Career advice for students : दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफैसर यामिनी गुप्त को अपने टीचिंग कैरियर में 25 साल हो गए हैं. आज गृहशोभा प्रोफैसर यामिनी के इंटरव्यू के जरीए कालेज की ओर बढ़ते स्टूडैंट्स के लिए कैरियर एडवाइस और गाइडैंस ले कर आई है.
हाई स्कूल में वह कौन सा सब्जैक्ट है जो फाइनैंस और इकौनौमिक्स के लिए बहुत उपयोगी है?
मैं ने स्कूल में साइंस विषय लिया था. लेकिन जब कालेज में सब्जैक्ट लेने की बात आई तो उस समय मैं अपनी स्कूल की कैमिस्ट्री टीचर से मिली. उन्होंने मुझे समझाया कि साइंस के किसी भी सब्जैक्ट में अच्छा प्रोफैशन बनाने के लिए पोस्ट डाक्टरल करना पड़ेगा. फिर उन्होंने ही मुझे इकौनौमिक्स लेने की सलाह दी. शुरुआती समय मेरे लिए थोड़ा मुश्किल रहा लेकिन फिर प्रैक्टिस करतेकरते मुझे इस सब्जैक्ट में पकड़ मिल गई. साथ मैं यह भी कहूंगी कि मैथेमैटिक्स इस फील्ड के लिए बहुत आवश्यक है इसलिए स्टूडैंट्स को चाहिए कि वे पहले से इस विषय पर ध्यान दे इसे मजबूत करें.
एक अच्छे कालेज का चयन करते समय क्या देखें?
स्टूडैंट्स को कालेज का चयन कालेज के आधार पर नहीं बल्कि अपने सब्जैक्ट के आधार पर करना चाहिए. वे देखें कि उन के सब्जैक्ट किस कालेज में सही से पढ़ाए जा रहे हैं, उन के अच्छे टीचर्स किस कालेज में हैं फिर उन कालेज का चयन करें. भले वे कालेज छोटे हों, उन की रैंकिंग टौप न हो लेकिन अगर वहां की पढ़ाई अच्छी है, टीचर्स अच्छे हैं तो आप को उस कालेज में एडमिशन लेना चाहिए. जरूरी नहीं बड़े कालेज में आप के सब्जैक्ट उपलब्ध हों या उन्हें सही ढंग से पढ़ाया जा रहा हो. जहां वे टीचर्स अच्छे होंगे, वहां की पढ़ाई भी अच्छी होगी, इसलिए अपने सब्जैक्ट कहां अच्छे पढ़ाएं जा रहे हैं उस पर ध्यान दे कर कालेज का चयन करें.
मैं ने देखा है कि स्टूडैंट्स अपने सब्जैक्ट पर ध्यान देने के बजाय कालेज के नाम पर एडमिशन लेते हैं जो एक गलती है. वे कालेज चले तो जाते हैं फिर जब उन का सब्जैक्ट वहां नहीं मिलता तो दुविधा में पड़ जाते हैं.
आप का टीचिंग की तरफ कैसे रुझान हुआ?
मेरे मास्टर के समय कंपनी प्लेसमैंट चल रही थी. मेरे बहुत से दोस्तों ने प्लेसमैंट ली. लेकिन उस समय मुझे ऐसा महसूस हुआ कि कौरपोरेट जौब मेरे लिए नहीं है. मुझे टीचिंग की ओर जाना चाहिए क्योंकि पढ़ाना, बच्चों से जुड़ना मुझे पसंद है. हां, मैं ने कुछ समय फिक्की में काम किया लेकिन वहां मुझे संतुष्टि नहीं मिली. मुझे महसूस हुआ कि यह प्रोफैशन मेरे लिए नहीं है. मेरी मन की आवाज टीचिंग ही है और मैं ने वापस टीचिंग ही जौइन की.
इस तरह की और वीडियो देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें
क्या प्रोफैसर बनने के लिए पीएचडी आवश्यक है या कोई प्रोफैशनल ऐक्सपर्ट भी यह भूमिका निभा सकता है?
अगर आप सैंट्रल यूनिवर्सिटी की बात करें तो हां पीएचडी जरूरी है. आप को प्रोफैसर बनने के लिए पीएचडी करनी पड़ेगी. दूसरा अगर आप को किसी सब्जैक्ट का अच्छा नौलेज है, आप उस के प्रोफैशनल हैं तो आप कालेज में उस पर चर्चा कर सकते हैं. आज बहुत से लोग अपने सब्जैक्ट के प्रोफैशनल ऐक्सपर्ट कालेज यूनिवर्सिटी में स्टूडैंट्स को अपने एक्सपीरियंस द्वारा सिखाने आते हैं जिन्हें प्रोफैसर औफ प्रैक्टिस के रूप में लिया जाता है.
अपने सब्जैक्ट नौलेज के साथ एक प्रोफैसर में कौन से गुण होने चाहिए?
अपने सब्जैक्ट नौलेज के साथ एक प्रोफैसर में या जो स्टूडैंट एक प्रोफैसर बनना चाहता है उस के लिए समय के साथ अपडेट रहना बहुत जरूरी है. उसे पता होना चाहिए कि दुनिया में क्या हो रहा है. जो सब्जैक्ट उस ने चुना है उस में क्या नया हो रहा है, क्या रिसर्च चल रही है. आप को सौफ्ट स्किल्स, सौफ्टवेयर की अच्छी नौलेज होनी चाहिए क्योंकि आज के स्टूडैंट्स दुनिया की बहुत खबर रखते हैं. उन्हें नई रिसर्च, चेंज, करंट इन्फौरमेशन, न्यूज रहती है. इसलिए आप को भी सारी इन्फौरमेशन रखनी चाहिए ताकि जब स्टूडैंट्स उन चीजों को ले कर आप से कोई सवाल करे तो आप उस का जवाब दे पाएं, उस की जिज्ञासा को पूरी कर सकें. आप को सिर्फ थ्योरी तक सीमित नहीं रहना क्योंकि आज आप का प्रैक्टिकल के जरीए भी सीखाना जरूरी है, इसलिए अपनी प्रैक्टिकल प्रैक्टिस पूरी रखें.
साथ मैं उन से यह कहना चाहूंगी कि टीचिंग एक ऐसी फील्ड है जहां आप को बर्नआउट फील नहीं होगा जोकि अब आम कौरपोरेट सैक्टर में देखनेसुनने को मिलता है. मुझे टीचिंग में 25 साल हो गए और मुझे कभी बर्नआउट जैसा कुछ महसूस नहीं हुआ. मुझे तो हमेशा यही लगता है कि कैसे स्टूडैंट्स को कुछ नया सिखाती रहूं.
आगामी 5-10 साल में आप फाइनैंस और इकौनौमिक्स सैक्टर में क्या बदलाव देख रही हैं, साथ ही यहां स्टूडैंट्स के लिए क्या स्कोप रहेगा?
पहले तो जो बदलाव हम हर जगह देख रहे हैं वह है आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस. कौरपोरेट सैक्टर हो या टीचिंग यह हर जगह है. हम सभी को इस से डील करना पड़ेगा क्योंकि यह आगे बढ़ता ही रहेगा, साथ हम इस पर कितना भरोसा कर सकते हैं वह भी देखना होगा. लेकिन हां एक टीचर की इंपौर्टैंस नहीं जा सकती क्योंकि आप एक कंप्यूटर पर वीडियो देख कौंसैप्ट सीख सकते हैं लेकिन अपने डाउट, सवाल वीडियो से नहीं कर सकते. वहां आप को टीचर की ही आवश्यकता होगी. एआई हर किसी को इजैक्ट करेगा. हमें समय के साथ उस के बदलाव देखते हुए खुद को ढालते रहना होगा.
रहा स्कोप की बात तो आज टीचिंग के साथ फाइनैंस और इकौनौमिक्स दोनों में ही बहुत कैरियर औप्शन हैं जैसे रिसर्च, कंसल्टैंसी, पब्लिक पौलिसीज, डाटा ऐनालिसिस जैसे सैक्टर्स में बहुत स्कोप हैं. बहुत लोग अपना स्टार्टअप भी शुरू करते हैं. तो अगर आप के पास अच्छा नौलेज है तो स्कोप और औप्शन की कमी नहीं.
इंटरव्यू में दूसरों से अलग दिखने के लिए एक स्टूडैंट्स किन स्किल्स को अपनाए?
आज का समय चैलेंज के साथ कंपीटिशन का भी है. एक ही सीट के लिए बहुत सारे कैंडिडेट मौजूद हैं. इसलिए आप दूसरे कैंडिडेट्स से ज्यादा काबिल दिखो और उस के लिए कुछ स्किल्स होनी जरूरी हैं. जैसे फौरेन लैंग्वेज आना, कोई सौफ्टवेयर स्किल्स आना या कोई सोशल वर्क जैसे एनजीओ के साथ काम करना. खुद को दूसरे से अच्छा दिखाने के लिए आप में कुछ तो अलग होना चाहिए. इस तरह की स्किल्स, काम आप को एक अच्छी छवि देते हैं, साथ ही कम्युनिकेशन स्किल भी बहुत जरूरी है, जिस में रिटन कम्युनिकेशन स्किल भी है क्योंकि आप जौब करें या अपना काम, आप को कम्यूनिकेट ईमेल या मैसेज से करना होता है, इसलिए आप जो लिखें वह सही और अच्छा होना चाहिए और अगर आप के काम में रिसर्च, डौक्यूमैंटेशन जैसे पार्ट भी हैं तो आप को अपनी राइटिंग स्किल्स पर काम करना चाहिए. इसलिए कुछ ऐसी स्किल होनी जरूरी है जिस से आप एक रिक्रूटर की नजर में अपनी अलग पहचान बना सकें.

