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हंसमुख  विनम्र और स्पष्टभाषी विजी वेंकटैश ‘द मैक्स फाउंडेशन’ भारत और दक्षिण एशिया की पूर्व क्षेत्रीय प्रमुख हैं. उन्होंने 25 वर्षों से अधिक कैंसर रोगी सहायता और वकालत का अनुभव प्राप्त किया है. उन्होंने ही ‘फ्रैंड्स औफ मैक्स’ की स्थापना की और ‘चाय फौर कैंसर’ पहल के माध्यम से रोगियों के लिए धन जुटाने व जागरूकता फैलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने इस क्षेत्र में काम मिल वर्कर्स से शुरू किया था क्योंकि मिल में काम करने वाले अधिकतर गुटका खाते हैं, जिस से उन्हे माउथ कैंसर बहुत अधिक होता है.

उन के हिसाब से कैंसर आज भी एक स्टिग्मा है, इस से रोगी बीमारी से अधिक डर से अपनी जान गवा देते हैं. ऐसे में विजी वेंकटैश की जागरूकता अभियान ने लोगों को फिर से नई जिंदगी जीने का एहसास कराया है. विजी ने इस क्षेत्र में 25 से अधिक वर्ष बिताए हैं.

भले ही विजी डाक्टर नहीं हैं लेकिन 35 साल की उम्र से उन्होंने इस क्षेत्र में काम शुरू किया था. कैंसर रोगियों की सहायता और दवाइयों तक उन की पहुंच बनाने के क्षेत्र में उन के इतने वर्र्षों के कार्य का अनुभव उन्हें कैंसर देखभाल विशेषज्ञ और ‘पेशैंट ऐडवोकेट’ के रूप में पौपुलर हैं.

इस के अलावा विजी वेंकटैश ने 71 वर्ष की आयु में मलयालम फिल्म ‘पाचुवुम अल्बुथाविलक्कम’ के साथ अभिनय की शुरुआत की और आज भी फिल्मों में अभिनय कर रही है. उन्होंने अपनी इस लंबी जर्नी के बारे में गृहशोभा से खास बात की. पेश हैं, कुछ खास अंश:

शिक्षा की जर्नी के बारे में बताएं? उम्र के उस पड़ाव में आप की सोच क्या थी?

मैं एक ट्रेडिशनल साउथ इंडियन परिवार से हूं जो न और्थोडौक्स है और न ही कंजर्वेटिव, लेकिन अपनी संस्कृति से जुड़ा हुआ है. इसलिए मेरे पेरैंट्स ने सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, फाइन आर्ट्स, संगीत और डांस सभी से मुझे परिचित करवाया. आज मैं करीब 75 वर्ष की हो चुकी हूं, लेकिन मेरी कम उम्र में न्यूज रीडर या फिर एअर होस्टेस बनने की इच्छा थी क्योंकि वे सुंदरसुंदर साडि़यां पहनती हैं और मुझे आज भी साडि़यों का काफी शौक है. एक बार मैं ने डाक्टर बनने का भी सपना देखा था, लेकिन उस दिशा में मैं ने आगे की पढ़ाई नहीं की. मैं ने कभी सोचा नहीं था कि मैं ला या मैडिसिन की पढ़ाई करूंगी, जिसे आज मैं प्रोफैशन के तौर पर फौलो कर रही हूं.

शिक्षा में डिगरी को चुनते वक्त किस बात की ओर खास ध्यान दिया?

मैं ने इंग्लिश लिटरेचर में पढ़ाई की है. वह मेरे लिए सही और सम्मानजनक चुनाव रहा क्योंकि मैं इस से ही इतना आगे बढ़ पाई हूं. लेकिन मैं इस विषय से आईएएस की परीक्षा पास कर पिता की तरह ब्यूरोक्रेट भी बन सकती थी लेकिन उस की जरूरत मुझे नहीं पड़ी.

इस पढ़ाई ने आप को आगे बढ़ने में कैसे मदद की?

इंग्लिश की पढ़ाई से मुझ में किसी से बात करने या लिखने की क्षमता बहुत अधिक विकसित हुई है, जिस से मुझे किसी भी क्षेत्र में काम करना आसान हुआ.

शिक्षा की किस बात ने आप को कैरियर में आगे बढ़ने में सब से अधिक सहायता की है?

हर तरह के कम्युनिकेशन में मुझे हमेशा कौन्फिडैंस का मिलना जो मेरे लिए बहुत जरूरी था. तकनीक, एआई और वर्क कल्चर में लगातार बदलाव हो रहे हैं. ऐसे में यूथ का किस तरह से आगे बढ़ना जरूरी होगा?

लर्निंग को कभी न छोड़ें, उम्र के इस पड़ाव में भी मैं हर नई चीज को सीखने में विश्वास रखती हूं और उसे अपने जीवन में वर्क ऐथिक्स और स्टाइल के साथ उतारती हूं, किसी भी बदलाव की चुनौती को स्वीकार करना आसान नहीं होता लेकिन जब एक बार आप ने उसे अपना लिया है तो कोई भी आप को रोक नहीं सकता, फिर चाहे वह यंग हो या ओल्ड कोई फर्क नहीं पड़ता.

काम के क्षेत्र में खुद को खुश रखने की शक्ति आप के पास होती है और आप जो भी काम करते हैं, उस से आप को प्यार होना चाहिए और यह प्यार समझदारी और स्वीकारोक्ति से आता है, भगवान भरोसे नहीं.