Martial arts for kids : समर  वैकेशन बच्चों के लिए बहुत ही अच्छा समय होता है कुछ नया करने का, कुछ अलग सीखने का. पेंटिंग, डांसिंग, सिंगिंग तो हर बच्चा वैकेशन में करता ही है लेकिन क्या कुछ इन से अलग हट कर उन्हें नहीं सीखना और करना चाहिए? कुछ ऐसा जो लाइफ स्किल के साथसाथ लाइफ गोल या अचीवमैंट भी बन जाए, जो खेल तो हो ही लेकिन साथ में ऐसा खेल भी जो बच्चों के लिए आत्मविश्वास, निडरता, साहस और आत्मरक्षा की भी एक स्किल हो और बच्चे अगर इस में अधिक रुचि दिखा दें तो यह खेल उन्हें भविष्य बनाने के कई सुनहरे मौके दे जाए.

यहां हम बात कर रहे हैं मार्शल आर्ट्स की, जो 5 साल की उम्र से सीखा जा सकता है. इस में कई खेलों को शामिल किया जाता है. उन्हीं खेलों में कुछ आप के सामने हैं:

जूडोकराटे: आज सैल्फ डिफैंस की बात हरकोई कर रहा है और जैसा आजकल का माहौल है यह खेल एक लाइफ सेविंग स्किल भी है. इसलिए बच्चों के लिए जूडोकराटे की क्लासेज देना बहुत ही अच्छा विकल्प है. इस खेल का अनुशासन, खतरे को भापने की कला, शक्ति का सही प्रयोग बच्चों में आत्मविश्वास तो लाता ही है साथ में उन्हें अनुशासित और आत्मरक्षक भी बनाता है.

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फैंसिंग: फैंसिंग यानी तलवारबाजी पुराने समय में यह सिर्फ खेल नहीं बल्कि बहुत बड़ी कला और रक्षा करने का सब से बड़ा तरीका था. और आज भी फैंसिंग एक अंतर्राष्ट्रीय खेल है और बहुत देशों में बच्चे फैंसिंग सीख कर भविष्य में बहुत नाम, बहुत मैडल्स जीत रहे हैं और इस साल 2026 में एशियन सीनियर फैंसिंग चैंपियनशिप की मेजबानी भारत ही कर रहा है.

आर्चरी: आर्चरी बहुत ही प्रतिष्ठित खेल है. भारत के कई खिलाडि़यों ने दुनियाभर में आर्चरी के क्षेत्र में बहुत नाम कमाये और मैडल्स जीते हैं जैसे दीपिका कुमारी, शीतल देवी, अभिषेक वर्मा. आर्चरी में कई तरह के प्रकार भी है जैसे टारगेट आर्चरी, 3ष्ठ आर्चरी, इंडोर आर्चरी और आउटडोर आर्चरी. तो आप बच्चों को क्यों न आर्चरी सिखाएं, देखिए उसे किस तरह की आर्चरी पसंद आती है. क्या पता कल वह भी इंडिया के लिए ओलिंपिक मैडल ले लाए.

बौक्सिंग: बौक्सिंग खेल इंडिया में तब बहुत चर्चा में आया जब मैरी कोम ने 2002 में वर्ल्ड चैंपियनशिप की पहली भारतीय महिला विजेता बनी. कई खिलाडि़यों का इस से हौसला बढ़ा और वे भी इस खेल में आगे आए.

साथ ही बौक्सिंग में एक और खासीयत है कि अकसर जब बच्चे में एंगर इशू होते हैं तो प्रोफैशनल काउंसलर आप को पंचिंग बैग घर लाने को कहते हैं और बच्चे को उस पर पूरा ध्यान लगा प्रैक्टिस करने की सलाह देते हैं. इस तरह वे बच्चे का गुस्सा एक खेल के जरीए दूर करते हैं.

मार्शल आर्ट बच्चों के लिए शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक लाभों का एक संपूर्ण मिश्रण प्रदान करता है. कराटे, ताइक्वांडो, जूडो, आर्चरी, फैंसिंग आदि कलाएं बच्चों में शक्ति, समन्वय और लचीलापन बढ़ाती हैं. फिटनैस के अलावा, यह फोकस, लाइफ डिसिप्लिन, सैल्फ डिसिप्लिन, सैल्फरिस्पैक्ट को बढ़ाती हैं, साथ ही बच्चों में किसी विवाद का अनुशासित रूप से समाधान निकालने का महत्त्वपूर्ण लाइफ स्किल भी देती हैं. इसलिए इस समर वैकेशन को यों ही जाया न जाने दें.

हां, लेकिन हर बच्चे को मार्शल आर्ट्स में इंटरैस्ट तो नहीं होता. तो उन बच्चों के लिए 2 ऐसी ऐक्टिविटीज जो मजे के साथ स्पोर्ट्स भी है.

स्कैटिंग: स्कैटिंग बहुत मजेदार खेल है. जब पैर में पहिए लग जाएं, बच्चे हवा से बातें करने लगें तो भला बच्चे स्क्रीन की ओर नहीं स्कैट फील्ड की ओर दौड़ेंगे. बच्चों को स्कैटिंग में बहुत मजा आता है. स्कैटिंग जितनी कम उम्र से सीखी जाए उतनी अच्छी क्योंकि बच्चे बचपन में बैलेंस बनाना बहुत जल्दी सीखते हैं और एक बार बच्चा बैलेंस का महत्त्व सम?ा जाए तो यह जीवनभर की सीख बन जाती है.

स्विमिंग: स्विमिंग तो मानों हर बच्चे को पसंद है. बच्चे फैमिली वैकेशन का सालभर इंतजार करते हैं कि अब वे किसी होटल जाएं या वाटर पार्क जाएं और वहां स्विमिंग पूल में बैठ कर छपछप करें. तो क्यों न इस बार बच्चों को छपछप नहीं बल्कि स्विमिंग करने का मौका दिया जाए. उन्हें स्विमिंग सिखाई जाए जो सिर्फ पानी में ऐंजौय करना नहीं बल्कि एक स्किल भी है और एक स्पोर्ट्स भी.

इन सब ऐक्टिविटीज में बच्चों के साथ थोड़ी आप की मेहनत भी लगेगी. मेहनत उन्हें क्लास तक ले जाने और लाने की ही नहीं है वरन शुरुआती कुछ दिन वहां उन के साथ रहने की भी है क्योंकि ये सारे खेल या ऐक्टिविटीज मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की मेहतन मांगती हैं.

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