Animation career guidance : ऐनीमेशन इंडस्ट्री की जानी मानी फिल्म मेकर और सीडीएलटीवी की फाउंडर चारुवी अग्रवाल बचपन से ही अपना नाम कला क्षेत्र के ऊंचे शिखरों पर लिखती आ रही है. क्लास 6 में उन्होंने कथक और पेंटिंग के क्षेत्र में भारत को रशिया में एक बड़े मंच पर प्रस्तुत किया. फिर उन्होंने क्ले से एक स्कल्पचर सीरीज बनाई जो ‘लिम्का बुक रिकौर्ड’ में शामिल हुआ. आज लीजेंड औफ हनुमान जिस की दुनियाभर में वाहवाही है, वह भी चारुवी की कला का एक सुंदर प्रदर्शन है.
आज गृहशोभा चारुवी के इंटरव्यू के माध्यम से ऐनीमेशन और आर्ट से जुड़े स्टूडैंट्स के लिए कुछ एडवाइस ले कर आई है ताकि वे अपना एक सुंदर भविष्य बना सकें:
क्या आप अपने बचपन की कुछ छवियां साझा करना चाहेंगी?
मेरे पिता सिविल ऐविएशन में थे तो उन का ट्रांसफर होता रहता था, जिस वजह से हम ने बहुत से शहरों में रह कर वहां का कल्चरल सीखा. कम सैलरी में मेरे पेरैंट्स ने मुझे बहुत ऐक्सपोजर दिया. हमारी फैमिली कला और कल्चरल से पूर्ण थी. बचपन से ही मुझे कथक, गायन, पेंटिंग आदि कला से भरा वातावरण मिला, जिस ने मेरे अंदर एक कलाकार की नींव रखी. मुझे याद है मेरे घर में कैनवस हुआ करता था जिस पर एक दिन पापा रंग करते थे फिर अगले दिन मां और यह क्रिया रोज ऐसे ही चलती थी और दोनों उस पेंटिंग को एक अनूठे ढंग से पूरा करते थे.
ऐनीमेशन में बहुत विकल्प हैं तो एक स्टूडैंट कैसे अपने लिए एक सही प्रोग्राम चुने?
पहले तो फौलो योर गट. आज ऐनीमेशन इंडस्ट्री में बहुत से औप्शन है जैसे स्कैचिंग, मोशन ग्राफिक्स, गेम डिजाइन, प्री प्रोडक्शन आदि तो खुद से पूछो कि मुझे क्या ज्यादा पसंद है, मैं इन में से क्या अच्छा कर सकता हूं. ऐनीमेशन की पूरी पाइपलाइन देखो, समझ और फिर डिसीजन लो. मुझे याद है मेरे समय इतने विकल्प नहीं थे. जब मैं ने ग्रैजुएशन में एडमिशन लेना चाहा तो थोड़ी मुश्किल हुई थी. लेकिन मैं ने पेंटिंग का चयन किया और ग्रैजुएशन के पूरे 4 साल मैं ने गोल्ड मैडल जीता, साथ ही मास्टर के लिए शेरिडन जाना था तो पैसे कम थे. उस वक्त मैं ने एक साल का ब्रेक लिया. पेंटिंग पर फोकस किया. मेरी पेंटिंग दिल्ली की आर्ट गैलरी मेंसोल्डआउट हुई और शेरिडन की 50% फीस कवर हुई और आधे मेरे पिता ने दिए. तो मैं यही कहूंगी कि आप भी खुद पर भरोसा रखो और कोशिश करते रहो.
दूसरा कि स्वयं के लिए क्रिटिकल थिंकिंग रखो. अपना काम दूसरों के पास ले जाओ, उन की राय जानो. अपनी गलती देखो और सुधारों. पता करो कि आप किस स्पैशलाइजेशन में बेहतर हो. आज हमारे पास ऐसे बहुत से स्टूडैंट्स के पोर्टफोलियो आते हैं, जिन्हें देख लगता है कि उन्होंने गलत स्पैशलाइजेशन चुना है.
साथ ही जब एक स्टूडैंट किसी भी ऐनीमेशन आर्ट कालेज में अप्लाई करे तो उस के पोर्टफोलियो की सब से इंपौर्टैंट चीज आर्ट ही है. एक स्टूडैंट के अंदर कला अंदर से होनी चाहिए.
स्टूडैंट्स अच्छे कालेज का चयन कैसे करें?
पहले तो स्टूडैंट्स उस कालेज की ओर बढ़े जहां एडमिशन उस के पोर्टफोलियो को देख कर मिले न कि बड़े नाम वाले, बड़ी डोनेशन वसूल कर एडमिशन देने वाले कालेज की ओर क्योंकि जब एडमिशन ही पैसे के आधार पर होगा तो एडमिशन तो उन को भी मिलेगा जिन में कोई कला या हुनर नहीं और कालेज में स्टूडैंट्स एकदूसरे को देख कर, साथ रह कर सीखतेपढ़ते हैं. तो जब क्लासमेट में कोई कला होगी नहीं तो आप एकदूसरे से क्या सीखोगे, साथ ही आप ट्रैडिशनल पोर्टफोलियो अपनाएं.
दूसरा कालेज के पासआउट स्टूडैंट्स से मिलें. उन की कालेज जर्नी, ऐक्सपीरियंस, उन का कैरियर देखें और जानें.
तीसरा वहां की फैकल्टी देखें. देखें कि टीचर्स, ऐक्सपर्ट्स कैसे हैं?
कालेज में आर्ट स्टूडैंट्स को कैसे चैलेंज देखने को मिल सकते हैं?
मुझे याद है जब मैं कालेज में थी तो हम स्टूडैंट्स को आउटडोर लाइव पेंटिंग का प्रोजैक्ट मिलता था. पहले तो आप को कालेज में ही पार्क या गार्डन में हर मौसम चाहे धूप हो या बारिश, आप को लाइव पेंटिंग करनी होती है. फिर आप को पब्लिक प्लेस भेजा जाता है. वहां आप को लोगों के बीच रह कर पेंट करना होता है. चाहे लोग आप पर कमैंट्स कर रहे हों, आप को देख रहे हों, शोर हो, कोई टकरा जाए या कोई साथ ही खड़ा हो जाए, आप को अपना फोकस नहीं खोना होता और सिर्फ अपना काम पूरा करना होता है. यह चैलेंज एक स्टूडैंट के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यह एक कलाकार की लोगों के बीच रह कर पेंट करने की हिचकिचाहट, शर्म को दूर करता है.
मैं यह भी एडवाइस करूंगी कि एक स्टूडैंट को अपने काम से अटैच्ड नहीं होना चाहिए. आर्टिस्ट, फिल्ममेकर अपने काम से बहुत अटैच्ड होते हैं और फिर अपने काम पर कोई क्रिटिक नहीं ले पाते. इसलिए क्रिटिक को अपनाना सीखें ताकि आप आगे सुधार करते रहें.
क्या एक कालेज का मीडिया हब के पास होना स्टूडैंट कैरियर के लिए अच्छा साबित होता है?
मीडिया हब के पास होने का कुछ फायदा तो है लेकिन मैं ने बहुत से कालेज देखे हैं जो इंडस्ट्री के नजदीक होते हुए भी परफौर्मैंस में अच्छे नहीं. इसलिए अगर कोई कालेज रिमोट लोकेशन में है लेकिन वहां की परफौर्मैंस अच्छी है, इंडस्ट्री से उन के टाईअप अच्छे हैं, इंडस्ट्री ऐक्सपर्ट वहां आते हैं सिखाने के लिए, आप का काम देखने के लिए तो वह कालेज अच्छा है. जैसे मैं ने शेरिडन से पढ़ाई की जो रिमोट लोकेशन में था शहर से बहुत दूर. लेकिन इंडस्ट्री ऐक्सपर्ट वहां आते रहते हैं जिस से स्टूडैंट्स को अच्छा ऐक्सपोजर मिलता है.
क्या ऐनीमेशन स्टूडैंट्स के कैरियर के लिए एआई एक खतरा है?
एआई का एक खतरे के रूप में नहीं बल्कि एक टूल के रूप में देखें. आज बहुत से ऐनीमेशन स्टूडियो इस पर काम कर रहे हैं. एआई अब इंडस्ट्री का हिस्सा बन चुका है इसलिए इस पर काम करना सीखो न कि डरो कि यह आप का कैरियर ले जाएगा. इस पर काम करो लेकिन डिपैंड मत रहो क्योंकि यह एक टूल है और टूल समय के साथ बदलते रहते हैं.
ऐनीमेशन का इंडियन मार्केट में क्या स्कोप रहेगा?
ऐनीमेशन में इंडिया पहले एक आउटसोर्स मार्केट थी. हम बाहर से सारा काम लेते थे. उस काम का ब्रेन तो बाहरी देश में रहता था और सैकंडरी बौडी हमारे पास आती थी. लेकिन अब इंडिया में बहुत बदलाव हुआ है. अब हम अपनी इंडस्ट्री बना रहे हैं. देश में ही ऐनीमेशन का काम फैल रहा है. आज गवर्नमैंट सैक्टर, फिल्म, ओटीटी, सोशल प्लेटफौर्म हर जगह ऐनीमेशन देखा जा रहा है. यह सारा कंटैंट यहीं बन रहा है.
क्विक इंट्रो
जन्मस्थान : दिल्ली.
स्कूल : केंद्रीय विद्यालय, रयान इंटरनेशनल
दिल्ली.
ऐजुकेशन : ग्रेजुएशन- कालेज ओफ आर्ट्स
दिल्ली, मास्टर-शेरिडन कालेज कनाडा
प्रोफैशन : ऐनिमेटर ऐंड फिल्ममेकर.
कैरियर टिप्स
ऐसे कालेज का चुनाव करें जहां पोर्टफोलियो के आधार पर दाखिला मिलता है.
एआई को खतरे के रूप में नहीं एक टूल के तौर पर देखें.
ऐनिमेशन इंडस्ट्री में स्कैचिंग, मोशन ग्राफिक्स, गेम डिजाइन और प्री प्रोडक्शन जैसे कैरियर के कई विकल्प हैं.

