Advertising career options : 66वर्षीय मीनाक्षी मेनन एक प्रेरणादायक ऐंटरप्रन्योर हैं, जिन्होंने एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया है. वे GenS Life की संस्थापक हैं और वरिष्ठ नागरिकों को आत्मनिर्भर, सक्रिय और खुशहाल जीवन जीने के लिए प्रेरित करती हैं.
कैसे उन की स्कूल और कालेज की शिक्षा उन के लिए उत्कृष्ट जीवन का पर्याय बनी, आइए उन्हीं से जानते हैं:
आप ने अपने कैरियर को ध्यान में रखते हुए स्कूलकालेज में कौन से विषय चुने?
मेरे पिता ने मेरे अंदर विज्ञापन और मार्केटिंग की फील्ड को ले कर रुचि का बीज बो दिया था लेकिन उन्होंने कभी मुझ पर किसी कैरियर को चुनने या किसी विषय को ले कर दबाव नहीं बनाया. मेरे पिता ने सिर्फ 2 चीजें कीं- एक मेरे अंदर जिज्ञासा पैदा की, यह एडवर्टाइजिंग चीज है क्या. हम लोग देखते थे कि किसी इश्तिहार में क्या तसवीर है, क्या प्रोडक्ट है, क्या कौपी लिखी है. इन तीनों में संबंध क्या है. उन्होंने मुझे इन तीनों को ले कर सवाल करना सिखाया. दूसरा काम उन्होंने यह किया कि मेरे अंदर आत्मविश्वास पैदा किया कि मैं जो चाहूं वह कर सकती हूं.
मेरा मानना है कि मातापिता की सब से बड़ी जिम्मेदारी है अपने बच्चों में सही मूल्यों को स्थापित करना. ये मूल्य बाहरी दुनिया से जुड़े नहीं होते बल्कि हमारे अंदर की दुनिया से जुड़े होते हैं जैसे आत्मविश्वास और यह विश्वास कि मैं सक्षम हूं.
मेरे लिए दुनिया 2 हिस्सों में थी. एक भौगोलिक दुनिया और दूसरी वह दुनिया जिसे हम खुद बनाते हैं यानी समाज, रिश्ते और समुदाय. इसी वजह से मैं ने कालेज में अपने विषय के रूप में भूगोल और समाजशास्त्र चुना.
आप ने एडवर्टाइजिंग, मार्केटिंग और ऐंटरप्रन्योर जैसी कई फील्ड में काम किया क्या आप की फौर्मल ऐजुकेशन इस में मददगार रही?
उस के लिए आप के पास स्किल्स होनी बेहद जरूरी है. वे कौन सी स्किल्स होंगी यह आप को तय करना है. पढ़ाई के साथ मेरी पहली नौकरी थी सेल्स वूमन की. कहां भूगोल कहां समाजशास्त्र और उस से बिलकुल अलग थी सेल्स की नौकरी. उस नौकरी के साथ मैं ने इवनिंग कोर्स किया मार्केटिंग ऐंड एडवर्टाइजिंग में. मुझे मालूम था कि मुझे उसी फील्ड में जाना है. हमारे आर्थिक हालात तब ठीक नहीं थे. पिता का स्वर्गवास हो गया था, मां काम कर रही थीं, हम दोनों एकदूसरे के सहारे जी रहे थे. अब ऐसे में मूलभूत जरूरत क्या है यह सोचना था. तब मैं ने औफिस में काम कर के पैसे कमाए, मां हौस्पिटल में काम कर के तो कोई अन्य व्यक्ति किसी अन्य तरीके से आर्थिक स्वतंत्रता पाता है. ऐजुकेशन एक ऐसी चीज है जो हमारे साथ जिंदगीभर रहती है. डिगरी हमारे साथ जिंदगीभर रहती है लेकिन साथ ही रहता वह नौलेज जो हमें डिगरी के समय मिला और उसे ही हमें याद रखने की जरूरत है. जब मैं छोटी थी तभी साफ था कि मुझे काम करना है और मुझे आर्थिक स्वतंत्रता चाहिए ही. यह भी मेरे दिमाग में साफ था कि अगर मुझे विज्ञापन के क्षेत्र में आगे जाना है तो मुझे उस के लिए कौशल की जरूरत है. सेल्स में जौब, काउंटर के पीछे काम करना, कार बेचना मेरे लिए यह शानदार अनुभव था जो हमें न सिर्फ ग्राहक व्यवहार, कम्यूनिकेशन, सेल्स बल्कि टैंपर मैनेजमैंट भी सिखाता है. ये सभी लाइफ स्किल्स हैं.
क्या आप को कभी लगा कि कुछ स्किल्स आप को ऐजुकेशन सिस्टम में नहीं मिलीं, जिन्हें बाद में सीखना पड़ा?
ऐसी बहुत सी स्किल्स हैं जो मुझे पढ़ाई के दौरान नहीं मिलीं. हमारा शिक्षा तंत्र एक नींव की तरह है. लोग सब से बड़ी गलती तब करते हैं जब वे इसे पूरी इमारत समझने लगते हैं.
असल में शिक्षा इमारत नहीं बल्कि उस की नींव है. अगर नींव मजबूत होगी तो आप 10 मंजिल नहीं, 100 मंजिल तक की इमारत बना सकते हैं. लेकिन अगर नींव कमजोर है तो एक छोटा सा घर भी नहीं बन पाएगा.
आज समस्या यह है कि हम पढ़ाई में उस मेहनत और अनुशासन को नहीं रखते. हमें लगता है कि हम आगे बढ़ रहे हैं लेकिन असल में हम सिर्फ आगे बढ़ रहे हैं, विकास नहीं कर रहे.
औपचारिक शिक्षा बहुत जरूरी है क्योंकि वही नींव तैयार करती है. लेकिन वहीं तक सीमित रहना ठीक नहीं है. इस के बाद अनौपचारिक शिक्षा और अलगअलग कोर्स भी उतने ही जरूरी हैं.
क्या कभी आप ने अपने कैरियर चुनाव को ले कर सवाल किया कि आप ने कुछ और चुना होता?
मैं ने खुद को बेहतर बनाने के लिए लगातार खुद पर काम किया है. जहां से मैं ने अपने कैरियर की शुरुआत की और आज मैं जहां हूं 2 बिलकुल अलग जगहें हैं. मैं ने हर 10 साल में खुद को नई स्किल सीख कर और बेहतर बनाने पर काम किया है. अगर आप आगे बढ़ते रहना चाहते हैं तो आप को चुनौतियां ढूंढ़नी होंगी. यह सिर्फ यह कहने की बात नहीं है कि यह समस्या है, इसे कैसे हल करें बल्कि खुद समस्याएं खोज कर उन्हें सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए. इस के लिए आप को अपने दायरे से बाहर निकल कर चुनौतियों का सामना करना होगा.
क्या आप को लगता है कि ऐंटरप्रन्योरशिप सिखाई जा सकती है,या यह केवल अनुभव से ही आती है?
इसे सिखाया नहीं जा सकता लेकिन सीखा जा सकता है. आप कौशल को देख कर और अलगअलग परिस्थितियों में रहकर सीखते हैं. हम आप को पढ़नालिखना सिखा सकते हैं लेकिन आप विलियम शक्सपियर या रबिंद्रनाथ टैगोर जैसा बनेंगे या नहीं, यह सिर्फ लिखना जानने पर नहीं बल्कि कितनी अच्छी तरह लिखते हैं, इस पर निर्भर करता है.
इसी तरह मैं आप को व्यापार चलाने की बुनियादी बातें सिखा सकता हूं लेकिन आप को एक सफल उद्यमी कैसे बनना है, यह आप को खुद अनुभव से सीखना पड़ेगा.
जो युवा छात्र उद्यमी बनना चाहते हैं उन्हें पढ़ाई के दौरान किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
पढ़ाई के साथ 2 और चीजें बहुत जरूरी हैं. पहली, जिज्ञासा होनी चाहिए, अपने आसपास की दुनिया को ले कर, कारण और परिणाम को समझने की इच्छा होनी चाहिए. सवाल पूछना चाहिए, यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि चीजें कैसे और क्यों काम करती हैं.
दूसरी, गिरने और असफल होने के लिए तैयार रहना चाहिए. आजकल कई बच्चों को बचपन से ही बहुत ज्यादा सराहा जाता है- उन्हें बताया जाता है कि वे बहुत होशियार हैं, बहुत अच्छे हैं. इस से धीरेधीरे उन की सीखने की भूख कम हो जाती है और चुनौतियों से लड़ने की क्षमता भी दब जाती है. असल में जीवन में आगे बढ़ने के लिए संघर्ष करने की ताकत और सीखने की भूख बहुत जरूरी है.
क्विक इंट्रो
जन्मस्थान : मुंबई.
ऐजुकेशन : एल्फिंस्टन कालेज, केसी कालेज औफ
मैनेजमैंट से पीजी डिप्लोमा इन
एडवर्टाइजिंग ऐंड मार्केटिंग
प्रोफैशन : फाउंडर, GenS लाइफ.
कैरियर टिप्स
विषय ऐसे चुनें जिन्हें पढ़ने में मजा आए और जो आप को बेहतर इंसान बना सकें.
एडवर्टाइजिंग फील्ड में कैरियर बनाने के लिए स्किल्स और क्रिएटिव सोच का होना जरूरी है.
टैक्नोलौजी के नए माध्यम सीखते रहना आगे बढ़ने में मदद करेगा.

