अपर्णा वैदिक हिस्ट्री की प्रोफैसर, रिसर्चर और लेखिका हैं. वे अपने आर्टिकल्स, बुक्स और शिक्षण द्वारा वाइब्रैंट हिस्ट्री के पहलुओं को सामने रखते आई हैं. आज गृहशोभा उन के इंटरव्यू के जरीए कालेज की ओर बढ़ते स्टूडैंट्स के लिए कुछ एडवाइस और गाइडैंस ले कर आई है:
आप की ऐजुकेशन जर्नी कैसी रही और हिस्ट्री में कैरियर बनाने का कैसे तय किया?
उस समय मेरे पिता ने मुझे उस समय के इलीट स्कूल सरदार पटेल स्कूल भेजा, जहां नर्सरी की शिक्षा हिंदी मीडियम में थी. फिर ग्रैजुएशन में पौलिटिकल साइंस लेना चाहती थी, लेकिन सेंट स्टीफन कालेज में हिस्ट्री औप्शन ही था तो फिर हिस्ट्री की. उस के बाद मास्टर डिगरी ‘यूनिवर्सिटी औफ कैंब्रिज’ और फिर पीएचडी जेएनयू दिल्ली से की.
मैं ने हिस्ट्री कोई प्लान कर के नहीं ली थी. लेकिन जैसेजैसे आगे पढ़ती गई, मुझे इस में बहुत इंटरैस्ट आने लगा. मैं ने देखा कि हिस्ट्री एक मास्टर डिसिप्लिन है और देखिए आज मैं हिस्ट्री की एक लेखिका, प्रोफैसर और रिसर्चर हूं. मगर जब बीते कल की सोचती हूं तो यह कभी सोचा ही नहीं था कि मैं एक लेखिका भी बनूंगी. मैं लेखिका की तरह लिख सकती हूं, यह बहुत देर से पता चला क्योंकि मैं ने तो हमेशा खुद को प्रोफैसर और रिसर्चर की नजर से ही देखा था.
हिस्ट्री में डाइवर्सिटी है. हर इतिहास की अपनी कहानी, अपना बैकग्राउंड, वैल्यू है. सब एकदूसरे से अलग हैं, अलग हैं इसलिए इन्हें पढ़ने में मजा भी आता है. सब में एक चीज एकजैसी है कि इतिहास अलग है लेकिन इंसान के जीने का जज्बा एक है भले जीने का तरीका अलग हो और यही हमें इतिहास की डाइवर्सिटी में यूनाइट रहने की प्रेरणा भी देता है.
आप की कैरियर जर्नी कैसी रही और क्या इस प्रोफैशन को ऐंजौय करती हैं?
पहले का कहूं तो नही. मुझे पढ़ाना इतना पसंद नहीं आया था. मुझे याद है जब अरबिंदो कालेज में पढ़ाती और मेरे पढ़ाएं बच्चे फेल हो रहे थे तब मुझे एहसास हुआ कि मेरी टीचिंग सही नही. तो मैं खुद में सुधार लाई ताकि स्टूडैंट्स मेरा पढ़ाया समझें.
फिर आगे जा कर हिंदी मीडियम के स्टूडैंट्स भी मिले. वहां मैं अपना पूरा लैक्चर इंग्लिश में देने के बाद उन के लिए हिंदी में लैक्चर रिपीट करती थी. तो टीचिंग मैं ने धीरेधीरे पढ़ाते हुए सीखी और आज मैं बहुत अच्छा कर रही हूं. डिजिटल कनैक्शन के जरीए तो आज टीचरस्टूडैंट्स 24 घंटे जुड़े रहते हैं. नोट्स, डाउट सब समय पर शेयर होते रहते हैं.
आप स्टूडैंट्स को उन के कैरियर चौइस पर क्या एडवाइस देना चाहेंगी खासकर उन के लिए जो हिस्ट्री को ले आगे बढ़ना चाहते हैं?
पहले तो किसी भी स्टूडैंट को वह विषय लेना चाहिए जिस में उस का इंटरैस्ट हो क्योंकि बिना इंटरैस्ट की पढ़ाई, बिना मन का काम एक बो?ा बन जाता है और यह बोझ आप की असली क्षमता बाहर नहीं निकलने देता. आज ऐसा कोई विषय या कोई स्ट्रीम नहीं जिस में अच्छा स्कोप न हो.
अगर आप हिस्ट्री चुन रहे हैं तो पहले तो यह आप की स्वयं की पसंद होनी चाहिए, ऐसा नहीं है कि इस की डिगरी लेते ही आप को एक हाई सैलरी जौब मिल जाएगी क्योंकि यह सब्जैक्ट सिर्फ करने से नहीं बल्कि हिस्ट्री की गहराई को समझने से आप को सफल बनाता है. साथ ही जो लोग यह समझते है कि हिस्ट्री रानीराजा तक सीमित है तो यह धारणा गलत है क्योंकि यहां कल से आज तक का डाटा कलैक्शन, मैनेजमैंट, रिसर्च और भी बहुत कुछ है. इस में भी बहुत स्कोप है.
अगर आप हिस्ट्री के बाद एमबीए करते हैं तो आप के रास्ते बहुत बढ़ जाते हैं. हिस्ट्री के साथ और सब्जैक्ट लें तो रिसर्च फील्ड में भी आप अच्छा कर सकते हैं जैसे हिस्ट्री औफ मैडिसिन, हिस्ट्री औफ इंजीनियरिंग, आईएएस की तैयारी भी कर सकते हैं या बाकी के कंपीटिशन जौब्स की.
एक स्टूडैंट के कैरियर में एक कालेज का कितना बड़ा रोल होता है?
पहले तो आज कटऔफलिस्ट इतनी कड़ी है कि स्टूडैंट्स को पसंद का कालेज मिलना बहुत मुश्किल है. ऐसे में जो कालेज मिले जाए वह अच्छा. आप बस एडमिशन लो और पढ़ो. दूसरा अगर स्टूडैंट के पास औप्शन है कालेज चुनने का तो अपने सब्जैक्ट को ध्यान में रख कर कालेज का चुनाव करो.
कुछ बातों का ध्यान रखो जैसे अगर तुम्हारा इंटरैस्ट या लक्ष्य स्पोर्ट्स है तो देखो उस कालेज में बैटर स्पोर्ट्स आइटम्स हैं या नहीं, अच्छा ग्राउंड, अच्छे कोच हैं या नहीं.
जिन का इंटरैस्ट साइंस या किसी भी ऐकैडमिक विषयों में हो वे देखें कि लैब कैसी है, लाईब्रेरी में प्रौपर बुक्स होती हैं या नहीं, आप की पसंद के सब्जैक्ट के प्रोफैसर हैं या नहीं, क्लासेज औन टाइम होती हैं या नहीं. मु?ो याद है हमारे कालेज में कुछ दोस्त जो साइंस पढ़ रहे थे उस समय जब वे साइंस लैब में जाते तो ऐक्सपैरिमैंट होता था जो एक लैब असिस्टैंट ही करता है क्योंकि इतने सारे बच्चे थे तो हरकोई नहीं कर सकता था. आप तो खड़े हो उसे देख रहे हो. तो एक तरह से आप ने साइंस की कैसे, आप ने तो देखी है.
मु?ो पता है कि इतना कोई नहीं देखता. मगर आप के पास औप्शन है तो आप इस पर गौर कर सकते हो. आज के समय में रैग्युलर कालेज में एडमिशन मिलना बहुत मुश्किल है. इसलिए आप को जो कालेज मिल रहा है, एडमिशन लो और खूब पढ़ो क्योंकि पढ़ने से ही आगे के रास्ते खुलते हैं, साथ ही कालेज लाइफ खूब ऐंजौय भी करो.
समय में पीछे जा कर खुद से और आज के एक 17 साल के स्टूडैंट से जो इस समय कैरियर चुनाव में कन्फ्यूजन से घिरा है, उस से क्या कहना चाहेंगी?
देखिए उस समय का दौर कुछ और था. कुछ नहीं जानने पर भी काम चल जाता था. मु?ो याद है उस समय मैं बाहर घूमतीं फिरती थी, बुक्स पढ़ती थी. लाइफ अच्छी थी, टैंशन नहीं लेती थी. मगर आज का समय अलग है. आज बदहवासी है. मेरे साथ क्या होगा? क्या करूंगा? पेरैंट्स पीछे पड़े रहते हैं कि क्या होगा? क्या करेगा? यही स्टूडैंट्स की लाइफ हो गई है.
तो मैं यही कहूंगी कि कैरियर की चिंता में पढ़ाई से दूर मत हो. बहुत बच्चे कैरियर के प्रैशर वह पढ़ते हैं जो उन्हें पसंद नहीं और पढ़ते भी हैं तो पूरा ध्यान कैरियर की चिंता में लगा रहता है. इसलिए इस समय सिर्फ पढ़ने पर ध्यान दो जो पसंद है वह पढ़ो.
पढ़ोगे तो रास्ते अपनेआप बनते जाएंगे क्योंकि पढ़ाई ही आप की मंजिल की सीढ़ी है. एकएक कर आगे बढ़ो. पढ़ाई के समय सिर्फ पढ़ाई, कैरियर की चिंता नहीं वरना

