communication skills : महिला नेतृत्व और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने के लिए अनुराधा दास माथुर को भारत सरकार ने ‘100 वूमन अचीवर्स’ की सूची में शामिल किया. महिलाओं को नेतृत्व करने और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करने वाली अनुराधा आज शिक्षा और सामाजिक रिवर्तन की एक सशक्त आवाज हैं.
अपने बारे में थोड़ा बताएं कि कैसे परिवेश और पारिवारिक माहौल में आप पलीबढ़ीं, जिस ने आप की सोच और व्यक्तित्व का विकास करने में आप की मदद की?
मैं एक ब्यूरोक्रैट परिवार से आती हूं. मेरी मां और पिता आईएएस अधिकारी थे. मेरे समय की सभी महिलाएं काम करती थीं. इसलिए बचपन में मुझे कभी यह एहसास ही नहीं हुआ कि लड़कियां काम नहीं करतीं. आज हम अकसर यह सुनते हैं कि लड़कियों को चुनना पड़ता है कि वे काम करें या घर संभालें, पढ़ें या न पढ़ें, जौब करें या न करें लेकिन मेरे बचपन में ऐसी कोई दुविधा थी ही नहीं क्योंकि मेरे आसपास की महिलाएं कुछ न कुछ करती थीं.
मेरी मां दंगे संभालने के लिए जीप चला कर निकल जाती थीं. आज उन की उम्र 85 वर्ष है और उन के पास लाइसैंस वाली गन है लेकिन उसी के साथ हर शनिवार हम घर में फूल लगाते थे, वे मेरे कपड़े खुद सिलती थीं और अपनी ससुराल में एक बेहद लोकप्रिय सदस्य, एक अच्छी बहन, दोस्त और मां थीं. साथ ही वे एक शानदार सीनियर औफिसर भी थीं. इसलिए मु?ो हमेशा यही लगता था कि लड़कियां सबकुछ कर सकती हैं. मैं ऐसे ही माहौल में बड़ी हुई.
जब आप स्टूडैंट थीं तब आप ने अपने भविष्य की कैसी कल्पना की थी? उस समय आप के लिए सफलता क्या माने रखती थी?
सफलता की मेरी परिभाषा हमेशा यही रही है कि आप अपने जीवन के फैसले खुद लेने की स्थिति में हों. सिर्फ पैसे से सफलता नहीं मिलती लेकिन पूरी तरह बिना संसाधनों और पैसे के बिना भी सफलता पाना बहुत मुश्किल है. मेरे लिए सफलता का अर्थ है हर तरह की पर्याप्त स्वतंत्रता, खासतौर पर लड़कियों के लिए.
मेरे बड़े भाई बहुत पढ़ाकू और अनुशासित नेचर के हुआ करते थे. परिवार में अकसर मु?ो यह भी सुनने को मिलता था कि अगर मैं पढ़ाई को थोड़ा ज्यादा सीरियसली लूं तो और भी बहुत कुछ हासिल कर सकती हूं. लेकिन मैं जैसी थी उस में खुश थी. मैं ने डीपीएस आरके पुरम से पढ़ाई की फिर लेडी श्रीराम कालेज गई. ऐसा नहीं था कि मैं ने पढ़ाई में अच्छा नहीं किया.
जब मैं एलएसआर में थी तब तक मेरे बड़े भाई औक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के लिए प्रतिष्ठित रोड्स स्कौलरशिप प्राप्त कर चुके थे. उन्होंने लौट कर मु?ा से कहा कि मु?ो कैंब्रिज विश्वविद्यालय में आवेदन करना चाहिए. सच कहूं तो मैं ने कभी इस के बारे में सोचा ही नहीं था. मेरी योजना तो बस ग्रैजुएशन के बाद ‘दिल्ली स्कूल औफ इकोनौमिक्स’ में जाने की थी. लेकिन मैं ने आवेदन किया और मुझे पूर्ण छात्रवृत्ति के साथ प्रवेश मिल गया.
आप की ऐजुकेशलन जर्नी ने आप के कैरियर को किस तरह आकार दिया? आप की शिक्षा के कौन से पहलू सब से अधिक उपयोगी साबित हुए?
अगर आप मुझ से यह सवाल 25 साल पहले पूछतीं तो मेरा जवाब अलग होता. उस समय लोग अपने पूरे कैरियर की योजना लगभग पहले से बना लेते थे. 20-25 वर्ष की उम्र में काम शुरू करना और 50-55 वर्ष की उम्र तक उसी क्षेत्र में बने रहना सामान्य बात थी. अधिकांश लोग एक ही संस्थान में काम करते थे और वहीं अपना पूरा कैरियर बिताते थे. लेकिन आज का दौर पूरी तरह बदल चुका है. अब ज्यादातर लोग अपने जीवन में कम से कम 2 या 3 अलगअलग कैरियर बनाते हैं. इसलिए आप की मूल डिगरी ही आप के पूरे कैरियर को निर्धारित नहीं करती. मेरी डिगरी इकोनौमिक्स में थी. शिक्षा हमेशा प्रासंगिक रहती है, लेकिन उस की प्रासंगिकता हमेशा केवल विषयवस्तु तक सीमित नहीं होती.
निश्चित रूप से मैं ने अपने कैरियर के पहले 10-15 वर्षों में अर्थशास्त्र की पढ़ाई का उपयोग किया लेकिन शिक्षा आप को उस से कहीं अधिक देती है. यह आप को समस्याओं को हल करना, संवाद करना, तर्क करना, लोगों को समझना और किसी भी स्थिति का व्यापक संदर्भ सम?ाना सिखाती है. मेरे विचार से शिक्षा को आप को केवल एक कैरियर के लिए नहीं बल्कि जीवन के लिए और कैरियर में आने वाले बदलावों के लिए भी तैयार करना चाहिए. तकनीकी रूप से यह मेरा तीसरा कैरियर है.
वेदिका के शुरुआती बैचों और आज की छात्राओं में कैरियर, जीवन और काम को ले कर आप को क्या सब से बड़ा बदलाव दिखाई देता है?
मुझे लगता है वेदिका में हमेशा वही छात्राएं आती हैं जो अपने दम पर कुछ करना चाहती हैं. शुरू से ही यहां आने वाली अधिकांश लड़कियों की सब से बड़ी इच्छा फाइनैंशियली इंडिपैंडैंट बनने की रही है. आज की छात्राओं में एक बड़ा बदलाव यह दिखता है कि वे केवल अपने लिए नहीं बल्कि अपने मातापिता और परिवार की बराबर जिम्मेदारी उठाना चाहती हैं. वे खुद को परिवार पर निर्भर व्यक्ति नहीं बल्कि योगदान देने वाली सदस्य के रूप में देखती हैं.
एक और सकारात्मक बदलाव यह है कि अब मांएं अपनी बेटियों से खुल कर कहती हैं कि तुम्हें काम करना है और अपना कैरियर किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना है. यह सोच पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है.
क्या आप को लगता है कि आज की युवा महिलाएं सफलता को 10 साल पहले की तुलना में अलग नजरिए से देखती हैं?
मुझे लगता है कि आज की युवा महिलाएं सफलता को पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक और स्पष्ट नजरिए से देखती हैं. वे अपने पद, रोल, कैरियर ग्रोथ, वेतन और पेशेवर प्रगति को ले कर पहले से कहीं अधिक सजग हैं. यदि वे महत्त्वाकांक्षी हैं तो अब उसे खुल कर स्वीकार भी करती हैं.
आज वर्कप्लेस तकनीक, एआई, हाइब्रिड वर्क और डाइवर्सिटी ऐंड इन्क्लूजन जैसी वजहों से तेजी से बदल रहा है. आप के अनुसार आज नौकरी की शुरुआत करने वाली युवा महिलाओं को इन बदलावों में सब से महत्त्वपूर्ण किन बातों को सम?ाने और अपनाने की जरूरत है?
आज हम एआई की बात कर रहे हैं, 10 साल पहले कोई और बदलाव सब से बड़ा विषय था और 10 साल बाद शायद कुछ नया होगा. इसलिए मेरे विचार से आज के समय में सब से महत्त्वपूर्ण है फ्लैक्सिबल बने रहना. आज के युवा अपने कैरियर में निश्चितता और पहले से तय रास्ता चाहते हैं लेकिन सच यह है कि आज की दुनिया में सब से कम प्रिडिक्टिबल चीज भविष्य ही है.
क्या आप को लगता है कि आज से 10-15 साल पहले की तुलना में कार्यस्थल महिलाओं के लिए वास्तव में बेहतर हुए हैं?
मुझे लगता है कि हम अभी बदलाव की शुरुआती अवस्था में हैं. वर्कप्लेस पर समानता, डाइवर्सिटी और महिलाओं की भागीदारी को ले कर प्रतिबद्धता बढ़ी है लेकिन सदियों पुरानी सोच रातोंरात नहीं बदलती इसलिए यह बदलाव समय लेगा.
अगले दशक में युवा महिलाओं के लिए आप के अनुसार कौन से कौशल सब से महत्त्वपूर्ण होंगे खासकर वे जो आमतौर पर स्कूल या कालेज की पढ़ाई में नहीं सिखाए जाते?
मेरे अनुसार अगले दशक में सब से महत्त्वपूर्ण कौशलों में पहला है कम्युनिकेशन स्किल्स, अपने विचारों को स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ रखना हर क्षेत्र में सफलता की बुनियाद है. दूसरा है संख्यात्मक और विश्लेषणात्मक क्षमता चाहे आप किसी भी क्षेत्र में हों, आंकड़ों को सम?ाना, उन का विश्लेषण करना और उन के आधार पर निर्णय लेना लगातार अधिक महत्त्वपूर्ण होता जाएगा. तीसरा और शायद सब से कम सिखाया जाने वाला कौशल है अपने कैरियर को वह महत्त्व देना जो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए जरूरी है. मैं इन्हें सौफ्ट स्किल्स नहीं मानती क्योंकि इन के बिना लंबे समय तक कैरियर बनाना ही मुश्किल है.
इस के अलावा लगभग 25-30त्न कौशल ऐसे होंगे जो समय के साथ बदलते रहेंगे. आज उन में एआई, डेटा ऐनालिटिक्स या नई तकनीकें शामिल हैं. कल कुछ और हो सकता है. इसलिए इन बदलती जरूरतों के अनुसार लगातार सीखते रहना भी उतना ही जरूरी है.

