Media and entertainment careers :  मुंबई शहर के लिए कहा जाता है कि यह शहर कभी किसी को भूखा नहीं रखता. भूखा जगाता जरूर है लेकिन भूखा सुलाता नहीं है. इस के पीछे खास वजह यही है कि अगर यहां पर पढ़ेलिखे डिगरी हासिल किए लोगों के लिए नौकरी है तो यहां ऐसे लोगों के लिए भी नौकरी है जिन के पास कोई डिगरी नहीं है या वे कम पढ़ेलिखे हैं या वे इंग्लिश बोलना नहीं जानते.

ऐसे लोगों के लिए भी मुंबई के ग्लैमर वर्ल्ड में कई नौकरियां उपलब्ध हैं. इस के लिए न तो कोई इन्वैस्टमैंट करना पड़ता है न ही कोई डिगरी की जरूरत होती है. अगर किसी चीज की जरूरत होती है तो वह है मेहनत, काबिलीयत और काम के प्रति ईमानदारी की, साथ ही नौकरी पाने के लिए सही जानकारी होना भी बहुत जरूरी है. जैसेकि इस तरह की नौकरी के लिए कोई सिक्योरिटी डिपौजिट या फीस नहीं होती है लेकिन इसी लाइन में कुछ फ्रौड लोग नौकरी दिलाने के नाम पर पैसा ले कर भाग जाते हैं.

इसलिए सब से पहले तो इस गलतफहमी में न रहें कि नौकरी देने के लिए कोई भी प्रोडक्शन हाउस या फिल्म टीवी की यूनिट से जुड़े लोग किसी भी तरह का पैसा या डिपौजिट लेते हैं.

सच बात तो यह है कि अमीर हो या गरीब रोजगार और पैसा कमाने की जरूरत सभी को होती है. अगर ग्लैमर वर्ल्ड में बड़ी पोस्ट की कई नौकरियां होती हैं तो उसी से जुड़ी बिना डिगरी वाली कम पढ़ेलिखे लोगों के लिए भी कई सारी नौकरियां होती हैं क्योंकि एक फिल्म या टीवी सीरियल के निर्माण में मुख्य कलाकारों के अलावा कई सारे और लोग यूनिट में होते हैं जो हैल्पर के तौर पर होते हैं, फिर चाहे वह मेकअप असिस्टैंट हो, हेयर स्टाइलिस्ट का असिस्टैंट हो या सैट पर काम करने वाले अन्य लोग ही क्यों न हों, एक फिल्म या टीवी सीरियल के निर्माण में कई सारे लोगों का योगदान होता है, वो सब पर्दे के पीछे होते है,

उन का फिल्म में सहयोग देने को लेकर कोई नाम नहीं होता लेकिन इस काम के लिए पैसे अच्छेखासे मिलते हैं. खासतौर पर महिलाओं के लिए ग्लैमर वर्ड में कई अच्छी जौब्स हैं जो बिना डिगरी और कम पढ़ाई के भी पाई जा सकती हैं.

पेश हैं इसी सिलसिले पर एक नजर:

मेकअप आर्टिस्ट असिस्टैंट और हेयर स्टाइलिस्ट हैल्पर

टीवी सीरियल, वैब सीरीज और फिल्मों में शूटिंग के दौरान मुख्य कलाकारों के अलावा भी कई कलाकार ऐसे होते हैं जो फिल्म में छोटेबड़े किरदार निभा रहे होते हैं. इन सभी आर्टिस्ट के लिए सैट पर मेकअप आर्टिस्ट उपलब्ध होते हैं. इन मेकअप आर्टिस्ट को मदद करने के लिए उन के असिस्टैंट और हैल्पर होते हैं जो मेकअप आर्टिस्ट को मेकअप के दौरान हर तरह से मदद करते हैं.

इस काम के लिए उन की जरूरत रहती है जिस के लिए न तो कोई डिगरी चाहिए होती है और न ज्यादा पढ़ाई क्योंकि ये हैल्पर होते हैं इसलिए कई बार इन को प्रतिदिन के हिसाब से अच्छा काम लगने पर मासिक वेतन के हिसाब से अपौइंट किया जाता है. इन की सैलरी काम और समय के हिसाब से तय होती है लेकिन कम से कम प्रतिदिन हजार रुपए और मंथली 15 हजार से 20 हजार के करीब निश्चित होती ही है.

फिल्मी सीरियल का बजट, शूटिंग स्थल और फिल्म में उपस्थित कलाकारों के आधार पर असिस्टैंट या हैल्पर को पैसे दिए जाते हैं. लेकिन एक दिन का कम से कम 1000 तो मिलता ही है.

बैकग्राउंड डांसर: आजकल कई लोग रील के जरीए अपने डांस की प्रतिभा लोगों तक पहुंचाते हैं, जिस की वजह से उन को न सिर्फ मुंबई आने का मौका मिलता है वरन कई डांस रिएलिटी शोज का हिस्सा बन कर नाम और दाम भी कमाते हैं. लेकिन ऐसे कई प्रतिभावान डांसर के लिए ग्लैमर वर्ल्ड में नौकरी के लिए बहुत अच्छा स्कोप है कई फिल्मों में डांस वाले गाने के दौरान कई सारे ऐक्स्ट्रा डांसर जो साथ में डांस करते हुए नजर आते हैं उन की जरूरत फिल्म, टीवी वालों को होती है. ऐसे में जिन  के पास भी डांस की कला है वे मुंबई आ कर ऐक्स्ट्रा डांसर के रूप में नौकरी पा सकते हैं, जिस के लिए वे कम से कम 2000 से 4000 तक प्रतिदिन और मंथली 20 हजार से 25 हजार तक पैसे कमा सकते हैं.

जूनियर आर्टिस्ट: फिल्मों और टीवी में छोटेछोटे किरदारों के लिए आर्टिस्ट्स की जरूरत होती है जिन का काम सीरियल या फिल्म में थोड़ा ही होता है. ऐसे काम के लिए प्रोडक्शन को हमेशा कलाकारों की जरूरत पड़ती है जो सीन के मुताबिक निर्भर करता है. इस में हर उम्र के हर कदकाठी के लोग शामिल होते हैं.

गौरतलब है एक फिल्म में छोटा सा रोल कई बार आगे चल कर बड़ा कलाकार बना देता है जैसे पुरानी अभिनेत्री मुमताज, शाहिद कपूर, जैकी श्रौफ, नवाजुद्दीन सिद्दीकी आदि कई आज के नामचीन कलाकार हैं जिन्होंने शुरुआत में फिल्मों में एकदम छोटा रोल किया है. कई बार तो इन कलाकारों का छोटा सा रोल एडिटिंग में भी कट गया है लेकिन क्योंकि जूनियर आर्टिस्ट के काम के लिए अच्छे पैसे मिलते हैं, इसलिए संघर्ष के दिनों में कई कलाकारों ने जूनियर आर्टिस्ट का काम किया है.

सैट पर रहने वाले हैल्पर: शूटिंग के दौरान हीरो व हीरोइन से ले कर अन्य कलाकारों तक के लिए हेल्पर और हौटस्पौट बौय की जरूरत होती है. पहले लोग ज्यादातर इस काम के लिए लड़कों को ही अपौइंट करते थे लेकिन अब लड़कियां भी इस काम के लिए अग्रसर हैं और मौजूदा दिनों में सैट पर कई लड़कियां कलाकारों का, टैक्नीशियनों का ध्यान रखती नजर आती हैं. इस काम के लिए शिफ्ट के सुविधा के हिसाब से खान और रहने की व्यवस्था भी होती है.

ड्रैसमैन और वार्डरोब असिस्टैंट: शूटिंग के दौरान सारे कलाकारों की ड्रैस, ज्वैलरी और बाकी ऐक्सैसरीज संभालने के लिए और यह सारा सामान शूटिंग के दौरान कंटिन्यूटी में सही तरीके से इस्तेमाल करने की व्यवस्था ड्रैसमैन और वार्डरोब असिस्टैंट करते हैं.

इन का काम बहुत ही जिम्मेदारी का और मुश्किल होता है इसलिए इस काम के लिए ड्रैसमैन या वार्डरोब असिस्टैंट को यूनिट और प्रोड्यूसर के हिसाब से प्रतिदिन का अच्छा पैसा मिलता है और अगर इन का काम मेकर्स को पसंद आ जाए तो वे उस फिल्म की यूनिट के लिए पक्के हो जाते हैं, जिस के दौरान इस फिल्म का निर्माता अगर कोई दूसरी फिल्म भी बनाता है तो अपनी पूरी यूनिट को जिस में ड्रैसमैन, वार्डरोब असिस्टैंट जो उन के फैवरिट हैं उन को हमेशा बुलाते हैं.

पार्किंग और पैकिंग हैल्पर: फिल्म या टीवी की शूटिंग के दौरान लोकेशन बदलती रहती है, जिस के लिए बाकायदा पार्किंग और पैकिंग हैल्पर की जरूरत पड़ती है. इस नौकरी के लिए भी न तो कोई उम्र की सीमा तय है और न ही औरत या आदमी को ले कर फर्क क्योंकि यह जिम्मेदारी का काम होता है सब चीजें अच्छे से संभाल के रखनी होती हैं, इसलिए इस नौकरी के लिए ऐसे इंसान को ही अपौइंट किया जाता है जो पूरी जिम्मेदारी के साथ शूटिंग से जुड़ी सामग्री की पैकिंग और अन पैकिंग करना और अनलोडिंग करना अच्छे तरीके से जानता हो.

औफिस स्टाफ और औफिस असिस्टैंट: किसी फिल्म के प्रोडक्शन हाउस में फिल्म से संबंधित कई दस्तावेज होते हैं जैसे फिल्म का ऐग्रीमैंट, स्टारों के साइन करने के वक्त जरूरी दस्तावेज, पेमैंट डीटेल्स आदि. ऐसे कामों के लिए कई तरह के लोगों की जरूरत होती है, जिस के लिए 12वीं तक पढ़ाई जरूरी होती है. लेकिन अगर कोई 12वीं पढ़ाई के साथ थोड़ीबहुत इंग्लिश भी जानता है और दस्तावेज का काम सही ढंग से कर सकता है तो उस की प्रतिदिन और मासिक कमाई भी ज्यादा होती है.

रिसैप्शनिस्ट और एडमिन: किसी भी फिल्म के प्रोडक्शन हाउस में रिसैप्शनिस्ट और एडमिन का अहम रोल होता है. इस के लिए गुड लुकिंग लड़कियों को ज्यादा अच्छा रिस्पौंस मिलता है क्योंकि रिसैप्शनिस्ट और एडमिन के जरीए ही औफिस में आने वाले लोग फिल्म के निर्मातानिर्देशक तक पहुंचते हैं. इस नौकरी के लिए थोड़ीबहुत इंग्लिश आनी और स्मार्ट और प्रेजैंटटेबल होना जरूरी है. इन का काम औफिस का रिसैप्शन संभालना, फोन काल्स और विजिटर्स को अटैंड करना आदि होता है.

सैट और प्रौप्स असिस्टैंट: इस नौकरी के लिए योग्यता क्रिएटिविटी और चीजों को व्यवस्थित रखना, शूटिंग स्थल को सजाना, क्रौप्स को सही ढंग से रखने की सम झ होना जरूरी है.

क्रिएटिव प्रोडक्शन इंटर्न: कई प्रतिभावान युवा 12वीं के बाद सीखने के उद्देश्य से किसी भी प्रोडक्शन हाउस में सहायक के रूप में काम करते हैं जिस में उन्हें प्रतिदिन और मंथली पैसे भी मिलते हैं और सीखने का मौका भी मिलता है. इस पोस्ट के लिए 12वीं तक पढ़ाई जरूरी है,

सोशल मीडिया मैनेजर: क्योंकि आजकल सोशल मीडिया का जमाना है बिना पब्लिसिटी के कोई काम नहीं होता, इसलिए आज के समय में हर प्रोडक्शन हाउस सोशल मीडिया मैनेजर रखता है, जिस का काम उसे प्रोडक्शन हाउस के लिए इंस्टाग्राम, यूट्यूब के लिए रील बनाना, फोटो शेयर करना सब अपडेट करना होता है. इस नौकरी के लिए वीडियो एडिटिंग और ट्रेडर्स की सम झ होनी जरूरी है.

प्रतिदिन कमाई: फिल्म सिटी में काम के आधार पर 2 हजार से 5 हजार प्रतिदिन और मासिक वेतन 15 हजार से 25 हजार तक होता है जो काम और अनुभव के हिसाब से बढ़ता रहता है.