Trending courses 2026 : दिव्या को हमेशा अच्छा खाना और खिलाने का शौक था. वह अपना बहुत सारा टाइम किचन में बिताती थी. कोई न कोई डिश ऐक्सपैरिमैंट करती रहती थी. बचपन ही फूड आइटम्स के बैनिफिट्स जैसेकि किस में प्रोटीन है, किस में फैट आदि
घर वालों को सम?ाती रहती थी. पेरैंट्स को उस की यह बात पसंद तो थी पर वे बहुत चिंता भी करते थे क्योंकि दिव्या का ज्यादा ध्यान इन्हीं बातों पर रहता था स्कूल की नोट्स बुक्स खासकर मैथेमैटिक्स, इकौनौमिक्स आदि पर नहीं, जिस से घर वालों को दिव्या का स्कोर गिरने का डर लगा रहता.
बोर्ड ऐग्जाम के बाद हुआ भी वही. स्कोर कम होने पर अच्छे मैनेजमैंट कालेज में दिव्या का एडमिशन नहीं हो पाया, जिस से पेरैंट्स नाराज भी थे और निराश भी. जब पेरैंट्स ने दिव्या से सवाल किया कि अब क्या करोगी तो उस ने कहा कि मैं फूड की पढ़ाई करूंगी.
पेरैंट्स को यह बात बड़ी अजीब लगी कि भला फूड की भी कोई पढ़ाई होती है. सब का यही सवाल था.
किसी ने पूछा, ‘‘तो क्या तुम्हें होटल मैनेजमैंट में जाना है?’’
तब दिव्या ने कहा, ‘‘नहीं, मैं फूड की बात कर रही हूं.’’
पेरैंट्स को यह बात बहुत हलकी लगी. मगर दिव्या को अपने चुनाव पर भरोसा था और फिर उस ने फूड और न्यूट्रिशन में ग्रैजुएशन की.
दिव्या के चुनाव पर सभी को शंका थी कि भला फूड और न्यूट्रिशन डिगरी में कैसा और कितना सफल कैरियर होगा. मगर आज दिव्या उसी डिगरी के आधार पर अपना खुद का डाइट प्रोग्राम चलाती है, मरीजों को, आम लोगों को बेहतर हैल्दी डाइट प्लान और टिप्स देती है. आज वह अपनी रुचि को अपना प्रोफैशन बना कामयाब है.
बदलाव और अवसर
आज का मौडर्न वर्ल्ड सिर्फ मौडर्न कपड़ों, गानों या गैजेट्स तक सीमित नहीं है बल्कि यह दौर मौडर्न साइंस और मौडर्न आर्ट ऐजुकेशन का भी है जहां ऐजुकेशन सैक्टर और प्रोफैशनल सैक्टर में इतने नए बदलाव और अवसर आए हैं कि एक स्टूडैंट सिर्फ पुराने ऐजुकेशन सिस्टम और सिर्फ कुछ पेशों यानी प्रोफैशनल औप्शन तक सीमित नहीं रहा.
आज एक स्टूडैंट के पास 1-2 नहीं बल्कि बहुत सारे अच्छे विकल्प मौजूद हैं. अब बच्चे की तरक्की सिर्फ इस पर नहीं टिकी कि वह कितने ज्यादा अंक ले कर आया है. आज उन बच्चों के पास भी उज्ज्वल भविष्य के कई अवसर हैं जो परीक्षा में अवल नहीं आए या कुछ अंकों से पीछे रह गए, साथ ही उन स्टूडैंट्स के लिए भी कैरियर कोर्सेज की कमी नहीं, जिन स्टूडैंट्स को ज्यादा पढ़ना पसंद नहीं, पर शर्त यह है कि उन की किसी न किसी कला, आर्ट या क्षेत्र में रुचि हो. अब भले वह डांस हो, क्राफ्ट हो या कोई स्पोर्ट्स, फोटोग्राफी या कोई अन्य ऐक्टिविटी. बस स्टूडैंट को अपनी पसंद, अपना लक्ष्य जानने, सम?ाने की जरूरत है ताकि वह समय पर उन क्षेत्रों में मौजूदा कोर्स और अवसरों को जान सके और अपना सके.
जिस तरह पहले लोग योगा को सिर्फ एक सुबह का व्यायाम ही सम?ाते थे लेकिन आज लाखों स्टूडैंट्स उसे सीख प्रोफैशनल योगा इंस्ट्रक्टर बन बहुत सक्सैसफुल हैं. ठीक वैसे ही फौरेन लैंग्वेज जिसे पहले बहुत ही कम लोग सीखते थे या कहे वही सीखते जिन्हें काम के सिलसिले में दूसरे देश जाना होता था या जो सरकारी क्षेत्रों में ऐसे पदों पर थे, जहां वह भाषा आनी जरूरी हो.
मगर आज कोई फौरेन लैंग्वेज आना आप की स्किल में एक ऐड औन, एक प्लस पौइंट की तरह है जो आप के रिज्यूम को वजन देता है, साथ ही बहुत से स्टूडैंट्स इन्हें सीख कर अपनी खुद की कोचिंग शुरू कर लेते हैं.
प्रैक्टिस और व्यावहारिक शिक्षा
आज बहुत से स्टूडैंट्स अच्छे अंक होते भी आम पढ़ाई कर रहे हैं या वह विषय पढ़ रहे हैं, जिस में उन की कोई रुचि ही नहीं. बहुत से ऐसे स्टूडैंट्स भी हैं, जिन का ऐकैडमिक इतना खास नहीं लेकिन उन की स्किल्स प्रैक्टिस में अच्छी पकड़ और इच्छा है. मगर उपलब्ध स्किल्स बेस्ड कोर्सेज की जानकारी न होने के कारण उन की क्षमता, उन के कौशल को मौका नहीं मिल पा रहा है.
साथ ही आज का कालेज ऐजुकेशन सिस्टम विषय को रटने के बजाय कौशल, स्किल्ड बेस्ड प्रैक्टिस और व्यावहारिक शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है ताकि 21वीं सदी की बदलती टैक्नोलौजी और प्रोफैशनल स्किल्ड, टैलेंट बेस्ड अवसरों और मांग यानी वर्कफोर्स को पूरा किया जा सके.
आज का ऐजुकेशन प्रोग्राम पारंपरिक तरीकों के विपरीत आधुनिक शिक्षा, अनुकूलन क्षमता, आलोचनात्मक सोच अर्थात क्रिटिकल थिंकिंग और तकनीकी ज्ञान पर ध्यान केंद्रित करता है, जिस से ग्रैजुएट स्टूडैंट्स को रोजगार के अच्छे अवसर मिले, उन की क्षमता बढ़े, अच्छी सैलरी मिले और वे हर रूप से बढ़ते और बदलते प्रोफैशनल सैक्टर में आगे बढ़ने के लिए तैयार रहें.
प्रोफैशनल डिगरी
आज पहले से प्रचलित और चलन में आ रहे रैग्युलर ग्रैजुएशन जैसे बीए, बीकौम और कुछ प्रोफैशनल डिगरी जैसे इंजीनियरिंग, एमबीबीएस आदि के साथ आज यूनिवर्सिटी में ऐसे बहुत से ग्रैजुएशन प्रोग्राम या औप्शन हैं, जिन में स्टूडैंट्स की कला, कौशल को निखारा जाता है. प्रैक्टिकल और स्किल्ड बेस्ड जिन्हें कर एक स्टूडैंट बहुत अच्छा भविष्य बना सकता है. उन्हीं में से कुछ निम्न हैं:
रोबोटिक्स साइंस ऐंड टैक्नोलौजी.
फूड टेक्नोलौजी.
रियल ऐंड अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर.
आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस.
वायरोलौजी ऐंड इम्यूनोलौजी.
डाटा साइंस.
फैमिली बिजनैस ऐंड ऐंटरप्रन्योरशिप.
ऐनीमेशन ऐंड कौमिक्स.
और्गेनिक ऐग्रीकल्चर.
नैनोटैक्नोलौजी.
न्यूरोसाइकोलौजी ऐंड न्यूरोसाइंस.
फारैस्ट्री ऐंड वाइल्डलाइफ साइंस.
इंटरनैशनल रिलेशन.
फौरेन लैंग्वेज.
साइबर सिक्युरिटी.
जिओ इन्फौर्मैटिक्स ऐंड रिमोट सैंसिंग.
ऐंथ्रोपोलौजी.
प्रोड्क्ट डिजाइन.
लाइफ साइंस.
फिनासिअल टैक्नोलौजी.
डिजिटल मार्केटिंग ऐंड ब्रांडिंग.
आज आप के पास कैरियर बनाने के इतने सारे क्षेत्र उपलब्ध हैं कि आप कम अंकों की वजह से या मनचाहे कालेज में एडमिशन न मिलने की वजह से अथवा पढ़ाई में कमजोर होने की वजह से पीछे नहीं रह सकते. इसलिए मायूस न हों. बस धैर्य रखें और शांति से मौजूदा विकल्पों पर विचार करें.
आज यूनिवर्सिटी, कालेज में स्टूडैंट्स के लिए बहुत सारे स्किल्ड बेस्ड प्रोग्राम और स्ट्रीम उपलब्ध हैं, जिन्हें कर स्टूडैंट्स अपना अच्छा भविष्य बना सकते हैं.
ये प्रोग्राम आज के मौडर्न, टैक्नोलौजी से लैस दौर में बेहतर कैरियर बनाने के उद्देश्य से डिजाइन किए गए ताकि स्टूडैंट्स डिजिटल और टैक्नोलौजी की तेजी से बदलती दुनिया में कहीं पीछे रह न जाए.
आज टैक्नोलौजी के साथ आर्ट, कला और स्किल बेस्ड प्रोफैशन का बोलबाला है, साथ ही आज इन प्रोग्राम्स के जरीए स्टूडैंट्स की ग्लोबल रीच भी बढ़ रही है यानी आज ऐसे बहुत से कोर्स या ग्रैजुएशन प्रोग्राम आ चुके है, जिन्हें कर स्टूडैंट्स अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नौ
आज के ग्रैजुएशन प्रोग्राम सिर्फ किताबी ज्ञान यानी ऐकैडमिक शिक्षा तक सीमित नहीं बल्कि आज के ग्रैजुएशन प्रोग्राम्स कैरियर बनाने के टूल हैं यानी कैरियर औरिएंटेड प्रोग्राम्स हैं.

