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सुदेशना  दत्ता, कंपनी Absolutdata Analytics की Evp एंड को-फाउंडर है. जो वैश्विक स्तर पर कंपनीज को मार्केट रिसर्च और एडवांस्ड ऐनालिटिक्स प्रदान करती है. आज गृहशोभा उन के इंटरव्यू के जरीए, स्कूल से कालेज की ओर बढ़ते स्टूडैंट्स के लिए कुछ एडवाइस ले कर आई है:

क्या आप को अपने चुने हुए कैरियर को ले कर कभी मन में प्रश्न उठे?

मैं कैमिकल इंजीनियरिंग करना चाहती थी क्योंकि मेरे पेरैंट्स वैज्ञानिक थे. कैमिकल इंजीनियरिंग जो बायोकैमिस्ट्री या मौलिक्यूलर बायोलौजी से मेल खाता थी, जिस में मेरे पेरैंट्स थे और फिर मेरा भाई भी

इसी फील्ड में प्रोफेसर बना. मगर मेरा रुझान ऐप्लाइड की तरफ रहता था तो फिर मैं आर्किटैक्चर के क्षेत्र में गई. वहां कुछ समय बाद मुझे लगा कि मुझे कुछ और करना है तो फिर संरचनात्मक इंजीनियरिंग में गई. मगर वहां भी कुछ समय बाद यह एहसास हुआ कि यह मेरा क्षेत्र नहीं है. फिर निर्माण के क्षेत्र से मैं एमबीए की ओर बढ़ी.

आप की प्रोफैशनल जर्नी की शुरुआत कैसे हुई?

मेरी पहली नौकरी न्यूयौर्क शहर में फाइजर में थी. फाइजर में मुझे एमबीए के पहले और दूसरे वर्ष के बीच ग्रीष्मकालीन प्लेसमैंट मिला जो फिर पीपीओ में बदल गया. फाइजर में कुछ वर्षों के बाद मैं ब्रांड प्रबंधन क्षेत्र में शिकागो में क्राफ्ट फूड्स में गई. मुझे याद है कि जब हम ने ऐब्सोल्यूट डेटा के लिए पहले दौर की फंडिंग जुटाई उस समय बाजार में गिरावट आई थी. तब तक हम 3 लोग थे जिन्होंने ऐब्सोल्यूट डेटा शुरू किया था. मैं और मेरे 2 सहसंस्थापक. हम ने इस संगठन को बूटस्ट्रैप किया जो वर्षों बाद मार्केटिंग ऐनालिटिक्स और एआई में तबदील हो गया. यह एक बहुत बड़ा लर्निंग ऐक्सपीरियंस रहा. हम 3 लोगों से शुरू हुई कंपनी आज 500 लोगों का संगठन बन गया है.

आज 21वीं सदी में भी HOD सीट्स पर वूमन की संख्या कम होने के क्या कारण लगते हैं?

पहला तो सोच का. आज प्रोफैशन के क्षेत्र में भी लोगों की सोच कुछ स्तरों को ले कर बहुत अलग है क्योंकि उन का परावेश एकदूसरे से अलग है तो सोच भी अलग होती है. उन की वैल्यू, फोकस अलग है और हमारे देश में तो मैनवूमन को ले कर बहुत जगह बहुत अलग वैल्यूज सैट की गई हैं. इसलिए बहुत सी जगह या प्रैशर में आप खड़े नहीं हो पाते.

दूसरा आज भी घरपरिवार की जिम्मेदारी महिलाओं पर है. हां, फाइनैंशियल डिपैंडैंसी के साथ उन का परिवार में औदा जरूर बढ़ा है. लेकिन आज भी परिवार को संभालने, बच्चों को खिलाने से ले कर तैयार करने तक की जिम्मेदारी मां की ही होती है तो बहुत सी महिलाएं इन के बीच फंस जातीं और आगे नहीं निकल पातीं.

मगर अब का समय पहले से काफी बेहतर हो रहा है. पिछले 50 सालों में मैं ने साइंस, स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में महिलाएं बड़ी लीडर बन कर सामने आई हैं. इंडिया ही नहीं दुनिया में उन का नाम है.

क्या एक कालेज की अहम भूमिका होती है कैरियर में?

हां, एक कालेज की बहुत बड़ी भूमिका रहती है क्योंकि आप देखिए आप सिर्फ एक कालेज में नहीं जा रहे. आप ऐसे लोगों से जुड़ेंगे, जिन के पास भी आप के जैसा सब्जैक्ट होगा. वहां आप बहुत से स्टूडैंट्स, शिक्षकगण, व्यापक प्रशासन, दृष्टिकोण, आप इन सब से जुड़ेगे. इसलिए आप चैक करो, देखो कि आप की सोच, आप की वैल्यूज वहां से मैच कर रही हैं. हां यह हमेशा आप के हाथ में नहीं. लेकिन आप थोडा रिसर्च करो. आप को अच्छे मार्क्स जीपीए की जरूरत पड़ेगी. मगर आप यह भी देखें कि आप क्या करना चाहते हैं और इंस्टिट्यूट से आप को क्या मिल रहा है.

एक कैरियर का चुनाव करते समय स्टूडैंट्स क्या गलतियां करते हैं?

पहली है भेड़चाल कि मेरा दोस्त यह कर रहा है इसलिए मैं भी यही करूंगा जो ठीक नहीं है. स्टूडैंट को अपनी सामर्थ्य, अपनी पसंद और अपनी परफौर्मैंस को ध्यान में रख कर कैरियर आप्शन का चुनाव करना चाहिए.

दूसरी बहुत से स्टूडैंट्स यह सोच कर कि मुझे खुश रहना है और मुझे यह पसंद नहीं इसलिए मैं वह करूंगा, यह ठीक नहीं. जैसे मुझे फिजिक्स पसंद नहीं इसलिए मैं कैमिस्ट्री लूंगा, यह ठीक नहीं. कैमिस्ट्री लेने से पहले आप सोचो कि कैमिस्ट्री सच में आप को पसंद है या नहीं? क्या आप कैमिस्ट्री पूरी तरह से निभा पाओगे और कैमिस्ट्री के साथ आगे बढ़ने पर आप के लिए कितना स्कोप है?

तीसरी स्टूडैंट्स कल का सोच कर कि मुझे यह बनना है, यह करना है की धुन में अपना आज जीना भूल जाते हैं. हां, यह जरूरी है कि वे अपने आगे की सोचें, आगे 5 या 10 साल सोच कर चलें कि उन्हें क्या पसंद है, वे क्या करना ऐंजौए करते हैं, जिसे कर वे आगे की लाइफ में खुश रह सकें. मगर वे कल के फोकस के साथ अपना आज भी जीएं कि आज क्याक्या ऐंजौए कर सकते हें.

कैरियर के चुनाव में आप स्टूडैंट्स को क्या एडवाइस देना चाहेंगी?

पहली आप को अपनी वैल्यूज पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि ये वैल्यूज ही जीवनभर आप के साथ रहती हैं.

दूसरी आप को क्या करना पसंद है और इस पसंद की क्या गहराई है.

तीसरी क्या इस पसंद से अच्छा प्रोफैशन बनाया जा सकता है? क्या मैं इस काम को ऐंजौए कर पाऊंगा? क्या दुनिया में इस की वैल्यू होगी, साथ ही अपनी पसंद के सब्जैक्ट या कैरियर को ले कर अपने आदर्श या उन लोगों से बात करो जो इन चीजों का ज्ञान रखते हों क्योंकि मैं ने देखा है बहुत से स्टूडैंट्स दूसरे स्टूडैंट्स को देख कर अपना सब्जैक्ट या कैरियर चुनते हैं. मगर क्यों? आप खुद एक बार शांति से सोचो कि क्या आप के लिए वह फील्ड ठीक है.

उस के बारे में डीप थिंकिंग करें कि क्या वहां जाना सही है? क्या आप वह कर पाएंगे? क्या वहां आगे स्कोप है? साथ ही पेरैंट्स से कहना चाहूंगी कि आप का लड़का हो या लड़की, कोई भेदभाव न करें. दोनों समान हैं, योग्यता दोनों में है. लड़कियां कोई अनुचित जोखिम न लें. जैसे आधी रात को घूमने निकल गए. एक कैलकुलेटेड तरीके से आगे बढ़ें, साथ ही दोनों अच्छे रोल मौडल चुनें.

आज की सोशल मीडिया इंडस्ट्री की वजह से राइट रोल मौडल चुनना बहुत मुश्किल है. हां, इस का दूसरा पहलू भी है कि आज आप की पहुंच पूरी दुनिया तक है. अगर आप इस में सही दिमाग लगाएं तो आप बहुत आगे निकल सकते हैं, कर सकते हैं.

क्या आप बचपन की कुछ यादें शेयर करना चाहेंगी?

मेरे मातापिता दोनों वैज्ञानिक थे. जब मैं 3 साल की हुई तो वे मुझे न्यूयौर्क से इंडिया ले आए. फिर वे जेएनयू में काम करने लगे. मेरा बचपन जेएनयू के परिसर में ही गुजरा जो बहुत सुंदर, शांत और शिक्षा के वातावरण से भरा पड़ा था. मेरे पिता मुझे ऐसे कार्यक्रमों में ले जाते थे, जहां नोबल विजेता, वैज्ञानिक, बुद्धिजीवी लोगों का मिलना होता था. मुझे फिल्में भी पसंद थीं तो हम अमिताभ बच्चन की फिल्मे देखने जाते थे.