ACCA course details : भारत  में जब भी कौमर्स कैरियर की बात होती है तो सब से पहले दिमाग में इंस्टिट्यूट औफ चार्टर्ड अकाउंटैंट्स औफ इंडिया (एसीसीए) का सीए कोर्स आता है. लेकिन इसी क्षेत्र में एक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का कोर्स है- ऐसोशिएशन औफ चार्टर्ड सर्टीफाइड अकाउंटैंट्स (एसीसीए), जिसे अब धीरेधीरे भारत में भी पहचान मिल रही है.

एसीसीए यूनाइटेड किंगडम आधारित एक ग्लोबल प्रोफैशनल अकाउंटिंग कोर्स है, जिसे 180+ देशों में मान्यताप्राप्त है. जहां सीए मुख्यत: भारत केंद्रित कोर्स है, वहीं एसीसीए कोर्स इंटरनैशनल अकाउंटिंग, औडिटिंग, टैक्सेशन और फाइनैंस में विशेषज्ञ बनाता है. सरल भाषा में समझें तो सीए का कोर्स करने के बाद जहां भारत में एक अच्छा और मजबूत कैरियर शुरू हो सकता है, वहीं एसीसीए कोर्स दुनियाभर में कैरियर बनाने का अवसर देता है.

एसीसीए में कुल 13 पेपर होते हैं जो 3 स्तरों में बंटे होते हैं : पहला- ऐप्लाइड नौलेज, दूसरा- ऐप्लाइड स्किल्स और तीसरा- स्ट्रैटेजिक प्रोफैशनल. इस के साथ ही 3 साल का प्रैक्टिकल ऐक्सपीरियंस रिक्वायरमैंट (पीईआर) यानी व्यावहारिक अनुभव आवश्यकता और ऐथिक्स मौड्यूल पूरा करना होता है, जिस में  2.5 से 3.5 साल लगते हैं यदि आप लगातार पास होते जाएं.

जानकारी का अभाव

भारत में अभी एसीसीए के बारे में युवाओं को जानकारी काफी कम है. दरअसल, भारत में स्कूलकालेज में जागरूकता की बड़ी कमी है और यहां सीए का ही वर्चस्व है. इस के अलावा अधिकांश पेरैंट्स बच्चों को विदेश भेजने के इच्छुक भी नहीं होते हैं, इसलिए भी इस कोर्स की चर्चा कम ही है. लेकिन अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है खासकर एमएनसीएस के बढ़ते प्रभाव के कारण अब युवा एसीसीए के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाह रहे हैं.

गौरतलब है कि एसीसीए करने के बाद कैरियर के रास्ते काफी विविध और ग्लोबल होते हैं. औडिट ऐंड इंश्योरैंस के क्षेत्र की बड़ी कंपनियां जैसे डीईएलओआईटीटीई, पीडब्ल्यूसी, ईवाई, केपीएमजी में इन प्रोफैशनल्स की बड़ी मांग है. इंटरनैशनल औडिट प्रोजैक्ट्स में भी इन की बड़ी जरूरत देखी जा रही है.

इस कोर्स को करने के बाद स्टूडैंट्स फाइनैंशियल ऐनालिस्ट या इनवैस्टमैंट बैंकिंग के क्षेत्र में अच्छा कैरियर बना सकते हैं. इस के अलावा कौरपोरेट फाइनैंस और टैक्स कंसल्टैंट के तौर पर भी बेहतरीन कैरियर यह कोर्स देता है. दुबई, यूके, सिंगापुर, कनाडा जैसे देशों में इन प्रोफैशनल्स की बड़ी मांग है और इन देशों में बहुत अच्छी सैलरी प्रदान की जाती है.

एसीसीए कोर्स करने के बाद भारत में जहां एक फ्रैशर ही 6 से 8 लाख रुपए सालाना कमा सकता है और 3 से 5 साल के अनुभव के बाद उस की सैलरी 12 से 25 लाख रुपए सालाना हो जाती है, वहीं यूके में वह 30 से 60 लाख रुपए सालाना, यूएई में 25 से 70 लाख रुपए सालाना और अधिक सीनियर हो जाने पर 1 करोड़ रुपए सालाना से अधिक आय प्राप्त कर सकता है. उल्लेखनीय है कि एसीसीए की असली ताकत डौलर या पाउंड में कमाने की क्षमता है.

एक ग्लोबल डिगरी

एसीसीए कोर्स करने के खर्च की बात करें तो इस की फीस फिक्स नहीं होती बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप सैल्फ स्टडी करते हैं या कोचिंग लेते हैं और आप को कितने पेपर्स में छूट मिलती है. एसीसीए चूंकि यूके की बौडी है, इसलिए इस कोर्स की फीस पाउंड में होती है. भारतीय रुपए में बात करें तो इस की कुल परीक्षा फीस ढाई से साढ़े तीन लाख रुपए तक आती है. इस के अतिरिक्त करीब 2 लाख रुपए का खर्च कोचिंग और स्टडी मैटीरियल पर आता है. रजिस्ट्रेशन फीस साढ़े तीन हजार से 11 हजार रुपए तक होती है जो सिर्फ एक बार चार्ज की जाती है.

ध्यान रखने वाली बात यह है कि इस कोर्स को पूरा करने में जितना ज्यादा टाइम लगेगा, उतनी ऐनुअल फीस बढ़ेगी. अगर ऐग्जाम में फेल हुए तो फीस फिर से देनी होगी. ग्रेजुएशन या सीए स्टूडैंट्स को कुछ पेपर्स में छूट मिल सकती है जिस से खर्च कुछ कम हो जाता है. एसीसीए भारत में सी से महंगा है लेकिन यह एक ग्लोबल डिगरी है, इसलिए इनवैस्टमैंट भी ज्यादा है.

आज अधिकांश कंपनियां अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही हैं. पूरी दुनिया एक ही अकाउंटिंग भाषा की ओर बढ़ रही है. भारत में भी ग्लोबल कंपनियों की मांग बढ़ रही है. अब भारत में बैठ कर यूके और यूएस के क्लाइंट्स के लिए काम संभव है. लिहाजा, आने वाले 10 सालों में एसीसीए प्रोफैशनल्स की मांग तेजी से बढ़ने वाली है.

अंतर्राष्ट्रीय पहचान

अगर आप की इच्छा विदेश में काम करने की है, आप को अंग्रेजी और इंटरनैशनल ऐक्सपोजर में रुचि है और आप एसीसीए में कैरियर बनाना चाहते हैं तो एसीसीए कोर्स कर के आप अपने सपनों को पंख दे सकते हैं. लेकिन यदि आप भारत में ही प्रैक्टिस करना चाहते हैं और आप को यहां सरकारी नौकरी चाहिए, साथ ही आप हिंदी मीडियम में अपने को सहज पाते हैं तो आप के लिए सीए का कोर्स करना ज्यादा बेहतर है. यह इसलिए भी क्योंकि एसीसीए का पूरा कोर्स इंग्लिश में है.

भारत में अकसर कैरियर का चुनाव भीड़ देख कर किया जाता है. सीए, एमबीए जैसे विकल्प सुरक्षित माने जाते हैं. लेकिन बदलती दुनिया में वही आगे बढ़ेगा जो ग्लोबल स्किल्स ले कर आएगा. एसीसीए ऐसा ही कोर्स है जो सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पहचान भी देता है. यह कहना गलत नहीं होगा कि जहां सीए आप को भारत में स्थापित करता है, वहीं एसीसीए आप को दुनिया में पहचान दिला सकता है.