तृष्णा चौधुरी शिक्षिका, माल्या अदिति इंटरनैशनल स्कूल
Career growth in teaching : तृष्णा चौधुरी एक अनुभवी शिक्षिका हैं जो अंग्रेजी भाषा और साहित्य पढ़ाती हैं. उन्होंने सेंट स्टीफंस कालेज, दिल्ली से इतिहास में बैचलर डिगरी प्राप्त की है और समाजशास्त्र और वूमन स्टडीज में मास्टर डिगरी हासिल की है. बाद में उन्होंने अंगरेजी और सामाजिक विज्ञान में बीएड पूरा किया.
तृष्णा ने विश्व बैंक के साथ एक महिला विकास परियोजना में काम किया और फिर ऐजुकेशन की फील्ड में अपना कैरियर बनाया. उन्होंने विभिन्न शिक्षा प्रणालियों में प्रशिक्षण लिया है जैसेकि आईबी, ब्रिटिश पाठ्यक्रम, सीबीएसई और आईसीएसई. वे अपने शिक्षण में कहानी सुनाने, संगीत, कला और शारीरिक गतिविधि को शामिल करती हैं.
छात्रों को पढ़ने के लिए प्रेरित करने के लिए विभिन्न तरीकों का उपयोग करना जैसेकि क्लासरूम लाइब्रेरीज, ड्रामैटिक रीडिंग सैशंस और रिकमैंडेड रीडिंग लिस्ट्स जैसे तरीकों का वे पालन करती हैं. तृष्णा एक लेखिका भी हैं और उन्होंने रोमांस शैली को चुना है. वे अपनी शिक्षा और अनुभव को अपने लेखन में शामिल करती हैं.
तृष्णा छात्रों को सीखने के लिए प्रेरित करने और उन्हें रचनात्मक तरीके से सोचने के लिए प्रोत्साहित करने में विश्वास करती हैं. वे 2 बड़े बच्चों की मां भी हैं.
पेश हैं, कैरियर और ऐजुकेशन से जुड़े विषयों पर उन से की गई बातचीत के अंश:
आप ने इतिहास से समाजशास्त्र में पोस्ट ग्रैजुएट डिगरी के लिए शिफ्ट किया. इस बदलाव के पीछे क्या कारण था? उस दौरान आप किस प्रकार के प्रोफैशनल जर्नी की कल्पना कर रही थीं?
मैं हमेशा समाजशास्त्र पढ़ना चाहती थी और एक बार जब मैं ने अपनी अंडरग्रैजुएट डिगरी पूरी कर ली तो मैं ने समाजशास्त्र में मास्टर्स करने का फैसला किया और उसी के लिए विश्वविद्यालयों में आवेदन किया. मैं डैवलपमैंट फील्ड में कैरियर बनाने के लिए बहुत उत्सुक थी और यह एक अच्छा रास्ता था.
मास्टर्स के बाद मुझे विश्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ एक महिला विकास परियोजना के लिए भरती होने का मौका मिला. 2001 में भारत में कई नए राज्य बन रहे थे और इन परियोजनाओं को नए राज्यों में भी शुरू करना था. इसलिए मैं विश्व बैंक आईएफएडी परियोजना में भारत सरकार के साथ स्वशक्ति नामक परियोजना में उन के संचार अधिकारी के रूप में शामिल हुई और जल्द ही मुझे छत्तीसगढ़ के नए राज्य में परियोजना की शुरुआत की देखरेख करने के लिए कहा गया.
यह परियोजना स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर काम करती थी. इस तरह मैं ने उस रास्ते पर शुरुआत की जिस की मैं ने कल्पना की थी.
जहां तक प्रश्न है कि बदलाव के पीछे क्या कारण था तो यह काफी तनावपूर्ण असाइनमैंट था. एक ब्रेक पर मैं अपनी अल्मा मेटर कार्मेल कौन्वैंट स्कूल नई दिल्ली गई. प्रिंसिपल मेरी उस वक्त की शिक्षिका थीं जब मैं एक स्टूडैंट थी. उन्होंने मुझ से पूछा कि क्या मैं अपने ब्रेक के दौरान ग्रेड 10-12 के लिए एक स्थानापन्न शिक्षक के रूप में काम करने के लिए तैयार हैं. मैं फ्री थी इसलिए मैं ने सहमति दी और उस के बाद मैं ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा.
आप ने आगे बीएड की और शिक्षक के रूप में लंबा कैरियर रहा है. क्या आप ने हमेशा शिक्षण का सपना देखा था?
नहीं. वास्तव में मैं शिक्षक बनने के अलावा कुछ भी करने पर अड़ी हुई थी. मेरी मां एक प्रोफैसर थीं और वे मुझे बताती रहती थीं कि मैं इस पेशे में बहुत अच्छा करूंगी. उस यंग ऐज में कोई भी अपने मातापिता की बात नहीं सुनता है और इसी तरह मैं ने भी इस पर विचार करने से इनकार कर दिया. लेकिन ठीक है चीजें होती हैं अगर उन्हें होना है.
आप अपने छात्रों के लिए अंगरेजी सीखने को मजेदार कैसे बनाती हैं?
मुझे विभिन्न शिक्षा प्रणालियों या बोर्डों में प्रशिक्षित किया गया है और प्रत्येक एक अलग प्रारूप और शिक्षाशास्त्र का पालन करता है. मैं ने आईबी, ब्रिटिश पाठ्यक्रम, कौमन ग्राउंड कलैक्टिव, सीबीएसई और आईसीएसई में प्रशिक्षण लिया है. मेरी पद्धति इन सभी का मिश्रण है. मैं अपने लैशंस को शारीरिक गतिविधि, कहानी सुनाने और संगीत व कला के कौंबिनेशन के साथ प्लान बना कर पढ़ाना पसंद करती हूं. अंगरेजी को इतने मजेदार तरीके से सीखा जा सकता है. उदाहरण के लिए मैं अपने छात्रों को नाटकीय तरीके से उपन्यास पढ़ना पसंद करती हूं जिससे वे पात्रों के अनुभवों को जीते हैं, उन का भोजन खाते हैं और कभीकभी बस मेरे सुनने के आधार पर चित्र बनाते हैं.
आज की दुनिया में अंगरेजी भाषा स्किल के महत्त्व पर आप के क्या विचार हैं?
यह बहुत महत्त्वपूर्ण है. अंगरेजी संचार की सब से आम भाषा है जो इसे एक बहुत महत्त्वपूर्ण माध्यम बनाती है.
आप छात्रों को अधिक पढ़ने के लिए कैसे प्रेरित करती हैं?
मैं मानती हूं कि अगर आप किसी से कुछ करने के लिए कहते रहते हैं तो यह एक काम बन जाता है और कोई भी काम पसंद नहीं करता है. इसलिए मैं छात्रों को मजबूर करने में विश्वास नहीं करती हूं. अन्य तरीके हैं जिन का उपयोग उन्हें थोड़ा सा पुश करने के लिए किया जा सकता है और जिस की उन्हें आवश्यकता है.
मेरे पास एक अच्छी तरह से स्टौक की गई क्लास लाइब्रेरी है और अकसर वहां से किताबें निकालती हूं जिन पर चर्चा करनी होती है. मैं विभिन्न पाठों से दिलचस्प अंशों का उपयोग करती हूं और आमतौर पर पूरी कहानी का सारांश सुना कर थोड़ा छोड़ देती हूं और उन्हें बताती हूं कि वे उस किताब को कहां पा सकते हैं. मैं हर साल 3 से 4 उपन्यासों के नाटकीय रूप से पढ़ने के सेशन भी करती हूं.
छात्र कहानी सुनना पसंद करते हैं और अकसर जानना चाहते हैं कि क्या उसी तरह की और भी कहानियां हैं. मैं रिकमैंडेड रीडिंग लिस्ट्स को भी अपडेट करती रहती हूं. यह सिर्फ किताबों की सूची नहीं है बल्कि मैं किताब के कवर की तसवीर के साथ विजुअल लिस्ट भी बनाती हूं और उन्हें यह भी बताती हूं कि क्या किताब किंडल और औडिबल पर उपलब्ध है. यह बहुत अच्छी तरह से काम करता है.
आप की बीएड डिगरी ने आप के टीचिंग कैरियर में कैसे मदद की?
यह विशेष रूप से मददगार नहीं रही है लेकिन हां यह विभिन्न बोर्डों और स्कूलों की आवश्यकता है इसलिए यह मेरी नौकरी पाने और सही सैलरी प्राप्त करने में मददगार रही है.

