Heat Stroke: साल 2026 की तपती गर्मियों ने तापमान के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। देश के अधिकांश हिस्सों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर चुका है, जिसके चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस भीषण गर्मी में हीट स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियां भी एक बड़ी चुनौती बन गई हैं।
बच्चों को हीट स्ट्रोक तब होता है जब लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहते है। यह स्थिति तब घातक हो जाती है जब शरीर का तापमान 103 डिग्री फ़ारेनहाइट से ऊपर चला जाता है। इसके लक्षण शरीर में पानी की कमी, तेज सिरदर्द, चक्कर आना, स्किन गर्म और डिहाइड्रेटेड, और नाड़ी की गति का तेज होना हो सकते हैं।
सरकारी एडवाइजरी के अनुसार, इस संकट से निपटने के लिए सावधानी बरतनी है। दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक के बीच घर से बाहर निकलने से पूरी तरह बचना चाहिए। यह समय दिन का सबसे गर्म हिस्सा होता है और लू भी इसी दौरान सबसे अधिक रहता है। अगर बाहर निकलना जरूरी हो, तो सिर को टोपी या छतरी से ढककर रखें और सूती, हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और किसी भी प्रकार की पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह घातक है, इसलिए उन्हें घर के भीतर ही सुरक्षित रखना चाहिए।

इस मौसम में बच्चों के शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर बनाए रखने के लिए सादा पानी ही काफी नहीं है। इसके बजाय कच्चे आम का पन्ना, सत्तू का शर्बत, नारियल पानी, लस्सी और नींबू पानी का सेवन करना चाहिए। अपने आहार में तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी जैसे अधिक जल-तत्व वाले फलों को शामिल करना चाहिए, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करते हैं। वहीं दूसरी ओर, चाय, कॉफी और ज्यादा चीनी का परहेज करना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, बाहर के खुले और तले-भुने भोजन से भी बचना चाहिए, क्योंकि गर्मी में बासी खाना संक्रमण का कारण बन सकता है।
यदि बच्चों में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो घबराए नही। सबसे पहले पीड़ित को किसी ठंडी और हवादार जगह पर ले जाना चाहिए। उनके शरीर पर ठंडा पानी छिड़कें या गीले कपड़े से बार-बार पोंछें ताकि तापमान को कम किया जा सके। यदि व्यक्ति होश में है, तो उन्हें धीरे-धीरे पानी या ओआरएस का घोल पिलाएं। स्थिति में सुधार न होने पर बिना किसी देरी के उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाएं। बढ़ती गर्मी में अपनी सुरक्षा के साथ-साथ दूसरों की फिक्र करें।
