kitchen learning for kids : याद है जब बच्चे आप को किचन में गोलगोल रोटियां बनाते देख कितने उत्साहित होते थे और खुद भी रोटियां बनाने की जिद्द करते थे. उन की इस जिद्द को पूरा करने के लिए आप उन्हें आटे का एक छोटा गोला दे देती थीं, जिस से वे गोलगोल रोटियां तो नहीं लेकिन टेढ़ीमेढ़ी ही बना कर खुश हो जाते थे.
तो फिर आज जब वे थोड़े बड़े हो गए हैं तो उन की गोलगोल रोटियां बनाने वाली जिद्द को क्यों न दोहराया जाए और इस बार गोलगोल रोटियां ही नहीं गोल पिज्जा और डोनट भी बनाया जाए.
बच्चों का समर हौलिडे बहुत ही अच्छा समय होता है पेरैंट्स के लिए उन के साथ जुड़ने और उन्हें कुछ क्रिएटिव कामों से जोड़ने का भी. इसलिए इस समय का पूरा लाभ लें और उन्हें कुछ ऐसा सिखाएं जो उन्हें स्क्रीन की स्क्रौलिंग दुनिया से दूर कर असली क्रिएटिव दुनिया से जोड़े. वे कुछ ऐसा सीखें जो सिर्फ हौलिडे फन नहीं बल्कि एक लाइफ स्किल बन जाए जैसे कुकिंग.
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पहले बच्चों की उम्र के अनुसार क्या सिखाना है क्या नहीं उस का चयन करें जैसे:
5 से 8 साल के बच्चों के लिए उन डिशेज का चयन करें जो आसान हैं और जिन में आग यानी गैस का इस्तेमाल न हो जैसेकि सैंडविच, जूस, फ्लेवर रायता, फ्लेवर ड्रिंक्स.
वहीं 8 से 14 साल के बच्चों के साथ मैथ और साइंस को जोड़ कर ऐक्सपैरिमैंटल डिश तैयार
करना जैसे कोई डो तैयार करना. अब यहां हर सामग्री नाप कर डलेगी. आटा, मैदा, पानी सबका एक रेशो होगा. इस तरह यह एक मैथ है. दूसरा है सोडा के कुछ फूड रिएक्शन जो एक तरह से साइंस है, साथ ही इस उम्र में बच्चों की ग्रिप्पिंग अच्छी होती है इसलिए डो गुदना, ब्लैंडिंग काम वे अच्छे से कर पाएंगे और आप उन्हें अब गैस या आग पर जल्दी या आसानी से पकने वाली डिशेज जैसे आमलेट, चाय, इंस्टैंट नूडलपास्ता बनाना भी सिखाना शुरू कर सकते हैं.
14 की उम्र से आप उन्हें धीरेधीरे सभी प्रकार की डिशेज बनाने की कला से जोड़ना शुरू करें.
हां, हम जानते हैं कि बच्चे थोड़े बड़े हो जाएं तो उन्हें किचन, कुकिंग सब एक काम जैसा दिखने लगता है और काम से तो बच्चे दूर भागते हैं, इसलिए बच्चों को कुकिंग से जोड़ने के लिए कुछ इंटरैस्टिंग तरीके अपनाएं:
बच्चों को कुकिंग से जोड़ने के तरीके
बच्चों की पसंदीदा डिश से शुरुआत करें: हर बच्चे को कोई न कोई डिश पसंद होती है. किसी बच्चे को पिज्जा, किसी को परांठा तो किसी को नूडल. तो बस उस की डिश से शुरू करें. उसे बताएं कि आप उस की फैवरिट डिश बनाने जा रहे हैं और चाहते हैं कि वह भी आप का साथ दे. बच्चा अपनी फैवरिट डिश को खाने के लिए आप का साथ जरूर देगा. तो बस आप उसे डिश से जुड़ा कोई भी छोटामोटा काम पकड़ा दें.
जब वह खुद डिश को बनाने में हैल्प करेगा तो उसे अच्छा लगेगा. उसे ऐसा फील होगा जैसे वह डिश वही बना रहा है, साथ ही अपनी डिश बनता देख उस में और उत्साह पैदा होगा और वह अधिक मन से आगे भी उसे बनाने की कोशिश करेगा.
स्वीट टूथ: स्वीट टूथ यानी मीठा खाने की तलब हर किसी की कमजोरी होती है खासकर बच्चों का दिन तो बिना कुछ मीठा खाए जाता ही नहीं. अब चाहें वे कैंडी खाएं, चौकलेट या लड्डू बच्चे मीठे के नाम पर बहुत जल्दी खुश हो जाते हैं और आप की बहुत सी बात मान भी जाते हैं. तो बच्चों को मीठा खिलाने के बहाने से मीठा बनाना सिखाएं. आजकल बच्चे डोनट, कुकीज, पेस्ट्री बहुत पसंद करते हैं तो उन्हीं डिश को बच्चों के साथ बनाएं.
गोल नहीं यूनीक शेप बनाएं: कुकीज हमेशा गोल ही क्यों बने? जब बड़ीबड़ी बेकरी कस्टमर खासकर बच्चों को अट्रैक करने के लिए गोल नहीं बल्कि यूनीक शेप डिजाइन जैसे डायनासोर, स्माइली, स्टार आदि की कुकीज और चौकलेट बनाते हैं तो आप क्यों नहीं. बच्चों के लिए आप भी यूनीक डिजाइन बनाएं ताकि बच्चा और रोमांच से आप के साथ काम करे.
कुछ नया अनसुना ट्राई करें: बच्चों को किसी ऐसी डिश के बारे में बहुत चाव से बताएं जो न उन्होंने कभी सुनी हो और न खाई जैसे कोई लोकल फूड या किसी देश, शहर का कोई कुजिन. इस तरह आप का उत्साह देख कर उन्हें भी उस डिश को जानने के बारे में, खाने के लिए इंटरैस्ट पैदा होगा, जिस से वे आप के साथ उस डिश को बनाने में साथ देना चाहेंगे.
छोटेछोटे चैलेंज रखें: बच्चों के साथ किस की डिश बैस्ट है या टेस्टी है जैसा चैलेंज रखें. आप दोनों कोई एक डिश या अलगअलग डिश सलैक्ट करें और फिर उन्हें बना कर दूसरों यानी घर वालों को जैसे पापा, ग्रैंड पेरैंट्स, बड़े भाईबहन को टेस्ट करा कर जानें कि किस की डिश ज्यादा टेस्टी है और जब घर वाले बच्चों की डिश को ज्यादा पसंद करेंगे तो उन में खुशी के साथसाथ कौन्फिडैंस भी आएगा. इस तरह के छोटेछोटे चैलेंज बच्चों में उत्साह जगाएंगे तो वे कुकिंग में और इंटरैस्ट लेंगे.
इस के अलावा भी बहुत सी बातें है जिन से बच्चे आप के साथ कुकिंग में इनवौल्व हों जैसे बताएं कि आज आप कुछ नया ट्राई कर रही हैं या आप के पास ज्यादा डिश हैं बनाने को इसलिए आप उन का साथ चाहती हैं. बच्चे आप की मदद के लिए आगे आएंगे तो एक तो उन की सम झ बढ़ेगी कि कुकिंग लाइफ में बहुत इंपौर्टैंट हैं, दूसरा उन्हें यह भी पता चलेगा कि आप कितनी मेहनत से खाना बनाती हैं, तीसरा खाने को वेस्ट करने की गलती भी उन्हें सम झ आएगी, साथ ही किचन स्किल्स और हाइजीन से भी वे परिचित होंगे.
यह सब उन की लाइफ में बहुत काम आएगा क्योंकि बहुत से बच्चे जब हायर स्टडी के लिए बाहर जाते हैं ऐसे में उन्हें घर का खाना याद आता है. बहुतों को उस बाहरी जगह का खाना पसंद नही आता और स्वयं कुछ बनाने नहीं आता तो खानेपीने की बहुत परेशानी झेलते हैं.
तो अगर जब बच्चा बचपन से ही कुकिंग जैसी स्किल को सीख ले तो उसे आगे की लाइफ में बहुत आसानी होती है. वह खाना पकाने वालों की मौजूदगी और गैरमौजूदी पर डिपैंडैंट नहीं रहता क्योंकि कुकिंग स्किल उस के अपने पास है.
बच्चों को इसी स्किल से जोड़ने के लिए आज बहुत से स्कूलों में कुकिंग सिखाई जाती है, हौलिडे में छोटीछोटी वर्कशौप रखी जाती हैं. आज बच्चों के लिए कुकिंग, बेकिंग के रैग्युलर, वैकेशन, वीकैंड हर तरह की क्लासेज उपलब्ध हैं, जहां बच्चा और बच्चों के साथ मस्ती करते यह स्किल सीखता है, साथ ही बहुत सी जगह पेरैंट्स और बच्चे दोनों मिल कर एक टीम के रूप इन क्लासेज को लेते हैं.
क्या कहते हैं ऐक्सपर्ट
कुकिंग हाथ का हुनर है जो आप के लिए एक लाइफ स्किल का काम करता है. भले बच्चों का कुकिंग में बहुत इंटरैस्ट न हो लेकिन उन्हें इस की थोड़ीबहुत सम झ तो होनी ही चाहिए क्योंकि आज बच्चे देशविदेश पढ़ने जा रहे हैं और हर जगह आप को अपनी इच्छा और स्वादानुसार भोजन नहीं मिल पाता तो अगर बच्चे को कुकिंग की थोड़ी बहुत स्किल भी होगी तो वे अपने लिए खाना बना सकते, उन्हें यहां दूसरों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी और इस में उन्हें बहुत इंटरैस्ट हो, पकड़ अच्छी हो कल को यह स्किल एक प्रोफैशन भी बन सकती है.
मेरी क्लासेज में बच्चे पूरे फन के साथ कुकिंग सीखते हैं खासकर बेकिंग या मीठा बनाना जैसे ब्राउनी और मिल्कशेक बच्चे सब से ज्यादा सीखते हैं और जब सीखी डिश को वे फैमिली फ्रैंड्स को खिलाते, उन की तारीफ पाते हैं तो बच्चों में बहुत कौन्फिडैंस पैदा होता है, उन की फैमिली बौंडिंग भी मजबूत होती है और कुकिंग से ग्राप्सिंग स्किल्स, मैमोरी स्किल्स पर भी बहुत फर्क पड़ता है. मु झे याद है मेरे पास एक 3 साल की बच्ची सीखने आई थी, जिसे देख मैं हैरान थी कि इतनी छोटी बच्ची कैसे सीखेगी.
वह पूरी क्लास चुप रही लेकिन क्लास के बाद जब उस की मम्मी आईं तो उस ने बड़े उत्साह से उन्हें एकएक स्टैप, एकएक इनग्रीडिएंट बताया. तो देखिए यहां बच्चे ने कितने ध्यान से हर चीज सीखी थी और यह समर वैकेशन टाइम तो बहुत ही अच्छा समय है बच्चों को कुकिंग जैसी स्किल ऐक्टिविटी से जोड़ने का.
