अगर टीचिंग फील्ड में जाना चाहते हैं, तो श्री राम स्कूल की प्रिंसिपल सुधा सहाय से की गई बातचीत आपके लिए मददगार साबित होगी –
आज की टीचिंग फील्ड और पहले की फील्ड कैसे अलग है?
आज और पहले जमाने की टीचिंग फील्ड में जमीनआसमान का फर्क है. एक तो आज कोई भी टीचर पहले की तरह हाथ में छड़ी ले कर स्टूडैंट्स को नहीं डराता. आज के टीचर्स बच्चों के साथ इमोशनली कनैक्ट हैं. उन के बीच डर नहीं, जुड़ाव है. टीचर आज सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं. वे टैक्नोलौजी को भी अपना चुके हैं. आज हम बच्चों से औनलाइन माध्यम से 24 घंटों के लिए जुड़ गए हैं. उन की प्रौब्लम्स समय पर दूर करते हैं.
दूसरा आज के टीचर फाइनैंशियल मार नहीं खा रहे हैं. आज टीचिंग फील्ड में आप बहुत अच्छी सैलरी ले सकते हैं, साथ ही आज स्कूल में इतनी ऐक्टिविटीज हैं कि स्टूडैंट्स के साथ टीचर्स को भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है.
तीसरा आज के टीचर बच्चों को सिर्फ किताबी पाठ सिखाने तक सीमित नहीं हैं. आज के टीचर्स बच्चों को हर ऐक्टिविटी में सपोर्ट करते हैं, सिखाते हैं और उन के साथ खुद पार्टिसिपेट करते हैं, साथ ही उन का दोस्त बन उन की परेशानी को भी दूर करते हैं.
स्टूडैंट्स को अपनी ऐकैडमिक के साथ और किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए?
स्टूडैंट्स को सिर्फ ऐकैडमिक तक सीमित नहीं रखना चाहिए. उन्हें स्पोर्ट्स, आर्ट्स, म्यूजिक और साथ ही सोशल ड्यूटी, ह्यूमन वैल्यूज से भी जोड़ना चाहिए जैसे हमारे स्कूल में स्टूडैंट्स को पढ़ाई के साथसाथ सौफ्ट स्किल्स, टीमवर्क, ऐन्वायरन्मैंट कैंपेन, ओल्ड ऐज प्रोग्राम जैसी ऐक्टिविटीज होती हैं ताकि हर स्टूडैंट का ओवरआल पर्सनैलिटी डैवलपमैंट हो.
स्टूडैंट्स जो टीचिंग में कैरियर बनाना चाहते है आप उन से क्या कहना चाहेंगी?
पहले तो वे समझें कि टीचिंग इतना अट्रैक्टिव प्रोफैशन नहीं है क्योंकि इस में कोई चमकदमक, मीडिया, ग्लैमर नहीं. इसलिए वे इन चीजों की अपेक्षा न करें, साथ ही टीचिंग स्वयं में एक लरनिंग फील्ड है. टीचर्स को भी सीखते रहना पढ़ता है. जैसे कोविड-19 में हर टीचर ने रातोंरात टैक्नोलौजी सीखी और पढ़ाना शुरू किया.
दूसरा यह कोई टैक्निकल फील्ड नहीं, जहां कोई टैक्नीक सिखाई जाए. यहां हर बच्चा दूसरे से अलग है. कोई बच्चा सिर्फ किताब से पढ़ाने पर सीख जाता है, कोई बच्चा किसी कहानी के रूप में सीखता है और कोई प्रैक्टिकल रूप से. हर बच्चे की कैपेबिलिटी भी अलग है. इसलिए एकजैसी परफौर्मैंस की अपेक्षा नहीं रखना.
साथ ही कोई बच्चा मैथ में अच्छा तो कोई हिदी में, तो कोई आर्ट ऐक्टिविटी में. इसलिए टीचर्स स्टूडैंट्स की परफौर्मैंस ट्रैक करते रहें ताकि आप समझ पाएं कि उन के लिए क्या बैस्ट है, साथ ही यह समझें कि टीचिंग एक बहुत पावरफुल काम है, एक इन्नोसेंट माइंड को ट्रांस्फौर्मड कर उसे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का, एक अच्छा और कामयाब नागरिक बनाने का.
कैरियर के चुनाव में आप स्टूडैंट्स और पेरैंट्स को क्या एडवाइस देना चाहेंगी?
स्टूडैंट्स को कैरियर चुनते समय अपना इंटरैस्ट, अपनी स्ट्रैंथ और वीकनैस पर ध्यान देना चाहिए. उन का किस सब्जेक्ट में, किस कैरियर में इंटरैस्ट है उस पर फोकस करना चाहिए. किसी दूसरे स्टूडैंट्स को देख कर अपना कैरियर न चुनें. किसी अच्छे और नौलेज रखने वाले से बात करें या राय लें.
पेरैंट्स भी इस बात को समझें कि आज कोई बच्चा एवरेज नहीं है. कोई ऐकैडमिक में अच्छा है, कोई स्पोर्ट्स में, कोई म्यूजिक में. इसलिए किसी भी बच्चे पर किसी एक सब्जैक्ट को ले कर प्रैशर न बनाएं. उस पर अपने डिसिजन न थोपें. बल्कि उस का इंटरैस्ट देखिए, उस की पसंद को जानिए. आज बहुत सारे स्कोप हैं. सिर्फ डाक्टर या इंजीनियर ही सिक्योर या अच्छा कैरियर नहीं. आज हर फील्ड में बहुत सक्सैस है.
अगर आप या आप का बच्चा कैरियर औप्शन को ले कर कन्फ्यूज है तो आप कैरियर काउंसलिंग की हैल्प ले सकते हैं जो स्टूडैंट से बात कर, उस की पसंद जान और उस की परफौर्मैंस को देख अच्छे औप्शन सजैस्ट करते हैं. जैसे हमारे श्री राम स्कूल में है.
यहां के कैरियर काउंसलिंग सैल में स्टूडैंट्स और पेरैंट्स को स्टूडैंट्स की परफौर्मैंस और पसंद को ध्यान में रख कर कैरियर के लिए औप्शन प्लान किए जाते हैं. यहां औप्शन प्लान की तरह है जैसे एबीसी जैसे अगर प्लान काम नहीं किया यानी फर्स्ट औप्शन में एडमिशन नहीं हो पाया तो दूसरा औप्शन यानी प्लान क्या होगा.
स्टूडैंट्स पर सोशल मीडिया का इन्फ्लुएंस कैसे रोका जाए?
सोशल मीडिया या डिजिटल पूरी तरह बंद कर दिया जाए या इस पर रोक लगा दी जाए तो यह सही नहीं क्योंकि आज का दौर टैक्नोलौजी का है और आज बहुत सारी जानकारी आप को इसी डिजिटल वर्ड से मिल रही है.
मगर यह भी झुठलाया नहीं जा सकता कि स्टूडैंट्स पर इस का बहुत दुष्प्रभाव भी है. आज हमें स्टूडैंट्स को डिजिटल एडिक्शन से और मिल रहे नैगेटिव कंटैंट और इनफौर्मेशन से बचाना है.
सोशल मीडिया पर ऐसे फीड मिल रहे हैं जो दूषित हैं. इसलिए आप 2 रास्ते अपनाएं- पहला लाइफ बैलेंस, जहां स्टूडैंट्स को सोशल मीडिया के यूज के साथसाथ हर एक्टिविटी से जोड़ा जाए. जैसे पढ़नाखेलना, हौबीज हर चीज को एक प्रौपर टाइम दे. इस से उन का डिजिटल टाइम भी लिमिटेड हो जाएगा, दूसरा सोशल मीडिया पर मिल रही अनैतिक और मिथ्य बातों से उन्हें दूर करने के लिए उन्हें एक दोस्त बन कर समझाओ बजाय उन पर गुस्सा या चिल्लाने से क्योंकि उन बातों पर वे ज्यादा ध्यान देते हैं, वे उन्हें समझते जो उन्हें एक दोस्त बन कर समझाएं जैसे एक पहल हम अपने स्कूल में साइबर सेफ्टी वीक के रूप में करते है.
यहां साइबर ऐक्सपर्ट्स स्टूडैंट्स को टैक्नोलौजी का सही यूज और उस की बुराइयों के बारे में समझाते हैं, साथ ही डाक्टर्स ऐंड साइंसटिस्ट भी आ कर स्टूडैंट्स को डिजिटल एडिक्शन के ब्रेन और हैल्थ पर होने वाले दुष्प्रभावों को समझाते हैं.
क्या आप अपनी टीचिंग फील्ड ऐंजौए करती हैं?
बहुत ज्यादा. आज लोगों को देखती हूं कि बड़ीबड़ी एमएनसी में बैठे हैं लेकिन लाइफ में सुकून नहीं है. एक ही कुरसी पर पूरा दिन निकाल लेते हैं. आंखें स्क्रीन से हटती नहीं और रात में जब घर लौटते हैं तो सिर्फ आंखों में नींद होती है, मन थका रहता है. मगर हमारा प्रोफैशन ऐसा नहीं. वी आर डीलिंग विद ह्यूमन जो बहुत ही इंटरैस्टिंग है. यहां एक रियल इमोशनल कनैक्शन है. बहुत सी फील्ड ऐसी हैं ही नहीं.

