Epistaxis Problem: गर्मियों के मौसम में या सूखे वातावरण में बच्चों के नाक से अचानक खून निकलना चिंता का कारण बन जाता है। इसको मेडिकल भाषा में Epistaxis कहा जाता है। नाक से खून निकलते देखना डरावना लग सकता है, लेकिन यह कोई गंभीर बीमारी नहीं होती। सही जानकारी और थोड़ी सावधानी से इस प्रॉब्लम को ईजीली संभाला जा सकता है।
नाक के अंदर की सतह बहुत नाजुक होती है, जिसमें छोटी-छोटी रक्त नलिकाएँ होती हैं। जब ये नलिकाएँ फट जाती हैं, तो नाक से खून आने लगता है। बच्चों में इसके प्रमुख कारणों में गर्मी, सूखी हवा, नाक में उंगली डालना, एलर्जी, से होती है
जब बच्चे की नाक से खून आने लगे, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले बच्चे को सीधे बैठाएं और उसका सिर थोड़ा आगे की ओर झुकाएं। इसके बाद नाक के नरम हिस्से को हल्के दबाव से 5 से 10 मिनट तक दबाकर रखें। माथे या नाक पर ठंडी पट्टी रखने से भी खून रुकने में मदद मिलती है। ध्यान रहे कि सिर को पीछे की ओर न झुकाएं, क्योंकि इससे खून अंदर जा सकता है।
नकसीर से बचने के लिए कुछ आदतें अपनाना होती है। बच्चों को नाक में उंगली डालने से रोकें और उनके नाखून छोटे रखें। गर्मियों में उन्हें भरपूर पानी पिलाएं ताकि शरीर में नमी बनी रहे। घर के एनवायरनमेंट में नमी बनाए रखना है—इसके लिए आप कमरे में पानी से भरा बर्तन रख सकते हैं। यदि नाक बहुत सूखी रहती है, तो हल्का सा नारियल तेल या वैसलीन लगाना फायदेमंद हो सकता है।

घर में कुछ जरूरी चीजें हमेशा तैयार रखें ताकि अचानक नकसीर होने पर तुरंत मदद मिल सके। जैसे साफ कपड़ा या टिश्यू, ठंडा पानी या आइस पैक, नारियल तेल और जरूरत पड़ने पर ORS घोल। ये छोटी-छोटी चीजें तुरंत राहत देती हैं।
बच्चों के खान-पान का इस समस्या पर सीधा असर पड़ता है। उन्हें पानी से भरपूर फल जैसे तरबूज, खीरा और संतरा दें। दही और छाछ जैसे ठंडी तासीर वाली चीजें दें। साथ ही, आयरन और विटामिन C से भरपूर चीजें जैसे पालक, अनार और आंवला उनकी सेहत को मजबूत बनाती हैं। बहुत ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और जंक फूड देने से बचें।
यदि नकसीर बार-बार हो रही हो, खून 10–15 मिनट में बंद न हो, या किसी चोट के बाद शुरू हुई हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इसके अलावा अगर बच्चा चक्कर महसूस करे या बहुत कमजोर लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नकसीर बच्चों में एक आम लेकिन संभालने योग्य समस्या है। थोड़ी सी अवेयरनेस, सही देखभाल और खान-पान से इस प्रॉब्लम को रोका जा सकता है।
