difficult subject options : रीमा पढ़ने में अच्छी है और विषयों को अच्छे से सम?ाती भी है. मगर जब कालेज में विषयों को चुनने की बारी आई तो उस की सम?ा एक डर का शिकार होने लगी. दरअसल साइंस बैकग्राउंड की रीमा ने 12वीं के बोर्ड में अच्छे अंक लिए और जब ग्रेजुएशन करने का विषय चुनना है तो वह बी.एससी पास का कोर्स पसंद कर रही है,
जबकि उसे पता है कि बी.एससी होंर्स इन मैथेमैटिक्स या डाटा साइंस में उस के लिए अच्छा स्कोप है. मगर मैथेमैटिक्स और डाटा साइंस की आगे की पढ़ाई में बढ़ती जटिलता उसे फेल होने का भय दे रही है.
उसे यह लगता है कि मैथेमैटिक्सया डाटा साइंस में डिगरी प्राप्त करने की क्षमता उस में नहीं है. इसलिए अपनी क्षमता को सीमित सम?ाते हुए वह आम डिगरी तक ही खुद को सीमित रखना चाहती है, जबकि उस के पेरैंट्स और मित्र उसे एक बार कोशिश करने की सलाह दे रहे हैं.
एक स्टूडैंट को कोई विषय कई कारणों से अपनी क्षमता के बाहर लगता है, जैसे सब्जैक्ट पढ़ने में ही बहुत बोरिंग लगता हो क्योंकि उसे पढ़ाया ही बोरिंग ढंग से जा रहा हो, उसे पढ़ाए जाने का तरीका ऐसा हो कि उसे समझने में जटिलता लगे, उसे अकेले नहीं पढ़ा जा सकता हो, मन को नहीं भाता हो या दूसरे स्टूडैंट्स को उस सब्जैक्ट से डरतेघबराते देखा हो या उस की जटिलताओं को कहतेसुनाते देखा हो.
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इस प्रकार से कई बार दूसरों की बातों से भी किसी सब्जैक्ट के विषय में एक भ्रांति मन में घर कर जाती है और वह सब्जैक्ट बिना पढ़े या कोशिश करे ही डिफिकल्ट लगने लगता है. इसलिए सब्जैक्ट का चुनाव करते समय मन में भय नही बल्कि आत्मविश्वास रखना चाहिए.
आज के समय में स्टूडैंट का अपने कठिन विषयों का प्रयास करना लचीलेपन और विकास की मानसिकता को बढ़ावा देता है जो उन्हें भविष्य के मुश्किल समय के लिए तैयार करता है, साथ ही अगर आप ने अपने कठिन विषयों पर भी महारत या प्रैक्टिस कर ली तो यह आप के अंदर एक कौन्फिडैंस पैदा करता है जो एक तरह का प्लस पौइंट है आप की प्रोफाइल, आप की पर्सनैलिटी में.
कठिन विषयों में कोशिश करने के कुछ और फायदे:
आउट औफ कंफर्ट जोन: अपनी क्षमता को चुनौती देना या बढ़ाना आप को आप के आराम क्षेत्र यानी कंफर्ट जोन से बाहर निकालता है जो कई बार अपनी काबिलीयत को पहचानने में मदद करता है.
मानसिकता का विकास: इस तरह की कोशिश कई बार स्टूडैंट की क्षमताओं को विकसित कर उस की मानसिक दृढ़ता को मजबूत करती है जो कई बार अन्य क्षेत्रों की समस्याओं को भी हल करने में मदद करता है.
आत्मविश्वास: किसी कठिन विषय को सफलतापूर्वक करने से मन में यह विश्वास आता है कि प्रयासों के माध्यम से रास्ते में आने वाली बाधाओं को पार कर सकते हैं और भविष्य की चुनौतियों को संभालने का आत्मविश्वास पैदा होता है. यह परिश्रम कठिन समय से गुजरने के लिए लचीलापन अर्थात फ्लैक्सिबिलिटी भी प्रदान करता है.
ऐक्सपैंड योर लिमिट: नियमित रूप से किए प्रयास आप की पहुंच को बढ़ाते हैं तो हो सकता है कि अपने मौजूदा लैवल से 1 या 2 सीढ़ी ऊपर निकल जाएं. इसलिए एक स्टूडैंट को कठिन लगने वाले विषयों को भी कभीकभी ट्राई करना चाहिए यानी अपनी क्षमता से बाहर के सब्जैक्ट को भी पढ़नेसीखने की कोशिश करनी चाहिए.
मगर इस बात का भी ध्यान रखें कि यहां कोशिश की बात की जा रही है जबरदस्ती की नहीं. खुद को कठिन विषय के लिए चुनौती देने से पहले या पेरैंट्स को बच्चे को कोई कठिन सब्जैक्ट दिलाने या पढ़ने की राय देने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह कोशिश एक ग्रोथ या विकास का दायरा हो न कि बच्चे पर ओवरलोड या अधिभार का.
स्टूडैंट और पेरैंट्स दोनों को कोशिश
और ओवरलोड के बीच का अंतर पता होना चाहिए नहीं तो स्टूडैंट या बच्चे पर अधिभार होने से वह हताशा, डिप्रैशन आदि का शिकार हो सकता है. इसलिए अपनी क्षमता को बढ़ाते समय अपनी मानसिक शांति और स्वास्थ्य का भी खयाल रखें.
पेरैंट्स और स्वयं स्टूडैंट को यदि किसी भी समय यह लगे कि कठिन विषय आप को हताश कर रहा है, आप की क्षमता बढ़ने के बजाय कम हो रही या यह कोशिश एक भार बन रही है तो आप विषय बदल लें. विषय बदलने या ड्रौप करने का औप्शन हमेशा अपने साथ रखें. यह समझें कि ड्रौप करने से आप कम नहीं आंके जाएंगे या कोई आप का मजाक बनाएगा. आप इतना समझें कि आप ने पूरी कोशिश की और कोशिश करना ही अपनेआप में एक बड़ा कदम होता है जो बहुत कम लोग ही उठा पाते हैं.

