College selection tips : आभा और प्रीति दोनों ही कालेज के फर्स्ट ईयर की छात्रा हैं. आभा रोज 2 घंटे का सफर तय कर कालेज आती है और प्रीति कैंपस में रह कर ही पढ़ाई करती है. दोनों के भले एक ही प्रोगाम हैं लेकिन दोनों की परेशानी अगलअगल है. जहां आभा रोज कालेज आने के सफर से परेशान है. कालेज से घर तक की दूरी, रास्ते में आती सुनसान राहें और बसों की देरी और उन में बैठे कुछ संदिग्ध किस्म के लोग उस के मन को कई बार विचलित कर देते है, वहीं प्रीति कालेज होस्टेल में रहती है जो होस्टेल परिसर में आतेजाते लोगों और सीमित सुविधाओं से परेशान है.

कालेज चुनना एक महत्त्वपूर्ण निर्णय है जो स्टूडैंट के व्यक्तित्व, योग्यता कौशलता को निखार उस के कैरियर को आकार देता है, इसलिए कालेज का चयन करते समय हर संभव कारकों पर ध्यान दें, साथ ही गर्ल्स स्टूडैंट्स के लिए ऐकैडमिक मानदंडों के साथसाथ और भी बहुत सी आवश्यक और ध्यान देने वाली बातें हैं जैसे परिसर सुरक्षा, विशेष सहायता सैल, समावेशी एवं अनुकूल वातावरण क्योंकि हर गर्ल स्टूडैंट और उस के पेरैंट्स के लिए सुरक्षा प्राथमिक महत्ता और चिंता है. इसलिए कालेज का चयन करते समय ऐसे संस्थानों की तलाश करें जो सुरक्षित वातावरण को प्राथमिकता देते हैं.

गर्ल स्टूडैंट्स को कालेज का चयन करते समय ध्यान देने वाली बातें

स्थान और परिवेश: यह जरूर देखें कि कालेज की लोकेशन कहां है? क्या वह टाउन शहर है या कोई रिमोट एरिया, जहां से आनाजाना दुर्लभ होता है, साथ ही देखें कि क्या कालेज के आसपास का परिसर और परिवेश सुरक्षित है और वहां से आवागमन या परिसर से बाहर की गतिविधियां किस प्रकार की हैं.

ट्रांसपोटेशन: यदि आप अपने घर से रोज कालेज आएंगी तो देखिए कि घर से कैंपस का रास्ता कितनी दूर और कितना सुगम है? क्या यातायात के साधन आसानी से मिलते हैं और क्या उन में दूर तक सफर करना सुरक्षित है? साथ ही कालेज की लोकेशन भी देखें कि वह चहलपहल भरे शहर में है या किसी दूरदराज इलाके में ताकि आप सुनिश्चित कर सकें कि आप का रोज उस रास्ते से आनाजाना सुरक्षित होगा या नहीं, साथ ही अगर कालेज ट्रांसपोटेशन की सुविधा दे रहा है तो उस सुविधा को देखपरख लें.

जैंडर इक्वैलिटी: यहां इक्वैलिटी का अर्थ छात्रों की संख्या में बराबरी से नहीं बल्कि उन को दिए अधिकारों, सुविधाओं और बराबरी की सा?ोदारी से है. इसलिए सुनिश्चित करें कि कालेज में ऐसा तो नहीं कि लड़के केवल लिंग भेदभाव पर लड़कियों से अधिक छूट या समर्थन प्राप्त हों यानी ऐसा तो नहीं कि उस कालेज में सैक्सुअल डिस्क्रिमिनेशन होता हो.

लड़कों के साथ तालमेल और मित्रता: कालेज का चयन करते समय यह भी देखें कि उस कालेज में लड़कों का लड़कियों के साथ किस तरह का व्यवहार है. क्या उन के बीच सही तालमेल, मानसम्मान और मित्रता का उचित दायरा है या नहीं? कहीं ऐसा तो नहीं कि वहां बौय स्टूडैंट्स गर्ल्स स्टूडैंट्स को तंग करते हों, किसी तरह का रेसिज्म या डिस्क्रिमिनेशन करते हों.

कैंपस और होस्टल सुरक्षा: अगर गर्ल स्टूडैंट्स कैंपस में रह कर पढ़ने का सोच रही हैं तो उस कैंपस होस्टल के सुरक्षा उपायों का मूल्यांकन करें जैसेकि 24?7 सुरक्षाकर्मी और सुरक्षित छात्रावास और छात्रावास परिसर में सीसीटीवी की निगरानी. छात्रावास या गर्ल्स होस्टल में पर्याप्त संख्या में महिला सुरक्षा गार्ड और महिला वार्डन है या नहीं.

होस्टल सुविधा: गर्ल्स स्टूडैंट्स को यह पूछताछ कर लेनी चाहिए कि कालेज होस्टल में पर्याप्त सुविधा, स्वच्छता, सुरक्षा आदि है या नहीं क्योंकि उन के लिए एक लंबे समय तक होस्टल ही घर और होस्टल का रूम ही अपना कमरा होगा, जिस में उन्हें कालेज द्वारा दी गई सीमित सुविधाओं और सामान से गुजारा करना होगा.

समर्पित महिला सैल: देखें की कालेज में जिम्मेदार और ऐक्टिव महिला सैल या आंतरिक शिकायत समिति है या नहीं जो गर्ल्स स्टूडैंट्स की शिकायत और परेशानियों को दूर करने का प्रयास करती हो.

स्वास्थ्य और स्वच्छता: किसी होस्टल में पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं होना बहुत जरूरी हैं क्योंकि स्टूडैंट्स को एक लंबा समय कैंपस और होस्टल में बिताना होता है.

इसलिए शारीरिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथसाथ मानसिक स्वास्थ्य परामर्श भी कालेज में होना चाहिए क्योंकि बहुत सी गर्ल स्टूडैंट्स एक समय के बाद अकेलेपन की अनुभूति या निराशा महसूस करने लगती हैं, साथ ही किसी भी अनिश्चितता या आपातकालीन समय के लिए ब्लू लाइन मैडिकल सिस्टम का होना भी जरूरी है.

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फौलो करें ये टिप्स

रोहित बचपन से पढ़ने में बहुत तेज है. मैथेमैटिक्स जो स्टूडैंट्स को बुखार दे जाता है, वही रोहित का सब से पसंदीदा सब्जैक्ट है. 12वीं की परीक्षा में भी उस ने मैथेमैटिक्स में पूरे 100 अंक के साथ स्कूल में टौप किया और फिर (सीयूईटी) की परीक्षा में बैठा और उस में भी आगे निकला. इसलिए आज उस के पास अपने पसंद का कालेज चुनने का अवसर है. लेकिन यही अवसर उस के लिए उल?ान भी बन गया है क्योंकि विकल्प के दोनों कालेज ही बहुत बड़े हैं और दोनों ही उसे पसंद हैं, इसलिए किसी एक का चुनाव करना उस के लिए मुश्किल हो रहा है.

आज के समय में एक स्टूडैंट के लिए अपनी पसंद के कालेज का विकल्प होना बहुत बड़ी उपलब्धि और हैरानी की बात होती है क्योंकि आज कालेज में कटऔफ इतनी सख्त है कि आम डिगरी की पढ़ाई के लिए भी किसी आम कालेज में एडमिशन मिलना बहुत मुश्किल है और प्रीमियम कालेज की रेस में तो कई एंट्रैंस ऐग्जाम से हो कर गुजरना पड़ता है. तो यदि किसी स्टूडैंट को उस के अंकों और सफल प्रयासों के दम पर स्वयं कालेज चुनने का मौका मिले तो यह उस की बड़ी जीत होगी.

मगर कभीकभी यह जीत एक परेशानी भी खड़ी कर सकती है. अर्थात यदि कोई स्टूडैंट 2 अच्छे कालेज में से किसी एक का चयन करने में उलझ हो, तो उसे कैसे निर्णय लेना चाहिए?

ऐसी स्थिति में स्टूडैंट को सही फैसला लेने के लिए इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:

वित्तीय लागत: फीस एक बहुत बड़ा कारक है. इसलिए अपने विकल्पित कालेज में पूरी लगने वाली फीस को अवश्य ध्यान में रखे. अगर किसी साधारण कालेज या एक प्रीमियम कालेज कुछ पीछे आने वाले कालेज में एडमिशन मिल रहा हो, जहां कुछ कम फीस दे कर पूरी शिक्षा मिले तो इस में कोई हरज नहीं. आप का उद्देश्य अच्छी शिक्षा लेना है तो बड़े नाम के पीछे अपने मांबाप की जेब में कोई बड़ा छेद न करें क्योंकि कालेज का खर्च सिर्फ एडमिशन फीस तक सीमित नहीं होता. इसलिए कर्ज लेने की स्थिति से बचें और यदि कर्ज लेना ही पड़ता है तो उसे कम रखने की कोशिश करें.

लोकेशन: कालेज का चयन करते समय लोकेशन पर भी ध्यान दें. देखिए कि वह आप के निवास से कितना दूर है? जहां कालेज है वहां के आसपास लोकेशन कैसी है? क्या वह किसी शहर में है या कहीं दूरदराज इलाके में और क्या आप रोज इतनी भागदौड़ कर पाएंगे आनेजाने की? और आनेजाने का किराया आप की जेब को कितना भारी पड़ेगा.

शैक्षणिक गुणवत्ता: स्टूडैंट को देखना चाहिए कि अपनी पसंद के क्षेत्र या सब्जैक्ट से जुड़े स्टडी मैटीरियल, प्रैक्टिकल फैसिलिटी जैसे लैब, लाइब्रेरी में किताबों की उपलब्धि आदि सही रूप में उस कालेज में है या नहीं.

कालेज का परिवेश : घर से दूरी, परिवार से दूर कैंपस में जीवन का लंबा समय बिताना आसान नहीं होता है. हां सुनने और देखने में कैंपस लाइफ बहुत रोमांचित लगती है और बहुत जगह यह है भी. मगर जिस कालेज का आप चयन करने जा रहे हैं क्या वहां भी ये सब है? क्या वहां पढ़ाई के अलावा और कोई ऐक्स्ट्रा करिकुलर ऐक्टिविटीज हैं जिन में आप का मन लगा रहे, आप को कुछ और भी सीखने को मिले. और सब से पहले क्या वहां का ऐन्वायरन्मैंट यानी परिवेश आप के मन से मेल खाता है? कहीं ऐसा तो नहीं आप कुछ समय बाद वहां अकेला महसूस करने लगें या दूसरों से अलग होने, अलग दिखने की परेशानी आप के मन में घर कर जाए.

कई बार छोटे टाउन या ग्रामीण क्षेत्रों से आए स्टूडैंट्स को इस तरह की अनुभूति होती है. इसलिए कालेज का चयन करते समय यह भी देखें कि अगर कैंपस में रहना है तो क्या आप उस कैंपस के ऐन्वायरन्मैंट में कर्म्टेबल फील करेंगे या नहीं.

प्लेसमैंट दर और ऐलुमनी नैटवर्क: कालेज के चयन के समय वहां प्लेसमैंट दर पर भी ध्यान देना है. साथ ही अच्छा होगा कि स्टूडैंट पूर्व स्टूडैंट्स यानी कालेज के ऐलुमनाई से कनैक्ट करें ताकि उसे कालेज से जुड़ी बातों और कालेज प्लेसमैंट की प्रक्रिया या उस से जुड़ी बातों का पहले से पता चल सके और वह अपने चयन की शर्तों को ठीक से देखपरख सके.