Self Grooming : छोटे शहर से पढ़ने आई रीना को मुंबई की ऊंचीऊंची इमारतें, रास्ते, लोगों के रहनसहन बहुत पसंद आने लगे. उस ने निश्चय किया कि वह यहीं रहेगी और अपने परिवार को भी यह बात बता दी. पहले तो परिवार वाले नाराज हुए लेकिन रीना अपनी पढ़ाई पूरी कर मुंबई में नौकरी कर ली और एक छोटे से कमरे में 2 लड़कियों के साथ रहने लगी. वहां रीना ने महसूस किया कि उसे मुंबई में रहने के लिए खुद की ग्रूमिंग जरूरी है. उस ने ग्रूमिंग क्लास जौइन किया और 1 साल बाद खुद में काफी परिवर्तन पाने लगी.
अब उसे किसी नए परिवेश में जाने से डर नहीं लगता, किसी से भी अच्छी तरह से बात करने में भी वह हिचकिचाती नहीं. ग्रूमिंग का फायदा उसे कुछ ही दिनों में दिखने लगा और वह आज अपने काम और परिवेश से बहुत खुश है.
बड़े शहरों में आजीविका और शिक्षा के लिए लड़कियां छोटे शहरों से जाती हैं और वहां जा कर वे खुद को उस परिवेश में कई बार अनफिट पाती हैं. ऐसे में थोड़ी गाइडैंस उन्हें सहज महसूस कराती हैं क्योंकि अकेली रह रही महिलाओं की संख्या में पिछले 1 दशक में लगभग 58% का उछाल आया है, जिस में कुल मिला कर देश में आज 7.2 करोड़ से अधिक सिंगल महिलाएं मौजूद हैं, जिन में अविवाहित, तलाकशुदा और विधवा स्त्रियां हैं.
सरकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय रिपोर्ट और जनगणना के रुझानों के अनुसार, 35 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित लड़कियों की संख्या में लगभग 66% की वृद्धि हुई है. ये स्त्रियां खुद के दम पर परिवार चलाने वाली भी हैं, जो चौंकाने वाली है.
यह बदलाव मुख्य रूप से बेहतर शिक्षा, कैरियर की प्राथमिकता, आर्थिक स्वतंत्रता और विवाह की उम्र में देरी के कारण आया है.
ग्रूमिंग क्यों है जरूरी
मनोवैज्ञानिक राशिदा कपाङिया मानती हैं कि अकेली रह रही लड़कियों को खुद की ग्रूमिंग अवश्य करवा लेनी चाहिए, ताकि वे हर परिस्थिति में फिट बैठ जाएं, जिस में स्वयं की देखभाल, बजट मैनेजमेंट, साजसज्जा और अपना एक सुरक्षित स्थान या कमरा होना, जो उन की मानसिक शांति और आत्मविश्वास के लिए बेहद आवश्यक है.
यह न केवल उन के व्यक्तित्व को निखारता है, बल्कि समाज और कार्यस्थल में एक सकारात्मक पहचान भी देता है.
आत्मविश्वास में इजाफा
इस के अलावा ग्रूमिंग से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, साथ ही एक अच्छे और सुरक्षित माहौल में रहने से मानसिक तनाव कम होता है, जिस से आप सैल्फ केयर पर बेहतर ध्यान दे पाती हैं.
अपने निजी स्थान को व्यवस्थित रखने के लिए आप और्गेनाइजेशन टूल्स जैसे स्टोरेज बौक्स, वार्डरोब और्गनाइजर का इस्तेमाल कर सकती हैं.
इतना ही नहीं, ग्रूमिंग से स्ट्रैस कम होता है, जो बहुत जरूरी है, खासकर युवा वर्ग, जो अधिकतर तनाव की वजह से किसी निर्णय पर पहुंचने में नाकाम होते हैं. आप का निजी स्थान ऐसा होना चाहिए, जहां आप काम के बाद सुकून से आराम कर सकें. ग्रूमिंग के कुछ सुझाव निम्न हैं :
स्वयं की करें देखभाल
-स्वयं की देखभाल में त्वचा की देखभाल, जिस में क्लींजिंग और मोइस्चराइजिंग की खास जगह होती है. त्वचा के प्रकार के अनुसार औयली, ड्राई या नौर्मल को समझें और दिन में 2 बार चेहरा धो कर ब्रैंडेड मोइस्चराइजर लगाएं.
-घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना कभी न भूलें.
-व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान देना भी आवश्यक है, मसलन चेहरे के अनचाहे बालों को थ्रेडिंग या वैक्सीन के जरीए नियमित रूप से साफ करवाएं.
-अपने नाखूनों को ट्रिम और साफ रखें. यदि नेल पेंट लगा रही हैं, तो उसे आधा उतरा हुआ न छोड़ें.
-दिन में 2 बार ब्रश करें और सांसों की ताजगी के लिए हमेशा माउथवाश या मिंट का प्रयोग करें.
-हेयर केयर में केशों को हफ्ते में कम से कम 2 बार धोएं और सिरम का इस्तेमाल कर के उन्हें उलझने से बचाएं.
-बौडी और्डर से बचने के लिए नहाने के बाद रोल औन या डियोडरेंट का इस्तेमाल करें.
-स्टाइलिंग के लिए हमेशा साफसुथरे और अच्छे फिटिंग वाले कपड़े पहनें.
-रात को सोने से पहले हाथ और पैरों को साफ कर के मोइस्चराइजर जरूर लगाएं.
सुरक्षित स्थान को प्राथमिकता
इस के अलावा अकेले रहने के लिए एक सुरक्षित स्थान को प्राथमिकता देनी पड़ती है क्योंकि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के साथसाथ स्वच्छता और स्वास्थ्य दोनों होते हैं, वहां आप अपनी दिनचर्या, त्वचा की स्वच्छता और संतुलित आहार का ध्यान आसानी से रख सकती हैं, जो सेहत के लिए जरूरी है.
साथ ही एक सुरक्षित स्थान आप को बाहरी दुनिया की चिंताओं से मुक्त रखता है, जिस से आप अपने कैरियर और अन्य गतिविधियों पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकती हैं.
इतना ही नहीं, अकेले रहने पर अपने बजट के अनुसार घर या कमरे को कैसे सुरक्षित और व्यवस्थित रखें, इस पर भी विचार कर लें. यह बहुत जरूरी भी है, ताकि आप अपनी कमाई को सुरक्षित और आरामदायक तरीके से खर्च कर सकें.
खर्चों को संतुलित रखने के कुछ व्यावहारिक और आसान तरीके इस प्रकार हैं :
– किराए में बचत पर ध्यान दें. अकेली रहने के बजाय फ्लैटमेट के साथ शेयर करें. इस से आप का किराया और बिजली का बिल आधा हो सकता है.
-भोजन और ग्रोसरीज पर काफी बचत करना संभव होता है, अगर आप बाहर का खाना और औनलाइन डिलीवरी बंद कर के घर पर खाना पकाना शुरू करें, जो सेहत के साथसाथ बजट फ्रैंडली भी है.
-लोकल मार्केट से थोक में सब्जियां और दालें खरीद सकती हैं, साथ ही यात्रा करने में औटो या कैब के बजाए लोकल ट्रेन, मैट्रो या बसों जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर सकती हैं. पास या स्मार्ट कार्ड बनवाने से पैसे और समय की बचत होती है.
-औटोमैटिक बिलिंग पर ध्यान दें, मसलन उन सभी गैरजरूरी सब्सक्रिप्शन (ओटीटी प्लेटफौर्म, ऐप्स) को तुरंत अनसब्सक्राइब कर दें, जिन का आप नियमित उपयोग नहीं करतीं.
-बजट ऐप का इस्तेमाल करना अच्छा होता है, जिस में अपने खर्चों पर नजर रखने के लिए Walnut या Money Manager जैसे बजट ट्रैकिंग ऐप्स का उपयोग कर सकती हैं.
इस प्रकार पढ़ाई और दोस्ती के बीच खुद की देखभाल अकसर पीछे छूट जाती है, लेकिन इस के महत्त्व को देखते हुए यह बहुत जरूरी है.
यह स्वच्छता, आत्मसम्मान और सामाजिक सहजता को आपस में जोड़ती है क्योंकि केशों और त्वचा की देखभाल की बुनियादी आदतें स्वस्थ जीवनशैली की नींव हैं, जो जीवनभर बनी रहती हैं.
