गर्मियों की छुट्टियाँ यानी मौज-मस्ती, नानी का घर और ढेर सारा खेल-कूद। लेकिन अक्सर इन लंबी छुट्टियों में बच्चे मोबाइल और गैजेट्स की दुनिया में खो जाते हैं। ऐसे में अपने बच्चों को ‘मिनी गार्डनर’ बनाए
यह न केवल बच्चों को स्क्रीन से दूर रखेगा, बल्कि उन्हें जीवन के उन बुनियादी मूल्यों से भी जोड़ेगा जो किताबों से नहीं सिखाए जा सकते।

आइए बताते हैं कि कैसे इस गर्मी में आप अपने बच्चों को एक छोटा सा माली बना सकते हैं और इसके जरिए उनका व्यक्तित्व निखार सकते हैं।
आज के दौर में बच्चे प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं। ‘मिनी गार्डनर’ प्रोजेक्ट बड़ा ही महत्व काम है जो आपके बच्चों में सेंसटीवीटी विकसित करता है। जब एक बच्चा अपने हाथों से मिट्टी खोदता है, बीज डालता है और उसे रोज पानी देता है, तो वह एक ‘जीवन’ की जिम्मेदारी लेता है।
आज की ‘इंस्टेंट’ दुनिया में पौधे हमें धैर्य सिखाते हैं। बच्चा सीखता है कि बीज से पौधा बनने में वक्त लगता है और मेहनत का फल धीरे-धीरे मिलता है।

स्कूल में पढ़ाए जाने वाले विषय जैसे ‘अंकुरण’ (Germination) और ‘प्रकाश संश्लेषण’ (Photosynthesis) को वे अपनी आँखों से सामने होते देखते हैं। गार्डनिंग एक बेहतरीन ‘स्ट्रेस बस्टर’ है। मिट्टी के संपर्क में रहने से बच्चों में खुशी के हार्मोन बढ़ते हैं और वे शांत महसूस करते हैं। गर्मियों के मौसम में वही पौधे लगाने चाहिए जो तेज धूप को सहन कर सकें। बच्चों के लिए ऐसे पौधों का चुनाव करना बेहतर होता है जो जल्दी उगते हैं, ताकि उनका उत्साह बना रहे।
सजावटी फूल:
यह सबसे आसानी से उगने वाला फूल है। इसके सूखे फूलों के बीजों से भी नए पौधे उगाए जा सकते हैं।
बच्चों को इसकी बढ़ती ऊंचाई और सूरज की तरफ मुड़ना बहुत रोमांचित करता है।
इसे बहुत कम पानी और देखभाल की जरूरत होती है, और यह रंग-बिरंगे फूलों से भर जाता है।
जैसा कि नाम से पता चलता है, यह हर मौसम में टिकने वाला मजबूत पौधा है।
इनके बीज थोड़े बड़े होते हैं, जिन्हें बच्चों के छोटे हाथों के लिए पकड़ना और बोना आसान होता है।
रसोई में आने वाले पुदीने की डंडियों से इसे उगाना सिखाएं। इसकी खुशबू बच्चों को बहुत पसंद आती है।
मेथी या सरसों के बीज गमले में छिड़क दें, 7 दिनों में छोटी-छोटी पत्तियां आ जाती हैं, जिन्हें बच्चे सलाद के रूप में खा भी सकते हैं।
बच्चों को गार्डनिंग सिखाते समय माता-पिता को एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक साथी की भूमिका निभानी चाहिए। बच्चों को खुद मिट्टी, रेत और खाद मिलाने दें। उन्हें बताएं कि पौधे को बढ़ने के लिए अच्छी ‘खुराक’ की जरूरत होती है। अक्सर बच्चे उत्साह में ज्यादा पानी डाल देते हैं। उन्हें सिखाएं कि गमले की मिट्टी को छूकर देखें, अगर वह गीली है तो पानी न डालें। यह उन्हें निर्णय लेना सिखाता है।
पौधों के आसपास उगने वाली बेकार घास को हटाना सिखाएं। उन्हें बताएं कि ये घास असली पौधे का खाना चोरी कर लेती है।
अगर पौधे में कीड़े लगें, तो उन्हें रसायनों के बजाय घरेलू नुस्खे जैसे नीम का तेल या साबुन के पानी का स्प्रे करना सिखाएं। यह उन्हें पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाता है। जब स्कूल खुले, तो बच्चा अपने साथ केवल यादें नहीं, बल्कि एक पूरा प्रोजेक्ट लेकर जाए।
एक ‘नर्सरी प्रोजेक्ट’ फाइल तैयार करने के लिए ये कदम उठाएं:
एक टेबल बनाएं जिसमें बीज बोने की तारीख, पहली पत्ती आने की तारीख और पहले फूल की तारीख दर्ज हो। दो गमले लगाएं—एक को धूप में रखें और एक को अंधेरे में। बच्चा खुद देखेगा कि धूप के बिना पौधा कैसे कमजोर हो जाता है। इसे ‘मेरा प्रयोग’ नाम दें। बच्चे की पौधे के साथ हर हफ्ते की फोटो लगाएं। यह उसके और पौधे के एक साथ बढ़ने की कहानी कहेगा। जो पत्तियां अपने आप गिर जाएं, उन्हें सुखाकर फाइल में चिपकाएं और उनके वैज्ञानिक या सामान्य नाम लिखें।
बच्चा अपने शब्दों में लिखे कि उसे पौधे की देखभाल करके कैसा लगा।
‘मिनी गार्डनर’ प्रोजेक्ट केवल स्कूल बंद होने तक की गतिविधि नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के साथ एक उम्र भर का रिश्ता बनाने की शुरुआत है। जब बच्चा अपने उगाए हुए पुदीने की चटनी खाता है या अपनी लगाई हुई भिंडी की सब्जी देखता है, तो उसे ‘मेहनत के फल’ का असली स्वाद समझ आता है।
तो इस गर्मी, अपने बच्चों को लैपटॉप और टीवी से हटाकर मिट्टी के पास ले जाएं। यकीन मानिए, स्कूल खुलने तक आपका बच्चा न केवल एक अच्छा माली बन चुका होगा, बल्कि वह जीवन के प्रति अधिक जिम्मेदार और संवेदनशील भी नजर आएगा। यह छोटा सा बगीचा उसके व्यक्तित्व के विकास में सबसे बड़ी खाद साबित होगा।
