visual arts students : एसकेवी आदर्श नगर, दिल्ली सरकार में ड्राइंग और विजुअल आर्ट्स की टीचर ज्योति शहराजा कहती हैं, ‘‘सब से पहले मैं हर विद्यार्थी से यही कहती हूं कि किसी दूसरे को देख कर कैरियर न चुनिए. अपनी रुचि और अपनी ताकत को पहचानिए. अगर आप को पेंटिंग बनाना, स्कैचिंग करना, मूर्तिकला, क्रिएटिव आर्ट या अपनी भावनाओं को कला के माध्यम से व्यक्त करना पसंद है तो फाइन आर्ट्स (बीएफए) आप के लिए अच्छा विकल्प है. लेकिन अगर आप को पोस्टर बनाना, लोगो डिजाइन करना, पैकेजिंग, विज्ञापन, सोशल मीडिया पोस्ट, डिजिटल डिजाइन या ब्रैंडिंग में रुचि है तो कमर्शियल आर्ट्स आप के लिए बेहतर रहेगा. आज के समय में दोनों क्षेत्रों में बहुत अच्छे अवसर हैं. मेरे कई विद्यार्थी आज ग्राफिक डिजाइनर, आर्ट टीचर, फ्रीलांसर और प्रोफैशनल आर्टिस्ट के रूप में सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं.
‘‘ज्योति शहराजा का मानना है अगर आप का सपना सरकारी स्कूल में ड्राइंग टीचर बनने का है तो सब से पहले आप को बैचलर औफ फाइन आर्ट्स (बीएफए) करना चाहिए. यही आप की मुख्य प्रोफैशनल डिगरी होती है जिस में ड्राइंग, पेंटिंग, स्कल्पचर, डिजाइन, आर्ट हिस्ट्री और अन्य कला विषयों की गहराई से पढ़ाई होती है. इस के बाद बीएड (बैचलर औफ ऐजुकेशन) करना बहुत जरूरी है क्योंकि केवल अच्छा कलाकार होना ही काफी नहीं है. एक अच्छा टीचर बनने के लिए यह भी सीखना पड़ता है कि बच्चों को कैसे पढ़ाया जाए, उन की सीखने की अलगअलग क्षमता को कैसे सम?ा जाए और क्लास को प्रभावी तरीके से कैसे संभाला जाए.’’
आज के समय में कौन सी स्किल सीखने से जल्दी जौब मिल सकती र्है?
ज्योति शहराजा कहती हैं, आज का समय केवल डिगरी का नहीं बल्कि स्किल का है. अगर आप के पास अच्छी स्किल है तो आप पढ़ाई के साथसाथ भी कमाई शुरू कर सकते हैं. अगर मु?ो एक स्किल चुननी हो तो मैं कमर्शियल आर्ट को सब से आगे रखूंगी क्योंकि आज हर कंपनी, स्कूल, बिजनैस और सोशल मीडिया प्लेटफौर्म को पोस्टर, लोगो, बैनर, पैकेजिंग, सोशल मीडिया डिजाइन और विज्ञापन की जरूरत होती है. इसलिए इस क्षेत्र में नौकरी और फ्रीलांस दोनों के अच्छे अवसर हैं.
इस के बाद कैलिग्राफी भी बहुत अच्छी स्किल है. आज लोग शादी के कार्ड, गिफ्ट आइटम, नेम प्लेट, सर्टिफिकेट, होम डैकोर और पर्सनलाइज्ड गिफ्ट्स पर सुंदर लिखावट पसंद करते हैं. अगर आप की हैंडराइटिंग और डिजाइन अच्छी है तो आप घर से भी काम कर सकते हैं.
आर्ट में कैरियर के क्याक्या औप्शस हैं?
एक लंबी यात्रा है. पहले यह तय करना चाहिए कि रुचि किस क्षेत्र में है—फाइन आर्ट, कमर्शियल आर्ट, ग्राफिक डिजाइन, ऐनिमेशन, इंटीरियर डिजाइन, फैशन डिजाइनिंग या टीचिंग. जब दिशा साफ होती है तो आगे की तैयारी आसान हो जाती है.
इस के बाद बेसिक स्किल्स पर काम
करना बहुत जरूरी है जैसे स्कैचिंग, औब्जर्वेशन, शेडिंग, कलर सम?ा, कंपोजिशन, क्रिएटिव थिंकिंग. इन सब की मजबूत नींव कैरियर में बहुत मदद करती है.
अपना पोर्टफोलियो धीरेधीरे बनाना शुरू करें. इस में आप के सब से अच्छे और अलगअलग तरह के काम होने चाहिए. फिर प्रतियोगिताओं, वर्कशौप्स और ऐग्जिबिशन में भाग लें. इस से आत्मविश्वास बढ़ता है और नए अवसर भी मिलते हैं. आर्ट में कैरियर रातोंरात नहीं बनता. इस में समय, अभ्यास और लगातार सीखना बहुत जरूरी है.
औनलाइन आर्ट क्लास और सोशल मीडिया पर क्या कहेंगी?
‘‘अगर आप को पढ़ाना पसंद है तो आप औनलाइन आर्ट क्लासें शुरू कर सकते हैं. इस के साथसाथ अपने आर्टवर्क के वीडियो और तसवीरें सोशल मीडिया पर शेयर करें. इस से आप की पहचान बनेगी और धीरेधीरे आप को और्डर और नए विद्यार्थी मिलने लगेंगे.
‘‘कमाई की शुरुआत छोटी हो सकती है लेकिन मेहनत और ईमानदारी से वही काम आगे चल कर बड़ा व्यवसाय भी बन सकता है. आज सोशल मीडिया एक बहुत बड़ा मंच है. अगर सही तरीके से इस का उपयोग किया जाए तो एक छोटा कलाकार भी लाखों लोगों तक अपनी कला पहुंचा सकता है. अपने काम की अच्छी क्वालिटी के फोटो और वीडियो बनाएं. जब लोग आप का काम साफ और सुंदर तरीके से देखेंगे तभी वे प्रभावित होंगे. दूसरी बात नियमित रूप से अपना काम शेयर करें. केवल 1-2 पोस्ट डाल कर रुक मत जाइए. लगातार काम दिखाने से लोग आप को पहचानने लगते हैं. अपनी कला के पीछे की कहानी भी बताइए. लोगों को यह जानना अच्छा लगता है कि आप ने वह पेंटिंग क्यों बनाई, उस में क्या संदेश है या उसे बनाने में कितनी मेहनत लगी.’’
कुछ पेरैंट्स मानते हैं कि आर्ट में स्कोप नहीं है, ऐसे में क्या करना चाहिए?
‘‘अगर अकसर पेरैंट्स कहते हैं कि आर्ट में स्कोप नहीं हैं ऐसे युवाओं और उन के मातापिता को हताश नहीं होना चाहिए. आज का समय बदल चुका है. पहले लोग आर्ट को केवल पेंटिंग तक सीमित सम?ाते थे लेकिन आज आर्ट का क्षेत्र बहुत बड़ा हो गया है. आज एक कलाकार आर्ट टीचर, ग्राफिक डिजाइनर, इलस्ट्रेटर, ऐनिमेटर, फैशन डिजाइनर, इंटीरियर डिजाइनर, फोटोग्राफर, विजुअलाइजर, डिजिटल कंटैंट क्रिएटर, आर्ट थेरैपिस्ट और कई अन्य क्षेत्रों में अपना कैरियर बना सकता है.
‘‘जोनल और स्टेट लैवल पर जज के रूप में काम करते हुए ज्योति शहराजा के अनुसार उन्हें हजारों बच्चों की पेंटिंग देखने का अवसर मिला. हर पेंटिंग अपने आप में अलग होती है लेकिन एक विनिंग आर्टवर्क में कुछ विशेष बातें जरूर होती हैं. सब से पहली बात है मौलिकता. जज हमेशा यह देखते हैं कि बच्चे ने अपनी सोच दिखाई है या सिर्फ किसी तसवीर की नकल की है. अपनी कल्पना से बनाया गया चित्र हमेशा अधिक प्रभाव छोड़ता है.
‘‘दूसरी बात है विषय की सम?ा. अगर प्रतियोगिता का विषय ‘पर्यावरण संरक्षण’ है तो केवल पेड़ बनाना ही पर्याप्त नहीं है. पेंटिंग में यह संदेश भी साफ दिखाई देना चाहिए कि कलाकार क्या कहना चाहता है. तीसरी बात है रंगों का संतुलन, कंपोजिशन और साफसुथरी प्रस्तुति. बहुत ज्यादा रंग भर देने से पेंटिंग अच्छी नहीं बनती. सही जगह पर सही रंग और संतुलित रचना ही चित्र को आकर्षक बनाती है.
‘‘एक उदाहरण देखें. एक बार प्रतियोगिता में कई बच्चों ने ‘स्वच्छ भारत’ विषय पर पेंटिंग बनाई. अधिकांश बच्चों ने सड़क और ?ाड़ू का चित्र बनाया. लेकिन एक बच्चे ने एक छोटी बच्ची को अपने दादाजी को कूड़ेदान का उपयोग करना सिखाते हुए दिखाया. उस की पेंटिंग का संदेश बहुत प्रभावशाली था. उसी मौलिक सोच ने उसे विजेता बनाया.
‘‘एआई एक टूल है कलाकार का विकल्प नहीं. आज तकनीक बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है और हमें उस से डरने की नहीं बल्कि उसे सम?ाने और सही तरीके से इस्तेमाल करने की जरूरत है. ट्रेडिशनल आर्ट हमें ड्राइंग, औब्जर्वेशन, रंगों की सम?ा, धैर्य और रचनात्मक सोच सिखाती है. यही मजबूत नींव एक अच्छे कलाकार की पहचान होती है. अगर यह आधार मजबूत है तो नई तकनीक सीखना और भी आसान हो जाता है.’’

