Stream selection : नंदिनी पी. गौड़ा मैनेजमैंट प्रोफैशनल हैं, जिन का ऐकैडमिक बेस काफी स्ट्रौंग है. उन्होंने बी.टैक और इंडियन इंस्टिट्यूट औफ मैनेजमैंट बैंगलुरु से एमबीए किया है. उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत कौरपोरेट सैक्टर से की जहां उन्होंने स्ट्रक्चर्ड और हाई परफौर्मैंस ऐन्वायन्मैंट में अनुभव प्राप्त किया. फिलहाल वे डिजिटल मार्केटिंग कंसल्टिंग, टीचिंग और क्रिएटिव प्रैक्टिस कर रही हैं. वे फाउंडेशनल डिजिटल मार्केटिंग में मैंटर के रूप में लोगों को एडवाइस देती हैं, जहां वे स्पष्टता और व्यावहारिकता पर जोर देती हैं.
कंसल्टिंग के अलावा नंदिनी ग्लास पेंटिंग भी करती हैं जो उन की डिजाइन और कहानी कहने की रुचि दिखाता है. उन्हें लगता है कि ऐजुकेशन का असल मतलब है वास्तविक दुनिया में काम आना. उन का मानना है कि सार्थक काम करने के लिए दिशा की क्लैरिटी और पारंपरिक रास्तों से हट कर सोचने का साहस चाहिए.
पेश हैं, उन से ऐजुकेशन से जुड़े मसलों पर की गई बातचीत के मुख्य अंश:
आप ने ऐंटरप्रन्योरशिप को एक सीरियस औप्शन के रूप में कब से सोचना शुरू किया? क्या यह एक धीमा बदलाव था या एक स्पष्ट मोड़ था?
मेरी क्लैरिटी समय के साथ विकसित हुई. मैं ने एक निश्चित मकसद के साथ शुरुआत की लेकिन जैसे ही मैं डिफरैंट सब्जैक्ट्स और थिंकिंग के आगे एक्सपोज हुई मैं ने खुद को बेहतर ढंग से समझना शुरू किया. मैं कहूंगी कि मैं एक निश्चित मकसद से एक अधिक थौटफुल डाइरैक्शन की ओर बढ़ी जो मेरे नैचुरल इंट्रैस्ट्स और स्ट्रैंथ के साथ बेहतर ढंग से मेल खाती थी. मेरे मन में ऐंटरप्रन्योरशिप का विचार पहले से था लेकिन मैं पहले थोड़ा अनुभव लेना चाहती थी. इसलिए यह एक धीमा बदलाव था. मैं धीरेधीरे ऐंटरप्रन्योरशिप की तरफ बढ़ी.
आप के एमबीए करने के फैसले के पीछे कौन सी वजह थी?
एमबीए करने का फैसला एक सोचासमझ निर्णय था. मैं ऐंटरप्रन्योरशिप की ओर बढ़ने से पहले बिजनैस में एक मजबूत आधार बनाना चाहती थी और साथ ही वास्तविक दुनिया का कुछ अनुभव भी प्राप्त करना चाहती थी. एमबीए अनुभव ने मुझे न केवल बिजनैस कौन्सैप्ट्स से परिचित कराया बल्कि विविध सोच के तरीकों से भी अवगत कराया. विभिन्न पृष्ठभूमि के साथियों के साथ पढ़ाई करने से, जिन में अंतर्राष्ट्रीय छात्र भी शामिल थे, मुझे ग्लोबल पर्सपैक्टिव और वर्किंग स्टाइल्स की समझ मिली.
मुझे इंडिपैंडैंट रूप से कुछ बनाने और अपनी तरह से समस्याएं हल करने की आजादी पसंद आई. ऐंटरप्रन्योरशिप में सोच और प्रभाव का विस्तार होता है जो मुझे बहुत अच्छा लगा.
डिजिटल मार्केटिंग में किस तरह का व्यक्ति वास्तव में सफल होता है और किन्हें संघर्ष करना पड़ सकता है भले ही वे ऐजुकेशन के हिसाब से मजबूत हों?
जो लोग नैचुरली क्यूरियस, अडौप्टेबल और सीखने के लिए तैयार होते हैं वे इस क्षेत्र में अच्छा करते हैं. दूसरी ओर जो लोग तुरंत नतीजे की उम्मीद करते हैं या फिक्स्ड फौर्मूलाज की खोज करते हैं उन के लिए यह चुनौतीपूर्ण होगा भले ही उन के पास स्ट्रौंग ऐजुकेशनल बैकग्राउंड हो.
आज के युवाओं को डिजिटल मार्केटिंग को एक कैरियर के रूप में चुनने से पहले क्या ध्यान में रखना चाहिए?
युवाओं को सावधानी से सोचना चाहिए कि क्या वे काम के ऐनालिटिकल और क्रिएटिव ऐस्पैक्ट्स दोनों को ऐंजौय करते हैं. डिजिटल मार्केटिंग इसी इंटरसैक्शन पर बैठती है. उन्हें तत्काल परिणाम की उम्मीद के बजाय रियल स्किल्स सीखने में समय इनवैस्ट करने के लिए तैयार रहना चाहिए.
तकनीक विशेष रूप से एआई आज डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र को कैसे बदल रही है? आगे देखते हुए आप अगले कुछ वर्षों में इस फील्ड में क्या बदलाव देखती हैं और युवा प्रोफैशनल्स को इस के लिए कैसे तैयार रहना चाहिए?
एआई कई रूटीन टास्क्स को औटोमैटिक रूप दे कर और ऐक्सक्यूशन को तेज कर के इस फील्ड को तेजी से बदल रहा है. इस का मतलब है कि रियल वैल्यू थिंकिंग, स्ट्रैटेजी और डिसिजन मेकिंग में छिपा होगी न कि केवल ऐक्सक्यूशन में. आने वाले वर्षों में यह फील्ड अधिक इंटीग्रेटेड हो जाएगी और प्रोफैशनल्स को अलगअलग फील्ड्स में काम करने के बजाय कई पहलुओं को सम?ाने की आवश्यकता होगी. स्ट्रौंग फंडामैंटल्स जैसे कम्युनिकेशन, क्रिटिकल थिंकिंग और अडौप्टेबिलिटी को विकसित करना जरूरी होगा.
यदि आप आज फिर से अपना कैरियर शुरू कर रही होतीं तो क्या आप वही ऐजुकेशनल और प्रोफैशनल औप्शन चुनतीं या कुछ अलग करतीं?
यदि मैं फिर से शुरू करूं तो अभी भी एक स्ट्रौंग ऐकैडमिक बेस बनाने पर फोकस करूंगी. साथ ही मैं थोड़ा पहले ही रियल लाइफ ऐक्सपोजर प्राप्त करने की कोशिश करूंगी ताकि मेरे फैसले अधिक सटीक हों. जहां तक बात अलग करने की है तो मैं अपनी स्ट्रैंथ और प्रैफरैंसेज को समझने में अधिक समय बिताऊंगी और यह देखूंगी कि वे कैरियर के विभिन्न रास्तों से कैसे जुड़ती हैं. यह क्लैरिटी लौंग टर्म में महत्त्वपूर्ण डिफरैंस लाती है.
डिजिटल मार्केटिंग या ऐंटरप्रन्योरशिप में कैरियर बनाने पर विचार कर रही युवा लड़कियों को क्या सलाह देंगी?
मैं युवा लड़कियों को खुद पर विश्वास करने और छोटी असफलताओं के कारण आत्मविश्वास न खोने के लिए प्रोत्साहित करूंगी. चुनौतियां और असफलताएं किसी भी यात्रा का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं और उन्हें रुकने की वजह नहीं माना जाना चाहिए. साथ ही यह पहचानना भी महत्त्वपूर्ण है कि दुनिया हमेशा एकसमान अवसर प्रदान नहीं करती है. इसलिए महिलाओं के रूप में एकदूसरे का समर्थन करना और भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है. आत्मविश्वास बनाना, लगातार बने रहना और एकदूसरे का समर्थन करना एक सार्थक अंतर ला सकता है.
आप इस फील्ड में आने वाली लड़कियों की मांओं को क्या सलाह देंगी?
मांओं को मैं कहूंगी कि गाइडैंस तो महत्त्वपूर्ण है ही मगर यह भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है कि नई तलाश और इंडिपैंडैंट सोच के लिए जगह दी जाए. आज के कैरियर के रास्ते पहले से कहीं अधिक डाइनानेमिक हैं और क्यूरोसिटी अडौप्टेबिलिटी व सैल्फ बिलीफ को प्रोत्साहित करने से युवा लड़कियों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है.

