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पूर्व कथा

बदहवास अमिता ट्रेन की जनरल बोगी में चढ़ कर घबरा जाती है. शरीफ टिकट चैकर उसे फर्स्ट क्लास में जगह दिलवा देता है. वहां वह पुरानी बातें याद करती है.

उस के मातापिता का तलाक हो चुका होता है. उस की मां ने दूसरी शादी कर के अलग घर बसा लिया था और वह पिता की कस्टडी में रह कर होस्टल में पलीबढ़ी. एक दिन पापा को सरप्राइज देने वह घर पहुंची तो यह देख कर हैरान रह गई कि उन्होंने भी दूसरी शादी कर ली है. वहां से वह अपनी मां के घर कानपुर चली आती है.

मां का पति सतीश बेहद बदतमीज और गैरसलीकेदार आदमी था. उन के 2 बेटे भी थे जो बिलकुल सतीश पर ही गए थे. मां के घर में अमिता ने देखा कि वह अपने पति का रोब और धौंस चुपचाप सहती है. एक रात गलती से अमिता के कमरे का दरवाजा खुला रह गया तो सतीश उस के कमरे में घुस आया लेकिन ब्लैक बेल्ट अमिता ने उसे धूल चटा दी. मां भी बेबस खड़ी देखती रहीं. उसे मां से भी घृणा हो गई. उन से सारे रिश्ते तोड़ वह बदहवास स्टेशन की ओर भाग ली.

अब आगे...

बुजुर्ग दंपती दोनों से ध्यान हटा तो अमिता के मन में अपनी चिंता ने घर कर लिया. ‘टाटानगर’, हां यहीं तक का टिकट है. उसे वहीं तक जाना पड़ेगा. पर रेलगाड़ी के डब्बे से स्टेशन पर लिखा नाम ही उस ने देखा है बाकी शहर से वह एकदम अनजान है. असल में इधर के जंगलों में 2 बार कैंप लगा था इसलिए वह स्टेशन का नाम जानती है. वहां के स्टेशन पर उतर कर वह कहां जाएगी, क्या करेगी, कुछ पता नहीं. अकेली लड़की हो कर होटल में रहे यह उचित नहीं और इतने पैसे भी नहीं कि महीना भर होटल में रह सके.

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