हमारे देश में लगभग हर साल 10 से 13 लाख स्टूडैंट्स यूपीएससी के लिए रजिस्टर होते हैं. मगर क्या सभी यूपीएससी क्लीयर कर पाते हैं? जवाब है नहीं. यूपीएससी में सक्सैस रेट सिर्फ 0.1 से 0.2% है. वह कैसे?

एक सर्वे के अनुसार 2023-2024 का डाटा 

कुल आवेदक: लगभग 13 लाख.

प्रीलिम्स ऐग्जाम में स्टूडैंट्स की संख्या: लगभग 5-6 लाख.

द्क्वालिफाइड मेंस: करीब 10 से 15 हजार.

क्वालिफाइड इंटरव्यू: करीब 2,500 से 3,000.

फाइनल सिलैक्टेड: करीब 700 से 1100.

तो अब प्रश्न यह उठता है कि इस कठिन परीक्षा को क्लीयर करने के लिए क्या किया जाए? कैसे तैयारी की जाए? टाइमटेबल कैसा हो? सिलेबस को कैसे समझें? कोचिंग? यहां का स्ट्रैस? ये सब कैसे मैनेज हो?

आप के इन्हीं सवालों के जवाब तलाशते हुए गृहशोभा यूपीएससी (2025) की एआईआर 914 रैंकर आयुषी सिजेरिया की यूपीएससी जर्नी लाई है. आयुषी से हुई हमारी बातचीत में हम ने जाना कि 2 बार सफलता न मिलने पर भी वे अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटीं और कैसे अपने तीसरे प्रयास में अपने यूपीएससी के लक्ष्य को पूरा किया.

आयुषी आप ने यूपीएससी के विशाल सिलेबस को कैसे बांटा कि कुछ छूट न जाए?

मैं ने पहले बेसिक स्टैंडर्ड को फौलो किया, हर सब्जैक्ट अच्छे से पूरापूरा पढ़ा, रीड किया. फिर मैं ने पिछले सालों के क्वैश्चन पेपर्स को ऐनालाइज किया. देखा कि कौन से टौपिक ज्यादातर रिपीट हो रहे हैं. फिर प्रीमिल्स, मैंस, इंटरव्यू तीनों के हिसाब से जिस टौपिक के ज्यादा आने के चांसेज हैं, उस पर अधिक ध्यान दिया. मैं ने रोज का टाइमटेबल बनाया कि आज मुझे कितने टौपिक, कितने चैप्टर करने हैं. इस तरह मैं ने हर दिन, हर घंटे, एक मिनट तक की प्लानिंग की और अपना सिलैबस पूरा किया.

औप्शनल सब्जैक्ट का चुनाव क्या रुचि पर आधारित था या केवल स्कोरिंग पैटर्न पर?

मुझे लगता है कि औप्शनल सब्जैक्ट वह हो जिस में आप का इंटरैस्ट है क्योंकि औप्शनल सब्जैक्ट बहुत डीप स्टडी मांगता है. ऐसे में जिस सब्जैक्ट में आप की रुचि नहीं होगी उसे आप डीप जा कर नहीं पढ़ सकते, आप को बहुत बोरियत होगी. इसलिए मैं ने तो हिस्ट्री का चयन किया था क्योंकि मुझे यह अपने स्कूल टाइम से ही बहुत पसंद थी.

मैं ने जब यूपीएससी का लक्ष्य सोचा था, मैं ने तभी सोच लिया कि मेरा औप्शनल सब्जैक्ट हिस्ट्री ही होगा. क्योंकि यह एक ऐसा सब्जैक्ट है, जिस में मेरा इंटरैस्ट है और मैं इसे बहुत डीप जा कर बिना किसी बोरियत के पढ़ सकती हूं.

आप देखो तो सोशियोलौजी भी अच्छा औप्शनल सब्जैक्ट है लेकिन मु?ो लगता है कि अगर मैं ने सोशियोलौजी चुना होता तो मैं उस में इतना अच्छा स्कोर नहीं कर पाती क्योंकि मेरा उस में इतना इंटरैस्ट नहीं है. तो जिस सब्जैक्ट में आप डीप जा सको, आप को बोरियत न हो, आप उस में एक तरह की मास्टर या उस से आगे के लैवल की डीप स्टडी कर सको, आप उस सब्जैक्ट को औप्शनल सब्जैक्ट बनाओ.

इंटरैस्ट के आधार पर सब्जैक्ट चुनें क्योंकि जिस सब्जैक्ट में इंटरैस्ट ही नहीं होगा तो उस में डीप स्टडी कैसे करोगे और स्टडी पक्की नहीं होगी तो स्कोर कैसे करोगे? स्कोर करने के लिए जरूरी है कि आप ने उस सब्जैक्ट को डीप में पढ़ा हो, डेप्थ में लिखा हो और पिछले क्वैश्चन पेपर्स को ऐनालाइज किया हो.

आप ने घंटों के हिसाब से पढ़ा या डेली टारगेट के हिसाब से?

मैं डेली टारगेट के हिसाब से पढ़ती थी.

मैं ने कितने घंटे पढ़ाई की उस पर ध्यान देने के बजाय क्या और कितने टौपिक कवर किए

मैं यह देखती थी. मैं ने सब्जैक्ट्स डिवाइड कर रखे थे जैसे सब से पहले मैं करंट अफेयर्स, न्यूज पेपर पढ़ती थी, फिर सब्जैक्ट और फिर आंसर राइटिंग.

टाइमटेबल पालन न कर पाने की गिल्ट को कैसे संभालती थीं और अगले दिन कैसे वापसी करती थीं?

कभीकभी ऐसा हो जाता है कि आप अपने डेली टारगेट पूरा नहीं कर पाते. तो रात के समय एक गिल्ट आप को सताता है. मेरे साथ भी हुआ तो मैं ने अगले दिन सब से पहले उस छूटे हुए टारगेट को पूरा किया और फिर डेली टारगेट रोज की तरह लिया.

मगर इस बीच मैं यह भी देखती थी कि उस दिन डेली टारगेट पूरा न होने की वजह क्या रही? अगर वह मेरी स्पीड थी तो अगले दिन से अपनी स्पीड बढ़ाती थी और यदि वह मेरा दूसरों काम में ज्यादा टाइम देना था तो मैं उस समय में कटौती कर देती थी. फिर जैसेजैसे प्रीलिम्स पास आते हैं, समय बढ़ जाता है, रोज 10से 12 घंटों की पढ़ाई तो फिक्स है ही.

क्या दोस्तों और सोशल मीडिया से दूरी जरूरी है? सोशल लाइफ और पढ़ाई के बीच संतुलन कैसे बनाया?

यूपीएससी की जर्नी में कम से कम 3-4 साल लग जाते हैं. इस बीच में अगर आप पूरी तरह से फैमिली, फ्रैंड्स, सोसाइटी से दूर हो जाए तो बहुत चांसेज हैं कि आप डिप्रैशन का शिकार हो जाओ. आप की मैंटल हैल्थ खराब हो जाएगी. इसलिए मैं कहूंगी कि पूरी तरह से दूरी न बनाएं बल्कि एक बैलेंस क्रिएट करें जो मैं ने भी बनाया. मुझे जब स्ट्रैस होता था तो कजिन के साथ थोड़ा बाहर घूम आती थी, फैमिली के साथ टाइम स्पैंड करती थी. पीएससी जर्नी लंबी है, यहां लगातार बने रहना पड़ता है और यहां खुद को सस्टेन करने के लिए खुश रहना जरूरी है. रही सोशल मीडिया की बात तो मैं ने उस से दूरी नहीं बनाई बल्कि उस का जस्टिफाइ यूज किया.

आज सोशल मीडिया पर आप को बहुत सारी इन्फौरमेशन मिलती है, टौपिक्स वीडियो हैं, लैक्चर हैं, इंटरव्यू सैशन हैं, स्पीकर्स हैं. गवर्नमैंट के बहुत से अकाउंट है जहां से बहुत इन्फौरमेशन मिलती है. इसलिए दूरी बनाने के बजाय स्क्रोल करने के बजाय, उस का सही यूज करें.

यूपीएससी की पूरी तैयारी में लगभग कितना खर्चा आता है?

देखिए खर्चा आप की निजी सहूलियत और स्टैंडर्ड पर निर्भर करता है. अगर सिलेबस से जुड़े डाइरैक्ट खर्चे की बात करें तो यह इतना नहीं है क्योंकि आप को अपनी किताबें ही पढ़नी हैं, एनसीईआरटी नोट्स, लैक्चर, साथ ही आप को फ्री में औनलाइन लैक्चर, वीडियो, इंटरव्यू सब मिल रहा है. व्हाट्सऐप और टैलीग्राम पर ऐसे बहुत से चैनल हैं जहां टौपिक पर डिस्कसन चलती रहती है. इन्फौरमेशन मिलती रहती है तो आप की कोचिंग फीस, ट्यूशन फीस, बुक्स आदि का खर्चा कम हो गया. लेकिन जब आप फिट्टेस्ट सीरीज जौइन करेंगे तो उस खर्चे से आप टाल नहीं सकते. वहां पैसा लगेगा ही.

वहीं इनडाइरैक्ट खर्चे की बात करें तो यह खर्चा टाला नहीं जा सकता. जैसे औनलाइन कंटैंट के लिए वाईफाई चाहिए तो उस पर खर्च होगा. अगर आप कोई पीजी या होस्टल ले रहे हैं तो उस पर खर्च होगा, अगर नौर्थ रीजन में हैं जहां तापमान 45-46 डिगरी हो जाता है तो कूलर या एसी भी चाहिए नहीं तो आप की बौडी ठीक नहीं रह पाएगी. साथ टैब या लैपटौप का खर्चा, खानेपीने का खर्चा. तो इनडाइरैक्ट खर्चा बहुत है और उसे टाला भी नहीं जा सकता.

साथ ही मोनेटरी कौस्ट के साथ जो और कौस्ट लगती है वह है आप की साइकोलौजिकल कास्ट और लेबर कौस्ट.

एक कोचिंग की क्या भूमिका रहती है?

एक कोचिंग या मैंटर अथवा टीचर का बहुत इंपौर्टैंट रोल है. यहां जरूरी नहीं कि आप कोचिंग में 3-4 लाख खर्च करें लेकिन आप के पास एक मैंटर जरूरी है क्योंकि यूपीएससी का सिलेबस बहुत बड़ा है. यहां हर चीज पढ़ने की जरूरत भी नहीं होती बल्कि रणनीति की जरूरत है जो आप को खुद से नहीं आएगी, खुद करने में बहुत टाइम निकल जाएगा.

साथ ही शुरुआत कहां से करनी है? कौन से सब्जैक्ट उठाने हैं? कैसे आंसर लिखना है? यह आप को कोई बताएगा तभी आप की जर्नी शौर्ट होगी, आप टाइम पर चीजें कर पाएंगे. मैं ने भी मैंटरशिप ली थी क्योंकि अपनेआप पढ़ने के लिए बहुत ज्यादा हो जाता है तो अगर आप को कोई गाइड कर दे, 20-30त्न भी बता दे तो कुछ आसानी हो जाती है.