता है.
ब्रैंड आइडैंटिटी और लोगो डिजाइनर: ये किसी कंपनी की विजुअल पर्सनैलिटी को आकार देते हैं. लोगो डिजाइन करते हैं, कलर पैलेट तय करते हैं, टाइपोग्राफी चुनते हैं और ब्रैंड गाइडलाइंस लिखते हैं ताकि हर जगह एकजैसी पहचान बनी रहे.
मोशन डिजाइनर: ये लोग डिजाइन में जान फूंकते हैं. ये वीडियो कंटैंट और औनलाइन मीडिया के लिए ऐनिमेटेड ग्राफिक्स, ऐक्सप्लेनर वीडियो और मोशन ब्रैंडिंग तैयार करते हैं.
पैकेजिंग डिजाइनर: ये फिजिकल प्रोडक्ट पैकेजिंग डिजाइन करते हैं. इन का ध्यान ब्रैंड की सुंदरता के साथसाथ प्रोडक्ट के आकार, काम और प्रिंटिंग की व्यावहारिक सीमाओं के बीच संतुलन बनाना होता है.
प्रिंट और पब्लिकेशन डिजाइनर: ये मैग्जीन, बुक कवर्स, ब्रोशर्स और प्रिंट एड्स के लिए लेआउट तैयार करते हैं. इस के लिए फोटो एडिटिंग, कलर थ्योरी और प्रीप्रैस मैकेनिक्स की गहरी सम?ा की जरूरत होती है.
फ्रीलांस डिजाइनर: यह अपना खुद का बिजनैस चलाते हैं. खुद क्लाइंट्स ढूंढ़ते हैं, अपना रेट तय करते हैं और अलगअलग इंडस्ट्रीज के प्रोजैक्ट्स पर स्वतंत्र रूप से काम करते हैं.
अब स्टूडैंट्स को यहां इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे चाहे कोई भी कोर्स करें, सर्टिफिकेशन या डिगरी उन का उसे स्किल्स, अपने टूल्स और सौफ्टवेयर पर पकड़ बनानी बहुत जरूरी हैं क्योंकि यह आर्ट की फील्ड है जहां जितनी अच्छी और अधिक प्रैक्टिस होगी, कला और रिजल्ट्स भी उतना ही निखर कर सामने आएगा.
डिजाइनिंग सैक्टर में स्कोप
नौन आर्ट बैकग्राउंड स्टूडैंट्स शुरुआती समय में डिमोटिवेट या निराशा होने से कैसे बचें?
चाहे बच्चे ने 12वीं में साइंस पढ़ी हो या कौमर्स, कोई भी किसी भी स्ट्रीम से इन आर्ट्स फील्ड में आ सकता है. चाहे ड्राइंग या हैंड आर्ट्स इतनी अच्छी नहीं, पहले की कोई प्रैक्टिस नहीं लेकिन आप का इस फील्ड में इंटरैस्ट है तो जौइन करें. पहलेपहल अगर कोई आर्ट या डिजाइन सही बन रही है तो घबराएं नहीं, निराश मत हों क्योंकि कालेज में पहले आप का फाउंडेशन ही तैयार किया जाता है तो बस प्रैक्टिस करते रहो क्योंकि यह एक स्किल प्रैक्टिस करने पर धीरेधीरे सीख जाओगे.
टीचर्स आप को देखते हैं समझते हैं. वे जानने कि पूरी कोशिश करते हैं कि अगर आप की परफौर्मैंस सही नहीं जा रही तो उस के पीछे की वजह क्या है. क्या वह आप का अपना मन है या काम करते समय आप किसी परेशानी का सामना कर रहे हैं. तो हम उसी तरह उस प्रौब्लम का हल निकालते हैं. मैं ने स्वयं बहुत से स्टूडैंट्स को मोटीवेट किया, प्रैक्टिस करते रहने को कहा, उन की कमियों, खूबियों को देखापरखा और फिर उन्हें सही मार्गदर्शन दिया और इस तरह वे अपनी हिचक से बाहर निकले और अच्छा परफौर्म करने लगे. तो अपनी फैकल्टी की सुने, उन से सीखें. अपने टीचर्स, प्रोफैसर की मदद लें.
डिजाइनिंग सैक्टर में कितना स्कोप है?
डिजाइनिंग में बहुत से स्पैशलाइजेशन हैं जैसे ऐनीमेशन ऐंड गेम डिजाइन, प्रोडक्ट डिजाइन, कम्युनिकेशन डिजाइन, फैशन, औटोमोबाइल, इंटरैक्टिव डिजाइन और इन सभी में बहुत अच्छा स्कोप है. जैसे प्रोडक्ट डिजाइन जो बहुत अच्छा कौंसैप्ट है. यहां इंटरैक्टिव डिजाइनिंग भी आता है. क्योंकि आज के प्रोडक्ट्स इंटरैक्टिव फीचर के साथ है जैसे स्मार्ट वाच, स्मार्ट टीवी, वाशिंग मशीन आदि.
साथ ही प्रोडक्ट डिजाइन में ऐप, वैबसाइट, सर्विस, डिजिटल प्रोडक्ट भी बनाना सिखाया जाता है और इन सभी की बहुत डिमांड है तो इन सभी में बहुत अच्छे स्कोप हैं. साथ ही गेम ऐनीमेशन और डिजाइन यहां बहुत अच्छी स्किल और ड्राइंग आनी चाहिए. यहां भी इंटरैक्टिव डिजाइन की जरूरत है. यहां गेम बनाने के साथ आप को गेम खेलना भी आना चाहिए. इंटरनैशनल प्लेटफौर्म पर यहां बहुत स्कोप हैं.
फैशन डिजाइनिंग और फोटोग्राफी यह भी बहुत अच्छी फील्ड है. यहां अपने काम को बेहतर रूप से प्रेजैंट करना आना चाहिए.
आज सौफ्टवेयर कंपनीज में कम्युनिकेशन डिजाइन (यूआई/यूएक्स डिजाइन) में बहुत औप्शन और स्कोप हैं. आप वहां ग्राफिक डिजाइनर या विजुअल डिजाइनर बन कर जा सकते हैं. बहुत से स्टूडैंट्स तो इन स्पैशलाइजेशन में रिसर्च भी कर रहे हैं.
एआई क्या डिजाइनिंग फील्ड के स्कोप को कम कर रहा है?
देखिए एआई एक टूल है, वह रियल आर्ट की जगह नहीं ले सकता क्योंकि आज भी रियल आर्ट, हैंड आर्ट को ही प्रमुख माना जाता है. वैसे भी इंडियन आर्ट कल्चर बहुत रिच है. यहां हाथ से किए गए काम, आर्ट, शिल्प आदि का महत्त्व आज भी बरकरार है और आगे भी इस का महत्त्व नहीं जाएगा. तो एआई को एक टैक्निकल टूल की तरह देखे जो डिजिटल प्लेटफौर्म के लिए है. मगर जब आप को हाथ का काम, एक आर्ट वास्तविक रूप में चाहिए होगा तो हैंडवर्क की मांग होगी. जैसे आप ऐनीमेशन में स्टौप मोशन फिल्म ही ले लीजिए, जिस में आज भी कार्टून, पुप्पेट्स, मौडल्स हैंड स्किल से बन रही हैं. उसी तरह डिजाइनिंग में भी एक आर्टिस्ट, पेंटर, फैशन डिजाइनर आदि की जगह कोई एआई नहीं ले सकता क्योंकि ये सारे काम इमोशन, क्रिएटिविटी, सैल्फ ऐक्सप्रैशन की मांग करते हैं, किसी कंप्यूटर जनरेटेड इमेज या पैटर्न की नहीं.
-आरती प्रकाश
प्रोफैसर, डिपार्टमैंट औफ डिजाइन, नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी औफ टैक्नोलौजी

