Ear Piercing Care : आजकल कान छिदवाना (ear piercing) केवल पारंपरिक परंपरा नहीं, बल्कि एक बड़ा फैशन ट्रेंड बन गया है, जिसमें लोब से लेकर कार्टिलेज तक कई तरह की पियर्सिंग लोकप्रिय हैं. वर्ष 2026 में मल्टीपल पियर्सिंग (एक साथ कई छेद), ईयर कफ्स और मिसमैच ईयररिंग्स का चलन है, जो स्टाइलिश और बोल्ड लुक देते हैं.

इस बारें में मुंबई की कृष्णा टैटू स्टूडियो की ईयर पियर्सिंग करने वाले गावस्कर कहते हैं कि इसे हर उम्र में छोटे बच्चे से लेकर बड़े सभी करवाते है. पेरेंट्स अपने छोटेछोटे बच्चों को लेकर आते हैं, जिसमें एक साल के अंदर से लेकर बड़े होते है. पहले ईयर पियरसिंग केवल ईयर लोब तक ही सीमित था, समय के साथ फैशन में बदलाव आया है, इसमें अब काफी सारे प्रयोग किए जा रहे हैं. अब लोग कान के कई हिस्सों में पियरसिंग करवा रहे हैं. इसमें अधिकतर जेनजी काफी उत्सुक होते है, जो उन्हे एग्रेसिव और बोल्ड लुक देती है. पियरसिंग के लिए ज्वेलरी के कई सारे ऑप्शन आजकल बाजार में मौजूद है. ईयर पियरसिंग कई प्रकार की होती है,

Piercing

  • बहुत छोटे बच्चों को स्टैपल वाली ईयर पियरसिंग की जाती है, ताकि कानों को हर्ट न हो, इसमें एक किट आता है, जिसमें एक छोटा स स्टड होता है, जिसे कान में स्टैपल कर दिया जाता है.
  • गन शॉट जो ऐडल्ट के लिए किया जाता है, ये कई बार एडल्ट को सूट नहीं करता, क्योंकि पस होने का चांस रहता है.
  • नीडल पियर्सिंग जिसे अधिकतर किया जाता है, जो सबसे सेफ और हाइजिन रहता है,

इसके आगे गावस्कर कहते है कि सही मार्किंग के लिए पहले डॉट लगा लिया जाता है, ताकि सही जगह पर पियरसिंग हो. आजकल लड़के और लड़कियां सभी पियरसिंग करवाते है, जिसमें लड़के केवल इयर लोब पर ही अधिकतर पियर्सिंग करवाते है, जबकि लड़कियां पूरे कान पर पियरसिंग करवाती है.

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एक्सपर्ट और हाइजीन का रखें ध्यान

महाराष्ट्र में बुगड़ी पहनने का रिवाज है, जिसमें जेनजी को इसे पहनने का काफी क्रेज है, लड़कियों के साथ लड़के भी इसे पहनते है, इसे निडल पियर्सिंग से ही किया जाता है.

एक कान में अपर लोब, स्टेक्ड लोब, फॉर्वर्ड हेलिक्स, कोंच पियरसिंग, डैथ पियर्सिंग आदि कई स्थान पर इसे किया जाता है. लोब में पियर्सिंग करना मुश्किल नहीं होता, लेकिन कान के अपर पार्ट में हड्डियाँ होने की वजह से पियर्सिंग करना आसान नहीं होता, उसे सही तरह से करना पड़ता है, ताकि कोई नस या कान की हड्डी प्रभावित न हो. इसलिए उसका मूल्य भी अधिक होता है. लोब और बुगड़ी के लिए लोग पियरसिंग करवाना अधिक पसंद करते है.

इस काम में किसी एक्सपर्ट का सहारा लेना चाहिए, जो तकरीबन 4 से 5 साल इस क्षेत्र में काम कर चुका हो, ताकि उसे इस काम की पूरी जानकारी हो. इसमें सही प्रेशर और तकनीक की जानकारी, हायजिन आदि को बनाए रखने की जरूरत होती है, ताकि पियरसिंग के बाद किसी प्रकार की समस्या न हो. अधितर लोग गन शॉट को सही पियर्सिंग मानते है, क्योंकि दर्द और खर्चा कम होता है, लेकिन बाद में समस्या अधिक होती है.

पियर्सिंग के समय और बाद की सावधानियां

  • पियर्सिंग के बाद सबसे पहले सेनीटाईजेशन पर खास ध्यान देना जरूरी होता है. क्वालिटी नीडल, ग्लौब्स, टिशू आदि कई चीजों की जरूरत यहां होती है.
  • हर क्लाइंट के बाद उस स्थान को सेनीटाइज करते रहना चाहिए, ग्लौब्स और नीडल हर बार बदलते रहना चाहिए.
  • लोब को करवाने के बाद एक से दो हफ्ते बाद वह ठीक हो जाता है, जबकि कान के ऊपर वाले हिस्से में पियर्सिंग करवाने पर एक से दो महीने का समय लगता है. सही हाथ से पियर्सिंग न करवाने पर पस और किलोइड होने की संभावना होती है.
  • पियरसिंग के बाद गुनगुने नमक पानी से साफ करने और किसी एंटीबायोटिक क्रीम लगाने की सलाह दी जाती है, ताकि किसी प्रकार की जर्म्स वहाँ विकसित न हो. कान में लगाए स्टड को बिना निकाले, इसे दिन में दो बार करना पड़ता है. इससे हीलिंग जल्दी हो जाता है.
  • एलर्जी, सेंसेटिव स्किन वाले, हेवी इयररिंगस न पहन सकने वाले आदि को अधिक पियरसिंग नहीं करवाना चाहिए. इसके अलावा उन्हे कभी भी सड़क से खरीदकर इयररिंग्स नहीं पहनने चाहिए, क्योंकि उसकी क्वालिटी अच्छी नहीं होती और रिएक्शन हो सकते है.
  • स्टैन्लस स्टील्स या टिटेनियम के स्टड को पहनना काफी अच्छा होता है. इसके अलावा गोल्ड के इयररिंगस सही होता है.

ईयर पियर्सिंग का खर्चा

ईयर पियर्सिंग (कान छिदवाने) का खर्च आमतौर पर 350 से 1,000 प्रति कान के बीच शुरू होता है. यह कीमत पियर्सिंग के प्रकार (लोब या कार्टिलेज), इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक (गन या सुई) और क्लीनिक या स्टूडियो की प्रतिष्ठा के आधार पर भिन्न हो सकती है

ईयर पियरसिंग और ज्वेलरी

ये सही है कि ईयर पियर्सिंग का क्रेज आजकल के नई जेनरेशन में काफी है और हर कोई इसे करवाना पसंद करता है, लेकिन इसमें इस बात का ध्यान भी रखना पड़ता है कि कान के कौन से हिस्से में कौन सी ज्वेलरी सही होती है, आइए जाने,

  1. कान के लोब में स्टड, हूप या डैंगल्स चुन सकते हैं,
  2. अपर लोब, लोब से थोड़ा ऊपर पियरसिंग किया जाता है. इस हिस्से के लिए स्टड, छोटे हूप और लटकती हुई बालियां ले सकते हैं,
  3. स्टेक्ड लोब में कान के निचले हिस्से में कई सारी पियरसिंग की जाती है. इस तरह की पियरसिंग में छोटे आकार के स्टड ही बेहतर लुक देते हैं.
  4. हेलिक्स को कान के सबसे ऊपरी हिस्से में कार्टिलेज में होता है, जो कि बाहर की तरफ उभरा रहता है. इसके लिए छोटे हूप या सपाट बैक वाले स्टड बेहतर ऑप्शन हैं.
  5. फॉर्वर्ड हेलिक्स में कान के ऊपरी हिस्से में सामने की ओर की जाने वाली पियरसिंग है. यह हिस्सा चेहरे के काफी पास होता है. इसके लिए बेहद छोटे हूप्स ज्यादा सुंदर लुक देंगे.
  6. कोंच पियरसिंग में कान के कार्टिलेज का अंदरूनी हिस्सा है, जोकि शंख के आकार का नजर आता है. इस हिस्से के लिए छोटे स्टड या ऐसे हूप चाहिए जोकि कान के बाहर तक चला जाएं.
  7. डैथ पियर्सिंग कान के कार्टिलेज का मोटा वाला हिस्सा है, जोकि हेलिक्स के नीचे की तरफ होता है. इसे करवाने में दर्द ज्यादा होता है, लेकिन ये अच्छे दिखते हैं. इसमें क्लिक वाले हूप ज्यादा खूबसूरत नजर आते हैं.

इस प्रकार ईयर पियर्सिंग के बढ़ते ट्रेंड ने आज के यूथ को काफी प्रभावित किया है, जिससे वे इसे करवाने में आगे आ रहे हैं, लेकिन इसे करवाने में एक्सपर्ट और सही तकनीक का होना बहुत आवश्यक है, ताकि इसे करवाने के बाद आप अपने मन मुताबिक खूबसूरती पाकर भीड़ में सबसे अलग दिखे.

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