Career in media industry : 35  वर्षों के अपने शानदार कैरियर में एक पेशेवर प्रसारक के रूप में काम करने वाली विजयलक्ष्मी छाबड़ा से अनेक मुद्दों पर बातचीत हुई.

पेश है उन बातचीत के कुछ खास अंश:

स्कूलकालेज के समय आप अपने भविष्य को किस रूप में देखती थीं? क्या तब मीडिया में आने की सोची थी?

मेरे सपने बचपन से मीडिया क्षेत्र में जाने के थे लेकिन मेरे मातापिता की सोच अलग थी. मेरे पिता भिलाई स्टील प्लांट के शुरुआती इंजीनियरों में थे और पढ़ाई में गोल्ड मैडलिस्ट रहे थे. वे चाहते थे कि मैं सिविल सर्विसेज में जाऊं मेरी मां बहुत अधिक शिक्षित नहीं थीं लेकिन बेहद समझदार थीं और मानती थीं कि खासकर लड़कियों को पढ़लिख कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहिए.

हमारे घर में अखबार और रेडियो का विशेष महत्त्व था. बचपन से हमें पूरा अखबार पढ़ने और समाचार सुनने की आदत डाली गई ताकि हम करंट अफेयर्स और सामान्य ज्ञान से जुड़े रहें. मेरी मातृभाषा उडि़या थी लेकिन पिता चाहते थे कि हम हिंदी और इंग्लिश दोनों में निपुण हों.

मैं रेडियो पर समाचार, नाटक, डौक्यूमैंट्री और चर्चाएं बड़े मन से सुनती थी. आकाशवाणी के उद्घोषकों की आवाज और बोलने का अंदाज मुझे बहुत आकर्षित करता था. तभी से अच्छा बोलना मेरा जनून बन गया. स्कूल में वादविवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेती थी और मन में यही रहता था कि प्रभावशाली ढंग से बोल सकूं.

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हालांकि उस समय मेरे परिवार को यह अंदाजा नहीं था कि रेडियो भी एक पेशा हो सकता है. पिता चाहते थे कि मैं आईएएस अधिकारी बनूं इसलिए उन्होंने मुझे उसी दिशा में पढ़ाई के लिए प्रेरित किया. दिल्ली भी मैं इसी सपने के साथ आई थी कि सिविल सर्विसेज में जाना है.

आल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन में शुरुआत कैसी रही?

चूंकि मैं ने कालेज पढ़ाई के साथ ही साप्ताहिक कार्यक्रम करना शुरू कर दिया था लेकिन मु?ो शुरू से स्पष्ट था कि सिर्फ प्रैजेंटर नहीं बनना बल्कि उस स्तर तक पहुंचना है जहां निर्णय लेने की शक्ति हो, दूरदर्शन और आकाशवाणी में काम करते हुए मैं ने देखा कि असली जिम्मेदारी प्रशासनिक पदों पर होती है, तभी तय किया कि उसी कैडर में जाना है.

मुझे पता चला कि यूपीएससी के जरीए प्रोग्राम औफिसर्स की भरती होती है तो मैं ने तैयारी की, इंतजार किया और चयनित हो कर आल इंडिया रेडियो, दिल्ली में नियुक्ति मिली. इस तरह मेरा लक्ष्य पूरा हुआ. इस सफर में संघर्ष भी कम नहीं थे. इंतजार के दौरान मैं ने मदर्स इंटरनैशनल स्कूल में पढ़ाया, फिर आईसीसीआर में काम किया, जहां बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला.

मैं हमेशा छात्रों से कहती हूं जो सपना देखो, वह आसानी से नहीं मिलता. मेहनत, धैर्य और लगातार सीखते रहने की आदत जरूरी है. पढ़ाई कभी व्यर्थ नहीं जाती. जो कुछ सीखते हैं, वह किसी न किसी रूप में जीवनभर काम आता है.

मेरे लिए पौलिटिकल साइंस, इतिहास, हिंदी, इंग्लिश, कला और संस्कृति सब ने कैरियर में मदद की. आज भी रिटायरमैंट के बाद सोशल मीडिया पर हैंडलूम और महिलाओं के आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर लिखते हुए वही सीख काम आ रही है.

आज के समय में मीडिया तेजी से बदल रहा है, खास कर एआई और डिजिटल प्लेटफौर्म्स के कारण. आप इस बदलाव को कैसे देखती हैं? क्या यह अवसर ज्यादा ले कर आया है या चुनौतियां?

हर बदलाव के साथ शुरू में एडजस्ट करने में भले दिक्कतें आती हों लेकिन चुनौतियां नहीं बल्कि अपौच्यूंनिटी ज्यादा पैदा होती हैं. मैं ने मीडिया का लंबा दौर देखा है. मैं ने शुरू किया था जब रेडियो का बड़ा सा सैट घरों में रखा होता था, वहां से हम ट्रांजेस्टर पर आए, फिर टीवी आया, पहले ब्लैक ऐंड व्हाइट फिर रंगीन.

आकाशवाणी दूरदर्शन इतना बड़ा ब्रैड हुआ करता था, लेकिन बीच में एक दौर ऐसा आया कि सैटेलाइट चैनलों ने टीवी पर टेकओवर कर लिया और उन के साथ गर्वनमैंट मीडिया कुछ कारणों से नहीं कंपीट कर पाया. लेकिन देखिए ओटीटी प्लेटफौर्म आने के बाद वह दौर भी खत्म हो गया है. सब अब टीवी के बजाय ओटीटी प्लेटफौर्म को ज्यादा तरजीह देते हैं.

आज के युवा जो मीडिया या ब्रौडकास्टिंग में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं उन्हें कौन सी स्किल्स और गुण या आदतें अपनानी चाहिए. क्या कोई खास माइंडसैट या अप्रोच अपनानी चाहिए.

मीडिया में आने के 2 रास्ते हैं, एक तकनीकी रास्ता जहां आप को कैमरा पर्सन, वीडियो एडिटर जैसे काम करने हैं जिन को सीखने के लिए प्रौपर ट्रेनिंग लेनी पड़ेगी, दूसरा है क्रिएटिव तरीका, जिस में आप खुद से काफी कुछ सीख सकते हैं, लेकिन उस के लिए जरूरी है कि आप का भाषा का ज्ञान अच्छा हो, आप को अच्छा बोलनालिखना आना चाहिए, आप को दुनिया की समझ होनी चाहिए, पड़ोसी देशों में क्या चल रहा है जानकारी होनी चाहिए. एक अच्छा ब्रौडकास्टर होने के लिए जरूरी शर्त है आप का अच्छा पढ़ालिखा होना और पढ़ने का शौकीन होना. आप का खुद को अपडेट रखना जरूरी है.

मीडिया क्षेत्र में हरकोई नहीं जा सकता है. सिर्फ पैसे बनाना आप की सोच है तो आप को किसी और क्षेत्र में जाना चाहिए. इस क्षेत्र में कदम तभी रखें जब आप इस के लिए पैशन रखते हों. वर्तमान में बहुत औपर्च्यूनिटी है इसलिए अगर आप यह करना चाहते हैं तो आप का खुले दिमाग का दुनियाजहान की खबर रखने वाला होना जरूरी है.

अगर आप एक साधारण सा सीरियल बनाना चाहें तब भी आप को अपने आसपास की सब खबर होनी जरूरी है ताकि आप उस में वैल्यू एड कर सकें. मुझे तो अगर एक और जिंदगी मिले तो उस वक्त में जो भी मीडिया का जो माध्यम हो मैं उसे ही चुनना पसंद करूंगी.

क्या आप को लगता है कि आज की ऐजुकेशन सिस्टम में क्रिएटिविटी और प्रैक्टिकल लर्निंग को महत्त्व मिल रहा है?

अपने ऐक्सपीरियंस से बताऊं तो हम लोग संसाधनों के धनी हैं. हम खुली सोच के हैं, हम स्कूली दिनों में देशदुनिया के बारे में इतना पढ़ते हैं तो जब हम इंटरनैशनल स्टेज पर जाते हैं तो वह चमक अलग से दिखती है. हमारे स्कूल सिस्टम में बच्चों के न सिर्फ विकास बल्कि लिखाई पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है कि बच्चे की हैंडराइटिंग अच्छी हो. मेरी बेटी ने जब अपने हाथ से लिखे आर्ट्स पेपर को टोल इंस्ट्यिट औफ आर्ट में भेजा और उसे प्रैजेंट किया तो वहां सब लोग अचंभित थे और वे पूछ भी बैठे कि क्या आप बहुत अच्छे स्कूल से पढ़ी हो कि आप की हैंडराइटिंग और इंग्लिश भाषा का ज्ञान इतना अच्छा है. तब मेरी बेटी ने यही जवाब दिया कि हमारे यहां सब इतनी ही अच्छी इंग्लिश भाषा का इस्तेमाल करते हैं और सबकी हैंडराइटिंग अच्छी होती है.