Sociology Career Scope : कल्पना  विश्वनाथ सोशल ऐंटरप्रन्योर है जो अपने कैरियर की शुरुआत से ही बहुत सी सोशल ऐक्टिविटीज, एनजीओ, वूमन ऐंपावरमैंट प्रोग्राम का हिस्सा बनी रहीं. वे गवर्नमैंट, नौनगवर्नमैंट, देश और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सोशल वर्क का हिस्सा बनी हुई हैं. अपनी इसी प्रतिभा से वे हैबिटैट की सीनियर ऐडवाइजर भी रह चुकी हैं. आज उन का अपना एक डिजिटल ऐप ‘सेफ्टीपिन’ है जो वूमन सेफ्टी ऐंड मोबिलिटी को मौनिटर और रिपोर्ट कर वूमन सेफ्टी को सपोर्ट करता है.

गृहशोभा आज कल्पना विश्वनाथ से हुई बातचीत के माध्यम से उन स्टूडैंट्स के लिए ऐडवाइज ऐंड गाइडैंस लाई है, जिन्हें सोशियोलौजी को अपना कैरियर सब्जैक्ट बनाना है और सोशल सैक्टर में कुछ करना है:

सोशियोलौजी को बहुत आम सब्जैक्ट कहा जाता है तो आप ने कैसे इसे कैरियर सब्जैक्ट के रूप में लिया?

मैं ने सोशियोलौजी इसलिए ली थी क्योंकि मेरा इस में इंटरैस्ट था और मैं समाज में कुछ ऐसा करना चाहती थी जिस से समाज में बदलाव पैदा हो. जब मैं देखती थी कि औरतों के लिए हर जगह रोक है- चाहे वह ऐजुकेशन हो, कैरियर हो या निजी जीवन हो तो सही नहीं लगता था. आज भी पढ़ीलिखी औरतें शादी के बाद अपनी जौब छोड़ कर सिर्फ घर की जिम्मेदारियों से बंध जाती हैं जो ठीक नहीं है. आज भी महिलाएं हमारे समाज में सेफ नहीं हैं. ऐसे में उन के लिए, अच्छे समाज के लिए मैं ने अपनी कालेज की पढ़ाई के समय से ही एनजीओ के साथ काम करना शुरू कर दिया था.

सोशियोलौजी स्टडीज में कैरियर स्पैशलाइजेशन के क्या औप्शन हैं?

सोशियोलौजी में भी बहुत सी स्टडीज हैं जैसे रूरल स्टडीज, अर्बन स्टडीज, टैक्नोलौजी, जैंडर स्टडीज, डिसैबिलिटी आदि. जो भी समाज में इशू है, सामाजिक प्रौब्लम है आप उन की स्टडीज कर सकते हैं जैसे आज यंग जैनरेशन डिजिटल सोशल मीडिया ऐडिक्ट हो रही है, डिप्रैशन का शिकार हो रही है तो यह सब सोशल प्रौब्लम ही है, जिस से पूरा समाज प्रभावित है. इस पर स्टडीज, रिसर्च और काम किया जा सकता है और लोग काम करते भी हैं. ऐसे ही बहुत से रास्ते या औप्शन हैं. आप इन सब में स्टडीज कर डाटा रिसर्च से, ऐकैडमिक, पौलिसीज, एनजीओ, फंडर, मीडिया इन्फ्लुऐंसर के जरीए भी समाज में बदलाव ला सकते हैं. हरकोई बैस्ट कालेज जाना चाहता है लेकिन आज हर किसी को बैस्ट कालेज मिलना आसान नहीं. सीट लिमिटेड होती हैं, मार्क्स भी देखे जाते हैं. मगर आज बहुत सी यूनिवर्सिटीज हैं जहां सोशियोलौजी प्रोग्राम है.

सोशियोलौजी में ग्रैजुएशन के बाद पौलिसीज स्टडीज, अर्बन स्टडीज आदि में मास्टर करो तो रिसर्च इंस्टिट्यूट, गवर्नमैंट, एनजीओ में काम कर सकते हैं जैसे आईएएस. यह भी तो सोशल वर्क कर रहे हैं. तो अगर आप सिविल सर्विसेज में जाना चाहते हैं तो सोशियोलौजी बहुत इंपौर्टैंट सब्जैक्ट है क्योंकि यह आप को सोशल लाइफ से, सोशल प्रौब्लम से जोड़ेगा. आज एचआर, सीएसआर हर जगह जहां लोगों की बात हो रही है सोशियोलौजी बहुत इंपौर्टैंट है.

आज ही सब्सक्राइब करें सरिता 
 आपके लिए स्पेशल छूट 

सोशियोलौजी के साथ वह कौन से सब्जैक्ट हैं जो कौरपोरेट सैक्टर में काम आते हैं?

इकौनोमिक्स एक बहुत ही अच्छा सब्जैक्ट है सोशियोलौजी के साथ. आप इस के साथ कौरपोरेट सैक्टर में अच्छा कर सकते हैं. एचआर पढ़ने और उस में काम करने के लिए भी यह अच्छा रहेगा क्योंकि आप वहां लोगों से सीधा जुड़े हुए हो, सोशली कनैक्ट में हो. इस के साथ ही साइकोलौजी भी अच्छा है. यह आप को कौरपोरेट और सेल्स सैक्टर में काम आएगा. वहां भी लोगों को जान कर आप काम करते हैं. इनकौंबिनेशन स्टडीज से आप किसी भी सैक्टर कौरपोरेट, गवर्नमैंट, एनजीओ, रिसर्च, टीचिंग हर सैक्टर में जा सकते हैं.

सोशियोलौजी के साथ कौन से हैं 3 बैस्ट कैरियर स्कोप?

पहला है सीएसआर जौब्स. आज हर कंपनी का सीएसआर डिपार्टमैंट है, जहां उन लोगों की जरूरत है जो सोशल सैक्टर की नौलेज रखते हैं, दूसरा हैं गवर्नमैंट पौलिसीज जैसे नीति आयोग, अशोका, सीएम फेलोस, जहां बड़े मिनिस्टर, सीनियर ब्यूरोक्रेट्स के साथ काम कर सकते हैं, सीख सकते हैं, तीसरा अगर आप कुछ साल सोशल वर्क करते हैं, ऐक्सपीरियंस गेन करते हैं तो आप यूयूएन जैसी बड़ी संस्था, बड़ी फंडिंग ऐजैंसीज, इंटरनैशनल फाउंडेशन से भी जुड़ सकते हैं.

इन संस्थाओं को उन लोगों की तलाश होती है जिन्हें सोशल वर्क में अच्छा काम करने का ऐक्सपीरियंस होता है यानी तो सोशियोलौजी में ऐसे बहुत से मौके हैं जिन का बहुत लोगों को पता नहीं.

सोशल सैक्टर में कैरियर बनाने के लिए कौन सी स्किल्स होनी चाहिए?

अपने सब्जैक्ट नौलेज के साथ रिसर्च स्किल सीखें, क्वांटिटेटिव स्किल सीखें, सौफ्टवेयर स्किल ऐक्सेल, डिजिटल स्किल, ऐनालिसिस वर्क, कम्युनिकेशन स्किल इन्हें सीखें. क्योंकि इन के साथ कैरियर के बहुत से रास्ते खुल सकते हैं. ध्यान दें कि कालेज में हम लिमिटेड ही जानते हैं. लेकिन जब काम करते हैं तभी हमें पूरा सीखने को मिलता है. सब्जैक्ट चाहे जर्नलिज्म हो या इकौनोमिक्स, आप तभी सीख, समझ पाते हैं जब आप काम करते हैं जैसाकि इंटर्नशिप प्रोग्राम में होता है.

आज हमारे पास सेफ्टी पिन में बहुत से स्टूडैंट इंटर्नशिप के लिए आते हैं, जहां उन्हें वूमन प्रौब्लम, डाटा ऐनालिसिस, डिजिटल टैक्नोलौजी इन सब को सीखनेसमझने को मिलता है और जिन्हें मेरी तरह अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए ह्यूमन इशू को सौल्व करने के लिए कोई ऐप या प्रोजैक्ट शुरू करना है वे पहले काम करने का ऐक्सपीरियंस लें.

कैरियर की शुरुआत में बहुत जरूरी है अपनी स्किल्स को बढ़ाना, ऐक्सपीरियंस गेन करना ताकि आप को पता हो सके कि काम किया कैसे जाता है, किन बातों का ध्यान रखना होता है, क्याक्या जरूरी होता है.

सोशल सैक्टर के बर्नआउट से कैसे डील करें?

कौरपोरेट सैक्टर में भी तो बर्नआउट है. आज आप कोई भी काम कर रहे हो आप को बहुत हार्ड वर्क करना पड़ता है, जिस से बर्नआउट तो फील होगा ही. हां, यह सोशल सैक्टर में थोड़ा ज्यादा है क्योंकि यहां आप लोगों की तकलीफ देखते हैं, इमोशनल प्रैशर होता है, इसलिए वर्क लाइफ बैलेंस बहुत जरूरी है. समयसमय पर ब्रेक लें, हौबीज क्रिएट करें.

आज की जैनरेशन के लिए कोई मैसेज?

मैं आज की जैनरेशन को यही मैसेज देना चाहूंगी कि वह चाहे कोई भी काम करे अपना थोड़ा सा समय अपनी सोसाइटी, अपने देश को इंप्रूव करने में जरूर दे. आज बहुत सी सोशल प्रौब्लम्स हैं. उन्हें आज की जैनरेशन समझें,

उन्हें दूर करने की जो भी कोशिश कर सके वह करे, लोगों की मदद करे, साथ ही गर्ल्स से कहूंगी कि इंडिपैंडैंट बनें. पढ़ो और पहले अपना कैरियर बनाओ, पहले ही शादी की तरफ मत भागो. पैसे कमाओ और सेव करो. पहले अपने लिए कुछ करो, इंडिपैंडैंट बनो, लाइफ में आगे बढ़ो.