स्वर कोकिला कहलाने वाली गायिका लता मंगेशकर ने अपनी आवाज में जितने भी गाने गाए हैं,वह न सिर्फ लोगों के दिल तक पहुंचे बल्कि इतने यादगार साबित हुए कि आज की पीढ़ी भी लता मंगेशकर के पुराने गाये गानों को सिर्फ याद ही नहीं करती बल्कि आज की पीढ़ी की फेवरेट लिस्ट में लता मंगेशकर के कई गाने शामिल है. जैसे लग जा गले से फिर ये हंसी रात हो ना हो शायद फिर इस जनम में .. अजीब दास्तां है यह, प्यार किया तो डरना क्या आदि.

लेकिन इन सभी गानों में एक गाना ऐसा है जिसने कई निराश लोगों को मौत के करीब जाने से रोक लिया , यह गाना ऐसे लोगों पर फिट बैठता है जो अपनी जिंदगी में पूरी तरह निराश हो चुके हैं और मौत के करीब पहुंचने के लिए आत्महत्या तक करने को तैयार थे, लेकिन लता मंगेशकर के इस गाने ने निराशा और दुखी लोगों को जिंदगी की नई दिशा दिखाई, और दुखों से लड़कर जिंदगी से समझौता करके जीने की कला सिखाई. कल्याण जी आनंद जी के संगीतबद्ध और गीतकार इंदिवर द्वारा लिखे बोल और लता मंगेशकर की आवाज में गाया यह गाना अभिनेत्री नूतन पर फिल्माया गया था, जिसे सुनने और देखने के बाद कई लोगों ने आत्महत्या करने का ख्याल उस दौरान दिल से निकाल दिया.

1968 में बनी हिंदी फिल्म सरस्वती चंद का ये चमत्कारी गाना जो कि लता मंगेशकर की आवाज में है इस गाने के बोल है , छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए ,यह मुनासिब नहीं आदमी के लिए, प्यार से भी जरूरी कई काम है, प्यार सब कुछ नहीं जिंदगी के लिए. इस साधारण से गाने की सादगी से भरे बोल ने लोगों के दिलों पर इतना राज किया , कि आज भी यह गाना लोकप्रिय गानों की श्रेणी में आता है, और लोगों को शिक्षा भी देता है . खास तौर पर ऐसे लोगों को जो मैं धोखा खाने के बाद अपने आप को खत्म करने की तैयारी में जुड़ जाते हैं.

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