Hill Station Travel : आजकल आलम यह है कि एक तरफ दिल्ली-एनसीआर की 45 डिग्री झुलसाती गर्मी ने जीना मुहाल किया है तो वहीं दूसरी तरफ शिमला की 20 डिग्री वाली ठंडी हवा आने का न्योता दे रही नजर आती है। लोग शुक्रवार शाम ऑफिस से निकल कर बच्चों को गाड़ी में बैठते हैं और ‘चलो पहाड़ चलें’ कहकर निकल पड़ते हैं। पर पहाड़ पहुँचते पहुँचते खुशनुमा जिंदगी का वह सपना टूट जाता है. NH-5 पर कंडाघाट से वाकनाघाट तक लाल-पीली ब्रेक लाइटों की माला दूर दूर तक नजर आती है, मिनटों का रास्ता 4 -6 घंटे में तय होता है. AC चलाओ तो पेट्रोल का मीटर चलता है, बंद करो तो बच्चे का पसीना. उधर सासु माँ की नज़रें घूरते हुए कहती हैं ‘कहा था ना जून में मत चलो’. यह सिर्फ ट्रैफिक जाम नहीं है। ये हम शहरी लोगों की ‘इंस्टेंट राहत’ वाली आदत का ट्रैफिक जाम है.
ध्यान रखें ;
‘वीकेंड वाला प्यार’ पहाड़ों को भारी पड़ रहा है
आजकल हर कामकाजी शख्स शुक्रवार रात निकलता है और रविवार दोपहर वापसी करता है. यानी 5 लाख गाड़ियाँ एक ही सड़क पर एक समय आ जाती है. इसलिए हो सके तो ‘लॉन्ग वीकेंड’ को ‘मिड-वीक ब्रेक’ बनाएं। मंगल-बुध निकलें और शुक्रवार लौटे। होटल सस्ता, सड़क खाली और फोटो में भीड़ की जगह सिर्फ वादियाँ। एक दिन एक्स्ट्रा लीजिए और 8 घंटे जाम से बचें.
एक जाम किट तैयार रखें
धूप में रेंगती गाड़ी में सबसे पहले हिम्मत टूटती है माँ की। बच्चा भूख से रोए, पति चिड़चिड़ाएँ और आप बीच में सैंडविच बनी रहे. इस से बेहतर है सब इंतजाम कर के चलिए.
आप के जाम किट में क्या हो
– पानी: 1 इंसान के लिए 2 लीटर और 4 लोगों के लिए 8 लीटर। कोल्ड ड्रिंक नहीं केवल सादा पानी या फ्रूट जूस।
– खाना: मठरी, भुने चने, केले, मुरमुरे वगैरह।
– दवा: उल्टी, बुखार, BP, मोशन सिकनेस की .साथ में ORS के 5 पैकेट।
– मनोरंजन: शतरंज, लूडो, पुराने फिल्मी गाने की पेनड्राइव।
– सामान: 1 चादर, टॉयलेट पेपर, 4-5 पॉलीथिन, हैंड सैनिटाइजर वगैरह क्योंकि पहाड़ पर हर जगह वॉशरूम नहीं मिलता।
टूरिस्ट नहीं, मेहमान बनकर जाएं
8 किमी लंबे जाम में फंसकर हम कोसते हैं – “प्रशासन क्या कर रहा है?”। कभी सोचा है हम ने क्या किया है?
– कचरा गाड़ी से बाहर मत फेंकें। पहाड़ का ‘डस्टबिन’ नहीं होता।
– लोकल ढाबे पर खाओ। 50 रु की राजमा-चावल में जो स्वाद है वो 500 रु के कैफे में नहीं।
– जाम में फंसे तो झगड़ें मत। बगल वाली गाड़ी से बात करो – “दीदी, बच्चे के लिए एक्स्ट्रा बिस्किट है क्या?”
पहाड़ पर इंसानियत ही सबसे बड़ा टूरिस्ट स्पॉट है
गूगल मैप के भरोसे मत बैठें
NH-5 जाम है तो गूगल मैप ‘कच्चा रास्ता’ दिखा देगा। पर पहाड़ का कच्चा रास्ता मैदान जैसा नहीं होता. खड़ी चढ़ाई, लैंडस्लाइड जोन वगैरह का खतरा होता है. ऐसे में होटल वाले, टैक्सी यूनियन या लोकल ढाबे वाले से पूछो कि भाई, जाम से बचने का सेफ रास्ता कौन सा है? उन के बताए रास्ते पर आगे बढ़ें और जाम से बचें.
इमरजेंसी नंबर मोबाइल में सेव करें ,
– पुलिस: 112
– एंबुलेंस: 108
– HP ट्रैफिक हेल्पलाइन: 0177-2629893
– Disaster: 1070
