Parenting Tips : आज  के समय में सिर्फ स्कूली पढ़ाई कर के बच्चा स्मार्ट नहीं बन सकता बल्कि यह जरूरी है कि पढ़ाई के साथ बच्चा क्रिएटिव भी हो, तभी उस का आत्मविश्वास और पर्सनैलिटी दोनों मजबूत होते हैं. आइए, जानें कैसे अपने बच्चे को क्रिएटिव बनाएं :

स्क्रीन टाइम कम और ऐक्टिव टाइम ज्यादा

आजकल बच्चे मोबाइल, टीवी और टैबलेट में वीडियो देखने या गेम खेलने में इतने बिजी रहते हैं कि उन के दिमाग को खुल कर सोचने का समय नहीं मिलता और वे दूसरी तरफ अपना ध्यान भी नहीं लगाते हैं. ऐसे में बच्चे के लिए स्क्रीन टाइम को सीमित करें. रोज कम से कम 1 से 2 घंटे स्क्रीन फ्री टाइम तय करें. इस के अलावा बाकी समय को पढ़ाई के साथ ही पेंटिंग, डांस, म्यूजिक पढ़ाई, गार्डनिंग या आउटडोर गेम्स में लगाएं. इस से बच्चे को नई चीजें सीखने का मौका मिलेगा और उन के क्रिएटिव लैवल बढ़ेगा.

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क्रिएटिव टूल्स दें

छोटे बच्चों को खिलौनों से खेलना काफी पसंद होता है. ऐसे में उन्हें आप क्रिएटिव खिलौने ला कर दे सकते हैं. लेगो या बिल्डिंग ब्लौक्स, मिट्टी, क्ले या प्ले-डो, पैंट, रंग, ब्रश, क्राफ्ट पेपर, पजल और बोर्ड गेम्स जैसे गेम्स आप बच्चे को दे सकते हैं. इस से बच्चे को कुछ नया सीखने का मौका मिलेगा, साथ ही जब वह इस तरह से गेम्स से कुछ बनाएगा या फिर पजल को सौल्व करेगा, तो इस से उस के क्रिएटिव लैवल का विकास होगा.

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ग्रीटिंग कार्ड बनाने के लिए प्रेरित करें

अब यह मत कहिएगा कि ग्रीटिंग कार्ड आज के जमाने में कौन बनता है? इस के लिए जमाने की नहीं बल्कि फीलिंग्स की जरूरत होती है. आप भूल गए अपना समय जब दोस्तों के दिए कार्ड का एक अलग डब्बा आप ने बनाया हुआ था और सालों बाद भी उन्हें देख कर होंठों पर मुसकान आ जाती थी तो ऐसे मुसकराने का मौका अपने बच्चे को भी दें.

इस से न केवल उस का आर्टवर्क और कलर कौंबिनेशन बेहतर होगा बल्कि वह अपनी भावनाओं को ड्राइंग और शब्दों के जरीए व्यक्त करना भी सीखेगा. बच्चे से कहें कि अगर वह चाहे तो कार्ड पर उस रिश्ते से जुड़ा कोई यादगार सीन या प्यारी सी मैमोरी भी ड्रा कर सकती है या कोई कविता भी लिख कर दे सकता है.

साथ में ड्राइंग बनाने का दिन तय करें

वैसे तो स्कूल में भी बच्चे ड्राइंग बनाते हैं लेकिन जब वे आप के साथ ड्राइंग बनाएंगे तो उस का आनंद अलग ही होगा. आप को भी अपने पुराने दिन याद आ जाएंगे.

अगर बच्चे को दीवार पर ड्राइंग करना पसंद है तो उसे दीवारों पर चित्रकारी करने दीजिए, मत कहिए दीवार की जगह ड्राइंग बुक इस्तेमाल करो बल्कि किसी कमरे की एक दीवार बच्चे के नाम कर दें वह जो करना चाहे उसे करने दें.

आप उस से कह सकती हैं कि कोई सन, रेनबो या फिर कोई फ्रूट भी ड्रा कर सकता है. उसे रंगबिरंगे कलर का इस्तेमाल कैसे करना है यह भी सिखाएं. कलरफुल ऐक्टिविटीज न सिर्फ उसे ऐंटरटेन करेंगी बल्कि उस की क्रिएटिविटी को भी बूस्ट करेंगी.

बच्चों को मिट्टी का घर बनाने दें

कहीं आप भी तो उन पेरैंट्स में से नहीं हैं जो बच्चों की साफसफाई को ले कर कुछ ज्यादा ही पजैसिव हैं. अगर ऐसा है तो यह आदत छोड़ दें और उन्हें खुल कर ऐंजौय करने दें. जब बच्चा नेचर के करीब रहता है और इस तरह की ऐक्टिविटी करता है तो उस की क्रिएटिविटी और इमैजिनेशन विकसित होती है. वह मिट्टी में तरहतरह के घर बनाता है. उसे फील करता है और खेलतेखेलते ही उस का दिमाग अलगअलग चीजें सोचता और बनाता है.

बच्चों को ऐक्टिंग करना भी सिखाएं

कई बार बच्चे जब किसी फैमिली मैंबर की ऐक्टिंग करते हैं तो हमें अच्छा नहीं लगता है और हम उन्हें इन्सल्ट सम?ा कर ऐसा करने से रोक देते हैं लेकिन अगर वे किसी की नकल कर रहे हैं तो यह उन की क्रिएटिविटी है. इस से उन्हें बोलने और झिझक कम करने में मदद मिलती है. उन के साथ मिल कर आप भी डम शिराज जैसे गेम खेल सकते हैं जिन में ऐक्टिंग कर के बौलीवुड फिल्म का नाम भी पता किया जा सकता है. इस से गेम भी हो जाएगा और बच्चे को ऐक्टिंग भी आएगी.

कहानी सुनेंसुनाएं

कहनी से बच्चे की इमैजिनेशन अच्छी होती है. आप रोज का रूटीन बना लें कि बच्चे को कोई कहानी सुनाएंगे और फिर उस से भी सुनाने को कहेंगे. यह रोजमर्रा का कोई किस्सा भी हो सकता है.

बच्चों को कोई कहानी सुनाएं न और उन से पूछें कि इस कहानी में अगर उस हीरो की जगह तुम होते तो क्या करते? इस से बच्चा खुद को उस की जगह रख कर सोचेगा और एक नई कहानी बनाने की कोशिस करेगा. इस तरह बच्चा न केवल कहानी में इंटरैस्ट लेगा बल्कि आउट औफ द बौक्स सोचने और प्रौब्लम सौल्विंग की आदत भी सीखेगा.

बच्चों को कोई छोटी सी तसवीर दिखा कर उन से कहानी बनाने को कहें या कहानी का आधा हिस्सा सुना कर आगे का हिस्सा खुद बनाने दें. इस से उन की सोचने की कैपैसिटी और शब्दों के साथ खेलने की आदत बढ़ेगी. आप चाहें तो इसे फैमिली गेम नाइट में शामिल कर सकते हैं.

लिखने दीजिए जो उस का मन करे

लिखने दीजिए जो मन करे. मत टोकिए कि टौपिक बचकाना है या लव स्टोरी मत लिखो, देशभक्ति अच्छा टौपिक है. टौपिक चाहे कोई भी हो या हैंडराइटिंग कैसी भी हो लेकिन उसे किसी भी बहाने से लिखने की आदत तो होगी. आप उस के साथ किसी टौपिक पर लिखने का गेम भी खेल सकते हैं. उस के दोस्तों के साथ कभीकभी यह कंपीटिशन भी करवा सकते हैं. इस से बच्चा तैयारी भी करेगा और जीतना भी चाहेगा.

आउटडोर नेचर ऐक्टिविटी

बच्चों को क्रिएटिव बनाने के लिए उन्हें पार्क या गार्डन ले जा कर उन्हें पत्ते, फूल, पत्थर आदि इकट्ठा करने दें और उन से कुछ नया बनाने को कहें. नेचर के साथ जुड़ाव से उन की औब्जर्वेशन स्किल और क्रिएटिव आइडियाज दोनों बढ़ते हैं.

बच्चों को सवाल पूछना सिखाएं

बच्चों में रचनात्मक सोच विकसित करने का एक मेन तरीका यह है कि उन्हें हमेशा सवाल करते रहने के लिए प्रेरित करें. जब भी आप उन के साथ समय बिता रहे हों तो उन से सवाल पूछें जैसे आप उन से छोटेछोटे सवाल कर सकते हैं. ऐसे में उन के मन में जिज्ञासा बनेगी और वे नई चीजों के बारे में समझने की कोशिश करेंगे. इस से उन के कल्पनाशील कौशल में वृद्धि होगी और समस्या को सुलझने की क्षमता विकसित होगी.

रसोई में मदद लें. रसोई में मदद लेने से बच्चे नए व्यंजन बनाना सीखते हैं और उन के हाथों में कुछ नया करने का हुनर आता है. इस से उन की रचनात्मकता बढ़ती है क्योंकि वे अलगअलग सामग्री का उपयोग कर के नई चीजें बना सकते हैं.

इस के अलावा रसोई में काम करने से बच्चों में जिम्मेदारी और अनुशासन भी विकसित होता है जो उन के व्यक्तित्व विकास के लिए जरूरी है. इस तरह रसोई भी बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है.

रोल प्ले गेम

बच्चों को अलगअलग किरदार निभाने दें जैसे डाक्टर, टीचर, शेफ या न्यूज रिपोर्टर. इस तरह के रोल प्ले से उन की कम्युनिकेशन स्किल, इमैजिनेशन और कौंफिडैंस में बढ़ोतरी होती है.

मोबाइल से हट कर उन्हें नई किताबें ला कर दे सकते हैं

मातापिता बच्चों को नई बुक्स (स्टोरी बुक्स) दिला सकते हैं, जिस से वे मोबाइल या गैजेट्स से दूर नई दुनिया को ऐक्सप्लोर कर सकते हैं. आप उन्हें कौमिक बुक या फेयरी टेल्स अथवा अन्य कथाओं पर आधारित बुक्स खरीद कर दे सकते हैं. ऐसा करने से उन में नई क्रिएटिविटी आएगी.