Strong Communication : डा.सुरेश लता शिक्षा, नेतृत्व और नीति निर्माण के क्षेत्र में एक सशक्त और प्रेरणादायक नाम है. अपने लंबे और विविध अनुभवों के साथ उन्होंने न केवल ऐकैडमिक दुनिया में उत्कृष्टता हासिल की बल्कि प्रशासन, रिसर्च और संस्थागत नेतृत्व में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है. देशविदेश के मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करने से ले कर युवा पीढ़ी को प्रेरित करने तक उन का काम काबिल ए तारीफ है. वे मानती हैं कि सीखना कभी रुकना नहीं चाहिए, यही सोच उन्हें आज भी आगे बढ़ने और दूसरों को प्रेरित करने की ऊर्जा देती है.

जब आप स्कूल में थीं, तब क्या सोचती थीं कि आगे चल कर क्या बनना है? क्या उस समय आप ने अपने भविष्य को ऐसे देखा था?

स्कूल टाइम से ही मेरा पैशन टीचिंग और ट्रेनिंग में था. कालेज के समय मैं ने कंपीटिटिव ऐग्जाम का प्री क्लीयर कर लिया था और मैंस की तैयारी कर रही थी. उसी दौरान 23 साल की उम्र में, मास्टर्स करते हुए मैं ने दुर्लभजी हौस्पिटल की लाइब्रेरी में पार्टटाइम काम शुरू किया. वहीं मुझे पता चला कि लाइब्रेरी साइंस भी एक तकनीकी विषय है. तब मेरा रुझान उस ओर हुआ और प्री क्लीयर करने के बाद भी मैं ने यही क्षेत्र चुना.

तब से आज तक मैं लगातार सीखने की कोशिश कर रही हूं. आईजीओटी कर्मयोगी (यह भारत सरकार का एक डिजिटल लर्निंग प्लेटफौर्म है, जिस का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को ‘नियम आधारित’ से ‘भूमिका आधारित प्रशिक्षण दिया जाता है.) के 33 से ज्यादा सर्टिफिकेशन प्रोग्राम कर चुकी हूं. मैं ने समाजशास्त्र, लाइब्रेरी साइंस में पोस्ट ग्रैजुएशन, एमबीए, नालसार यूनिवर्सिटी औफ ला से पीजी डिप्लोमा इन साइबर ला और ऐडवांस कंप्यूटर साइंस किया. बचपन से ही मेरा एक ही लक्ष्य था, सैल्फ डिपैंडैंट बनना.

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स्टूडैंट लाइफ में कौन से विषय आप को पसंद थे और ये कैसे आप के कैरियर में मददगार बने?

हम सब के पेरैंट्स हमेशा सोचते हैं कि जो बच्चा पढ़ाई में कुशल है उसे साइंस या कौमर्स ही पढ़ने के दिया जाए. मैं ने हायर स्टडीज के लिए आर्ट्स को चुना था. तब यही 3 औप्शन होते थे लेकिन मैं कहूंगी कि एनईपी 2020 के बाद बच्चों के लिए चुनाव के अनेक रास्ते खुल चुके हैं. अब हमारी सरकार बच्चों की स्किल डैवलपमैंट पर बहुत काम कर रही है. आजकल केवल सिर्फ फौर्मल स्कूल ऐजुकेशन नहीं बल्कि आप की प्रैक्टिकल लर्निंग काफी काम आती है.

यह सोच गलत है कि बच्चे ने आर्ट्स ली है तो उस का कोई भविष्य नहीं है लेकिन क्योंकि मैं ने लाइब्रेरी साइंस लिया है तो उस में आप को हर सब्जैक्ट का ज्ञान जरूरी है. मैं ने क्योंकि मैडिकल लाइन से शुरू किया तो मुझे आज भी सारी मैडिकल लाइन की कौन सी बुक किसलिए काम आती हैं, पार्क ऐंड पार्क क्यों काम आता है. लाइब्रेरी में काम करने वाले को कहते हैं मास्टर औफ आल क्योंकि वह हर किताब चाहे वह साइंस की हो या मैनेजमैंट की, किताबों के बीच रहने से उसे सब की नौलेज है.

अब मैं कहूं तो काम की कमी नहीं है, भले ही आप किसी भी सब्जैक्ट से पढ़े हों लेकिन आप को प्रैक्टिकल स्किल्स आनी बहुत जरुरी हैं, जिसे एनईपी 2020 अब पूरा करने की कोशिश कर रहा है. स्किल कभी वेस्ट नहीं होती. मैं आईपीसीसी सैंटर यानी इंस्टिट्यूशन पार्टनर्शिप इन कौरपोरेट कम्युनिकेशन को संभालती हूं, हालांकि यह मेरी फील्ड नहीं है लेकिन मेरी स्किल्स ने मेरे लिए ये रास्ते खोले हैं.

स्टूडैंट्स के लिए भी मेरी यही सलाह होगी कि आप को कहीं भी कुछ भी सीखने को मिल रहा है तो जरूर सीखें. कोई भी कौशल और आप की शिक्षा कभी बेकार नहीं होती, भविष्य में यह कहीं न कहीं आप के जरूर काम आएगी.

स्टूडैंट्स को बेहतर भविष्य के लिए किन स्किल्स पर काम करना चाहिए?

सब से जरूरी स्किल है कम्युनिकेशन का स्ट्रौंग होना. कोशिश करें कि आप स्कूल या कालेज लैवल पर डिबेट जैसी प्रतियोगिताओं का हिस्सा बनें. अगर यह नहीं कर पाते हैं तो कोशिश करें कि क्लास में अपने सहपाठियों के साथ वर्तमान की घटनाओं, खबरों पर बातचीत करें, अपनी पढ़ाई को ले कर बातचीत करें.

अगर क्लास में टीचर सवाल करती हैं तो सब के सामने उन्हें जवाब देने की कोशिश करें. आज की लगातार डैवलप होती तकनीकी दुनिया में आप डिस्कशन टौपिक्स के लिए एआई टूल्स की मदद ले सकते हैं लेकिन उन्हें कैसे अपने शब्दों में ढालना है यह सीखें. जितना आप एकदूसरे के साथ कम्युनिकेट करेंगे, उतना ही आप की खुद को व्यक्त करने की क्षमता में निखार आएगा.

दूसरी है तकनीकी शिक्षा. कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान अब सब को है लेकिन अगर आप उस में कुछ ऐडवांस सर्टिफिकेशन ले सकते हैं तो वे आप के बेहद काम आएंगे.

वन टू वन मैंटरशिप से आप बहुत कुछ सीख सकते हैं. स्कूल/कालेज के स्टूडैंट्स को लगता है कि अपने भविष्य को ले कर वे जो सोच रहे हैं, कर रहे हैं वही सही है लेकिन उन के टीचर्स, पेरैंट्स, मैंटोर्स काफी अनुभवशाली हैं. अगर आप को तब भी लगे कि आप के भविष्य को ले कर उठ रहे सवालों के सही जवाब नहीं दे पा रहे हैं या जो आप चाहते हैं वे नहीं समझ पा रहे हैं तो आप कैरियर काउंसलर्स की भी मदद ले सकते हैं.

शिक्षा, प्रशासन, रिसर्च और पौलिसी–इन सब क्षेत्रों में काम करते हुए सब से कठिन मोड़ कौन सा रहा?

मुझे लगता है कि जब आप खुद को नया सीखने के लिए प्रेरित करते हो तो आप को कोई कठिनाई महसूस नहीं होती. जब आप लर्निंग मोड में होते हैं तो आप के सामने कोई युवा भी हो तो भी आप उस से कुछ सीखने की कोशिश करते हैं. इसलिए मुझे कभी कोई कठिनाई महसूस नहीं हुई. मैं पीएचडी हूं और पीएचडी गाइड भी हूं. लेकिन मुझे रिसर्च में कभी कोई दिक्कत नहीं आई.

मेरे साथ बहुत से प्रोफैशनल्स जुड़े हैं, जिन्हें मैं गाइड कर रही हूं. इन में कई मु?ा से उम्र में बड़े भी हैं, लेकिन हम एकदूसरे का सम्मान करते हैं और एकदूसरे से कुछ सीखने की कोशिश करते हैं. इसलिए आप का ज्ञान के लिए भूखा होना जरूरी है. जिस से जो सीखने को मिले सीखो, उसे चैलेंज के बजाय अवसर के तौर पर देखें.

स्टूडैंट्स जो दबाव में रहते हैं, वे कैसे सकारात्मक रहने की प्रैक्टिस कर सकते हैं?

बच्चों को पढ़ाई के साथसाथ किसी भी क्रिएटिव ऐक्टिविटी में जरूर हिस्सा लेना चाहिए. चाहे पेंटिग, डांसिंग, म्यूजिक, पौटरी, स्पोर्ट्स, लिखना. बच्चों को पढ़ाई के अलावा कुछ टाइम अपने लिए निकालना बेहद जरूरी है. एनएलपी प्रैक्टिशनर होने के नाते मैं बच्चों को बताती हूं कि अगर आप को अपने ब्रेन को कैसे ट्रेन करना है. मेरी पुस्तक भी है ‘ट्यून योर ब्रेन.’

कैरियर टिप्स

फौर्मल स्कूल ऐजुकेशन काफी नहीं अब प्रैक्टिकल लर्निंग ज्यादा महत्त्वपूर्ण.

कालेज डिबेट का हिस्सा जरूर बनें ताकि कम्यूनिकेशन स्किल्स डैवलप होने के साथसाथ क्रिटिकल थिंकिंग भी डैवलप हो.

कहीं भी अटकें तो कैरियर काउंसलर के पास जाने से न हिचकें.