Professional growth :  32  साल की सलोनी को कौरपोरेट क्षेत्र में काम मिला, उसे अच्छी सैलरी भी मिलने लगी. मगर सलोनी अपने काम से अधिक बौस को खुश करने में लगी रहती. उन के साथ लंच, चाय पर जाना, उन के किसी काम को पहले कर देना, औफिस गौसिप को उन तक पहुंचाने का काम आदि करती रही, ऐसे करीब 3 साल बीत गए और उसे 2 प्रमोशन भी मिलीं.

मगर चौथे साल में उस के काम की गहराई को दूसरे लोग भी नोटिस करने लगे क्योंकि ओहदे के अनुसार सलोनी का काम नहीं मिल रहा था. उस की प्रोडक्टिविटी धीरेधीरे कम होने लगी थी.

इतना ही नहीं, किसी के कुछ सलाह देने पर वह उसे मानने को राजी नहीं होती थी. ऐसे में उस के साथ काम करने वाले सभी की प्रमोशन हुई, लेकिन सलोनी का नहीं. अब सलोनी बौस के पास जा कर रोने लगी. बौस ने समझाया और कहा कि उसे काम के नए तरीके अपना लेने चाहिए ताकि सब की नजर उस पर पड़े. सलोनी ने बात सुनी. लेकिन उस पर अमल नहीं किया और अगले साल कंपनी ने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया.

सोशलाइज होना गलत नहीं

ऐसा सिर्फ सलोनी के साथ ही नहीं हुआ. आज के अधिकतर युवा अपनी इस हरकत की वजह से नौकरी गंवा रहे हैं. इस का पता उन्हें तब चलता है, जब नौकरी उन के हाथ से निकल जाती है और दूसरी मिलनी मुश्किल होने लगती है. असल में औफिस में सोशलाइज होना सही होता है, जिस से आप एकदूसरे की प्रतिभा को जान सकते हैं और खुद में उस परिवर्तन को ला सकते हैं लेकिन हद से अधिक कुछ भी करने पर वह सब की निगाह में आता है.

खासकर औफिस में चापलूसी से बचने और अपने वास्तविक काम पर फोकस करने के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी होता है.

इस के अलावा हर कर्मचारी को यह समझ लेना जरूरी होता है कि कंपनी ने उसे किस जौब प्रोफाइल के अंतर्गत रखा है और उसे काम कैसे करना है.

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इस के लिए बौस के आसपास नहीं बल्कि अपने काम की विजिबिलिटी को बढ़ाना आवश्यक होता है, दिखावटी कार्यों से हमेशा दूर रहना अच्छा होता है. इस से आप बिना चापलूसी किए बौस को प्रभावित कर सकते हैं और अपनी प्रोडक्टिविटी को बढ़ा सकते हैं.

इस बारे में मनोवैज्ञानिक राशिदा कपाडि़या कहती हैं कि काम हमेशा बोलता है, जिस में अपने लक्ष्यों को पूरा करना जरूरी होता है. इस के साथसाथ काम का रिजल्ट समय पर बौस को दिखाना आवश्यक होता है. काम में क्या चल रहा है, हमेशा उन को इस बात की जानकारी देते रहना चाहिए. यह बात तब भी लागू होती है जब आप से कोई गलती हो गई हो या कोई दूसरी बुरी खबर हो.

हो सके तो उन्हें अपने रोजाना के काम का अपडेट देते रहें. आप ने जो प्रोग्रैस की उस के भी हाइलाइट्स देते रहें.

सरकारी व्यवस्था है खराब

असल में सरकारी औफिसों ने कर्मचारियों को ऐसी आदत डाल रखी है. वहां के कर्मचारियों के काम करने का तरीका अलग होता है, वहां कर्मचारी मलाईदार पोस्ट पा लेने के बाद काम से अधिक बौस की जीहुजूरी में लग जाते हैं, जिस से उन्हें प्रमोशन, छुट्टियां, ट्रिप में जाने जैसी सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं.

वहां परफौर्मैंस की कोई जगह नहीं होती, जबकि प्राइवेट सैक्टर में ऐसा नहीं चल पाता और कर्मचारी अपनी इस आदत की वजह से नौकरी से हाथ धो बैठते हैं, जहां परफौर्मैंस ही सबकुछ होती है.

सफलता के लिए अपनाएं ये टिप्स

बौस के साथ हमेशा प्रोफैशनल संबंध रखें.

बौस की कार्यशैली को समझें और उसी के अनुसार अपने काम और अपडेट्स का तालमेल बैठाएं.

आजकल हर क्षेत्र में सक्रियता को बढ़ाने की आवश्यकता होती है. किसी भी प्रोजैक्ट की समस्या के साथसाथ उस का समाधान भी अपने बौस के सामने प्रस्तुत करें.

अपने काम पर बेहतर फोकस करने के लिए टू डू लिस्ट बनाएं.

दिन की शुरुआत में ही अपने महत्त्वपूर्ण कामों की लिस्ट बनाएं और प्राथमिकता के अनुसार करते जाएं.

पोमोडोरो तकनीक जो आजकल अधिकतर कौरपोरेट औफिसों में कर्मचारी फौलो करते हैं, जिस में 25 मिनट तक पूरी एकाग्रता के साथ काम करें और फिर 5 मिनट का ब्रेक लें, फिर काम करते जाएं. इस से काम की प्रोडक्टिविटी बढ़ती है.

मल्टी टास्किंग से बचना हमेशा आवश्यक होता है. एक बार में एक ही काम को करने की आदत डालें अन्यथा ध्यान भटकने की समस्या हो सकती है.

ध्यान भटकाने वाली चीजों को खुद से दूर रखें. मसलन, मोबाइल के नोटिफिकेशंस बंद कर दें, काम के दौरान फोन को म्यूट पर रखें या गैरजरूरी नोटिफिकेशंस को बंद रखें.

औफिस में सकारात्मक सीमा बनाए रखना बहुत आवश्यक होता है, सहयोगियों के साथ स्पष्ट संवाद रखें.

औफिस में काम करने के दौरान एकाग्रता के लिए इयरफोन या हैडफोन का उपयोग करें और इन का जरूरत के अनुसार ही प्रयोग करें.

यह न भूलें कि आप के बौस को भी अपने सीनियर को जवाब देना होता है और उन पर भी काम का बो?ा होता है. इसलिए बौस हमेशा ऐसे लोगों से खुश रहते हैं जो अपने काम को सीरियसली लेते हैं और उसे वक्त पर पूरा करते हैं.

अगर बहुत ज्यादा काम दिया है, जिसे वक्त पर पूरा करना पौसिबल नहीं तो उसे कहने से हिचकिचाएं नहीं बल्कि सीधा संवाद रखें और यही आप के कैरियर के सफलता की कुंजी है.