जीवनसाथी के अचानक चले जाने का गम तो हरेक को होता है और कोविड-19 के कारण लाखों मौतों ने एकदम बहुतों को बिना साथी के समझौते करने पर मजबूर कर दिया है पर उस औरत की त्रासदी का तो कोई अंत ही नहीं है, जिस के पति का पता ही नहीं कि वह मौत के आगोश में गया तो कब और कहां. दिल्ली की एक औरत महिला आयोग के दरवाजे खटखटा रही है कि दिल्ली पुलिस और अस्पताल बता तो दें कि उस के पति की कब कहां मृत्यु हुई या वह कहीं आज भी जिंदा है.

अप्रैल में पुलिस के अनुसार उस के पति को सड़क के किनारे कहीं बेहोश पड़ा पाया गया था और एक अस्पताल में भरती करा दिया गया था. वहां से उसे दूसरे अस्पताल भेजा गया जहां कोई रिकौर्ड नहीं है और अब पत्नी को नहीं मालूम कि उन का क्या हुआ. खुद कैंसर की मरीज पत्नी पति की मृत्यु का प्रमाणपत्र पाने के लिए भटक रही है.

जीवनसाथी के चले जाने के बाद भी उस के हिसाबकिताब करने के लिए बहुत से प्रमाणों की जरूरत होती है. मृत्यु प्रमाणपत्र इस देश में बहुत जरूरी है. उस के बिना तो विरासत का कानून चालू ही नहीं हो सकता. धर्मभीरुओं को लगता है कि वे अगर सारे पाखंड वाले रीतिरिवाज नहीं करेंगे तो मृतक को स्वर्ग नहीं मिलेगा और आत्मा भटकती रहेगी. बहुत मामलों में घर वाले जब तक मृतक का शव न देख लें, यह स्वीकार करने को तैयार ही नहीं होते कि मौत हो चुकी है.

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