Money making ideas :  कविता अपनी विषम परिस्थितियों के चलते पढ़ाई पूरी नहीं कर पाई, जिस वजह से उसे किसी कंपनी में अच्छी नौकरी मिलना बहुत मुश्किल हो गया था. मगर एक दिन उस ने कुछ ऐसे विकल्पों की तलाश की जहां उस की कम या अधूरी पढ़ाई उस के भविष्य के रास्ते में न आ सके. कविता ने धैर्य बांधा और कुछ महीने का पौटरी और फ्लोरीकल्चर का कोर्स कर खुद का छोटा काम शुरू किया. धीरेधीरे अपनी मेहनत और हुनर से आज कविता के बनाए आर्ट पीस और फ्लौवर की छोटी ही सही लेकिन अच्छी शौप है, जहां बहुत से ग्राहक अपने खास दिनों में जैसे जन्मदिन, ऐनिवर्सरी, फंक्शन आदि पर अपने घर को सजाने के लिए, अपने प्रियजनों को भेंट करने के लिए आर्ट पीस और फ्लौवर खरीदते हैं.

भारत में कई ऐसे कोर्सेज और व्यवसाय हैं जिन्हें अकसर अनुचित रूप से निम्न स्तर का माना जाता है और इस वजह से न तो ये इतने प्रचलित हैं और न ही इन का कोई जिक्र होता है. फिर भी इन कोर्स और व्यवसायों में अच्छी आमदनी हो जाती है. ये काम तो ऐसे हैं जिन्हें कम पढ़ेलिखे लोग भी आसानी से कर सकते हैं.

कुछ ऐसे छोटे कोर्सेज हैं जिन्हें कर आमदनी का स्रोत्र बना सकते हैं. जैसे:

रीसाइक्लिंग ऐंड वेस्ट मैनेजमैंट: आज पूरी दुनिया इको फ्रैंडली होने की बात कर रही है और इस इको फ्रैंडली प्रोडक्ट्स और रीसाइक्लिंग प्रोडक्ट्स की अच्छीखासी मांग है यानी इस क्षेत्र में कैरियर बनाने और काम करने के अच्छे स्कोप हैं. आज बहुत से इंस्टिट्यूट औफलाइन और औनलाइन रीसाइक्लिंग और वेस्ट मैनेजमैंट के सर्टिफिकेट से डिप्लोमा तक के कोर्स कराते हैं, जैसे इग्नू, आईआईटी, आईआईएसडीटी, जिन्हें कर स्टूडैंट किसी रीसाइक्लिंग या वेस्ट मैनेजमैंट इंडस्ट्री में काम पा सकते हैं या खुद का काम भी कर सकते हैं. आज बहुत लोग रीसाइक्लिंग का स्टार्टअप शुरू कर अच्छा काम कर रहे हैं.

क्लीनिंग ऐंड हाउसकीपिंग: घर, होटल या इंडस्ट्री हर जगह क्लीनिंग ऐंड हाउस कीपिंग सर्विसेज की जरूरत होती है. बड़े स्तर पर इसे एक बहुत ही छोटा काम माना जाता है. अकसर यही देखा जाता है कि अनपढ़ लोग इस काम को करते हैं क्योंकि इसे करने के लिए किसी भी पढ़ाई की जरूरत नहीं. लेकिन आप को पता होना चाहिए कि इन कामों का भी कोर्स और डिप्लोमा होता है. जी हां कोर्स और डिप्लोमा, जो डीपीएमआई, आईआईएसडीटी, स्किल इंडिया डिजिटल हब जैसी संस्थाएं कराती हैं, जहां आप को आम साफसफाई से कहीं ज्यादा जानने और सम झने को मिलता है. आप को बहुत सी टैक्निकल स्किल्स, बातें, कैमिकल्स की नौलेज, उन का सही यूज आदि सीखने को मिलता है. अगर कोई इस कोर्स को करे तो वह खुद का क्लीनिंग या हाउस कीपिंग सर्विसेस का काम शुरू कर सकता है.

आज बहुत से लोग जिन्हें इन का नौलेज है वे डिजिटल प्लेटफौर्म से जुड़ कर होटल्स, इंडस्ट्रीज, यहां तक कि घरों में भी सर्विसेज दे रहे हैं. यहां उन्हें इन डिजिटल प्लेटफौर्म पर कुछ कमीशन दे कर अपना काम करना होता है. लेकिन यदि वे कोशिश करें तो बिना किसी की भागीदारी या कमीशन दिए अपना खुद का डिजिटल ऐप या प्लेटफौर्म बना कर अपना बिजनैस खड़ा कर सकते हैं.

लौंड्री और ड्राई क्लीनिंग: यह काम देखने में बहुत आम है, जिसे देख लगता है कोई भी लौंड्री और ड्राई क्लीनिंग की दुकान खोल सकता है. मगर यह भी एक सीखनेसम झने का कार्य है. बहुत से इंस्टिट्यूट जैसे आईआईडी, जीआईएलएम, आईआईएसडीटी आदि इस का कोर्स कराते हैं, जहां हर फैब्रिक का नौलेज मिलता है, किस फैब्रिक के साथ कौन सा कैमिकल, कौन सा क्लीनिंग प्रोसैस यूज करने के साथ उस के रखरखाव की जानकारी दी जाती है. इन कोर्स के जरीए आप अपना काम शुरू कर सकते हैं, साथ ही इस काम का सर्टिफिकेट आप की शाखा मजबूत करने और ग्राहकों का विश्वास प्राप्त करने में मदद करता है.

टेलरिंग: टेलरिंग या सिलाई इसे सीखने के लिए तो किसी पढ़ाई की आवश्यकता ही नहीं. कोई भी इसे आसानी से सीख सकता है और अपना काम शुरू कर सकता है, साथ ही ऐसा भी नहीं कि पढ़ाई या कोई सर्टिफाइड कोर्स नहीं होता.

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टेलरिंग और ऐंब्रौयडरी में भी सर्टिफाइड कोर्स और डिप्लोमा होता है. आज बहुत से प्राइवेट और सरकारी इंस्टिट्यूट जैसे एनसीटीए, वाईएमसीए, आईएफटी, आईआईएसडीटी, समर्थ स्कीम इस का कोर्स प्रदान करते हैं, जिस में आम सिलाई से ऊपर की डिजाइनिंग और स्टाइल सिखाया जाता है. यहां से पढ़ाई किए किसी भी स्टूडैंट के पास एक प्रोफैशनल सर्टिफिकेशन रहता है, जिस से उसे किसी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में काम करने में मदद मिलती है या वह चाहे तो अपना खुद का काम, अपना बुटीक शुरू कर सकता है. सर्टिफिकेशन ग्राहकों को उस के काम के प्रति आकर्षित करने में मदद करता है.

फ्लोरी कल्चर: यह काम देखने में भले आम हो लेकिन इस की पढ़ाई एक शौर्ट टर्म कोर्स से डिगरी तक है. फ्लोरी कल्चर में बहुत स्कोप हैं. लोग इसे छोटे पैमाने से ले कर बड़े रिसर्च तक काम करते हैं और इसे सीखने, पढ़ने के लिए आप के पास बहुत से औप्शन हैं जो आप की क्षमता या अंकों के अनुसार हैं. यदि कम अंक हैं तो आप शौर्ट टर्म या सर्टिफिकेट का कोर्स कर अपना काम जैसे नर्सरी, फ्लौवर शौप आदि शुरू कर सकते हैं और यदि अधिक अंक हों और पढ़नेसीखने की चाह भी अधिक हो तो ग्रैजुएशन या मास्टर भी करते हैं और फिर इस फील्ड में रिसर्च या प्रैक्टिस भी. आज यह कोर्स छोटे से बड़े इंस्टिट्यूट में औफलाइनऔनलाइन रूप में आईआईडी, आईआईएसडीटी आदि संस्थानों में उपलब्ध है.

पौटर: आज हर किसी को पौटरी के यूनीक आर्ट पीस का शौक है और इन आर्ट पीसेज से वे अपना घर, औफिस, शौप आदि को बहुत चाव से सजाते हैं.पौटरी आर्ट को सीखने के लिए अधिक ग्रेड या बड़ी पढ़ाई की जरूरत नही होती. इसलिए इसे आम स्टूडैंट भी सीख सकता है. पौटरी के छोटे कोर्स डेली क्लास, वीकैंड क्लास, रैजीडैंसी कोर्स के रूप में भी उपलब्ध हैं.

कैंडल ऐंड धूप मेकिंग: कैंडल मेकिंग बहुत पुराना काम है लेकिन आज कैंडल मेकिंग में कई बदलाव हैं. आज कई तरह की कैंडल मार्केट में उपलब्ध हैं जैसे अरोमा थेरैपी कैंडल, सैंटेड कैंडल, फ्लोटिंग कैंडल आदि. ठीक इसी तरह आज नैचुरल प्रोडक्ट्स के बजाय धूपअगरबत्ती का भी बहुत चलन है, जिस की मांग बहुत है. इस तरह के कैंडल ऐंड धूप मेकिंग के छोटेछोटे औनलाइन और औफलाइन कोर्स खादी ऐंड विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन, सीएसडीओ आदि में उपलब्ध हैं. आप इन कोर्स को कर अपना खुद का कैंडल और धूप मेकिंग का काम शुरू कर सकते हैं.

ये सारे कोर्स ऐसे हैं जिन्हें सीखने के लिए न तो अधिक ग्रेड की आवश्यकता है और न ही अधिक फीस की, साथ ही इन्हें शुरू करने के लिए बड़ी लागत की आवश्यकता नही होती. कम लागत, उच्च मांग और उच्च लाभ मार्जिन के कारण यह काम या व्यवसाय अत्यधिक लाभदायक है.