बच्चों के भविष्य को लेकर नीट के पेपर लीक का विवाद और उसके बाद नीट पेपर लीक के चलते 20 स्टूडेंट का आत्महत्या करने के विवाद को लेकर काकरोच जनता पार्टी का इसके विरुद्ध उठाया आंदोलन इतना बड़ा मोड़ ले लेगा ये शायद किसी ने नहीं सोचा होगा. लेकिन एक सच ये भी है कि जब बाहर घना अंधेरा हो तो छोटी सी चिंगारी भी रोशनी फैलाने के लिए काफी होती है , ऐसा ही कुछ जंतर मंतर पर 20 जून से शुरू हुआ कौकरोच जनता पार्टी का आंदोलन 20 जुलाई के अंदर इतना बड़ा तहलका मचाएगा इसका अंदाजा शायद मौजूदा सरकार को भी नहीं था. इस आंदोलन में नीट परीक्षा विवाद और पेपर लीक मामलों को लेकर कौकरोच जनता पार्टी ने सरकार से जवाब मांगा .

शिक्षा मंत्री की लापरवाही को देखते हुए शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा की मांग कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखकर की, इसके अलावा नीट पेपर लीक से हताश होने के बाद 20 बच्चों द्वारा आत्महत्या करने वाले बच्चों के परिवार के लिए एक करोड़ का मुआवजा मांगा . जब इस मांग पर कोई विचार नहीं हुआ तो कौकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली के जंतर मंतर में 20 जून से प्रदर्शन का ऐलान किया. जिसमें उन्होंने उन बच्चों का जिक्र किया जिनके मां बाप ने कर्जा लेकर अपने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए नीट की परीक्षा दिलवाई और पेपर लीक होने के बाद उन्हें बच्चों की आत्महत्या के चलते मां बाप के मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहे परिवार को तत्काल राहत देने की सरकार से मांग की.

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साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही करने की मांग को लेकर धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की , इस मांग में काकरोच पार्टी का उद्देश्य छात्र और समर्थक को एकत्र होकर परीक्षा प्रणाली में सुधार करवाना और पेपर लीक मामलों में सख्त कार्यवाही और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा की मांग उठाना.

क्योंकि यह आंदोलन बच्चों और देश के भविष्य के हित के लिए उठाया गया था इसलिय इस आंदोलन में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हुए और उन्होंने बच्चों का भविष्य बचाने के उद्देश्य से 20 जुलाई तक भूखे रहने कर अनशनं शुरू करने का ऐलान किया. सोनम वांगचुक के आंदोलन से जुड़ने के बाद शिक्षा सुरक्षा के लिए शुरू हुआ आंदोलन और भी गहरा गया , क्योंकि यह आंदोलन किसी राजनीतिक मुद्दे को पूरा करने के लिए नहीं था और इस आंदोलन का उद्देश्य युवा बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करना था लिहाजा इस आंदोलन के लिए सबसे ज्यादा युवा वर्ग का आकर्षण आंदोलन में शामिल होने को लेकर तेज होने लगा. क्योंकि यह आंदोलन शिक्षा से संबंधित था और इसमें भाग लेने वाले बच्चे प्रोफेशनल नहीं थे इसलिए यह मार्च अहिंसा को फॉलो करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से हो रही थी.

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जिसमें धीरेधीरे कई लोग शामिल होने लगे फिर चाहे वह नेता हो या अभिनेता हो , जिनके भी मन में इस आंदोलन के प्रति सदभावना जागी. वे सभी इस आंदोलन से धीरेधीरे जुड़ने लगे. क्योंकि जंतर मंतर पर होने वाला यह आंदोलन सरकार के खिलाफ था इसलिए वहां मौजूद लोगों को समर्थन करने के लिए सरकार की तरफ से कोई इंतजाम नहीं था बल्कि जो सुविधा थी उसे भी हटाया जा रहा था, जिसके बाद इस आंदोलन को समर्थन देने वाले लोगों ने अपनी तरफ से खाने पीने का बंदोबस्त करना शुरू किया. पहली बार इस आंदोलन में हिंदू मुसलमान पंजाबी मराठी हरियाणवी साउथ के लोगों आदि कई भाषाओं जाति से जुड़े लोगों को एकजुट होकर न सिर्फ लोगों के लिए खानपान का बंदोबस्त करते देखा गया , बल्कि एक दूसरे को मदद करते हुए भी देखा गया.

मौजूदा आंदोलन में इस तरह का भाईचारा और एकता लोगों के लिए एक मिसाल साबित हो रही थी , लिहाजा धीरेधीरे कई लोग इस आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली के जंतर मंतर पहुंचने लगे . देखते ही देखते कॉकरोच जनता पार्टी का यह आंदोलन 10 लाख से ज्यादा की भीड़ के साथ सरकार से अपनी मांगों को लेकर तेजी से आगे बढ़ने लगा जिसका नतीजा यह हुआ की सरकार की तरफ से समझौते की यह इस समस्या का हल निकालने की पहल तो नहीं हुई लेकिन इसके बिल्कुल विपरीत सरकार का इस आंदोलन के खिलाफ कड़ा रवैया अपनाना शुरू कर दिया .

इस आंदोलन के लिए आये लोगों को डिटेन करके जेल में भेजना शुरू कर दिया जिसके चलते इसी काकरोच पार्टी को समर्थन करने के लिए जब दादर शिवाजी पार्क में शामिल होने एक्ट्रेस मॉडल उर्फी जावेद और आयशा खान दादर पहुंची तो पुलिस ने उनको भी धर दबोचा ,जिससे बचने के चक्कर में उर्फी जावेद तो पुलिस को चकमा देकर वहां से भाग खड़ी हुई लेकिन आयशा खान को पुलिस ने पकड़ लिया, और पुलिस वैन में जबरदस्ती ठूंस कर उनको हवालात ले जाया गया ,वही दूसरी तरफ अहिंसा से प्रेरित काकरोच जनता पार्टी के इस आंदोलन में दिल्ली में पुलिस द्वारा हिंसा की दर्दनाक कार्यवाही देखने को मिली…

कौकरोच जनता पार्टी का यह आंदोलन जब चरम सीमा पर था , सोनम वांगचुक जब 18 दिन से भूख हड़ताल पर कायम थे, और इस नजारे को देखकर सोशल मीडिया पर बवाल मच गया, तो इसे रोकने के लिए सरकार ने सबसे पहले कानूनी कार्यवाही करके सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से जबरदस्ती उठाकर अस्पताल पहुंचा दिया गया. उसके बाद पुलिस ने वहां मौजूद छात्रों को बुरी तरह लाठी से पीटा लड़कियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और अश्रु गैस का इस्तेमाल करके भीड़ को नुकसान पहुंचा कर चितर बितर करने की कोशिश की.

स्टूडेंट पर लाठी चार्ज का नजारा देखकर पूरे हिंदुस्तान में तहलका मच गया और जहां एक और भारत के कई दिग्गज हस्तियों और आम लोग सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की गुजारिश कर रहे थे, वही जनता ने जब स्टूडेंट पर लाठी चार्ज होते देखा और कई लोगों को घायल होते देखा तो सब की आत्मा कांप गई और कई सारे लोग सोशल मीडिया पर इस बात की निंदा करते हुए गुस्से में गाली देते हुए भी नजर आए. गौरतलब है सरकार और जनता की इस लड़ाई में गांधी परिवार के बेटे और विपक्ष नेता राहुल गांधी को भी पुलिस ने खदेड़ दिया.

इस मुठभेड़ में राहुल गांधी भी घायल होते हुए नजर आए, इतना सब होने के बावजूद जंतर मंतर पर होने वाले इतने दिनों के आंदोलन का अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया क्योंकि सरकार अपनी जिद पर अड़ी है , और कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े स्टूडेंट जो 10 लाख के करीब है पीछे हटने को तैयार नहीं है . हालांकि जंतर मंतर पर होने वाले इस आंदोलन ने एक बार फिर जलियांवाला बाग कांड की याद जरूर दिला दी जहां पर अंग्रेजों ने निहत्थों भोली भाली जनता पर गोलियां दाग कर पूरा मैदान खून से लाल कर दिया था , एक बार फिर कई साल बाद वैसा ही माहौल देखने में आया जहां निहत्थे बच्चों और स्टूडेंट पर भारत की सरकार द्वारा लाठी चार्ज अश्रु गैस का इस्तेमाल करके उनको प्रताड़ित करते देखा गया . पहली बार पुलिस द्वारा बच्चों को लाठी से पीटने के बदले में भीड़ ने भी पुलिस पर पलटवार किया और पुलिस को भी मारना शुरू कर दिया इसके बाद कई पुलिस वालों को अपनी जान बचाकर भागने की नौबत आ गई , यह सब तब हुआ जब कई लड़के लड़कियों के घायल होकर खून बहने के खतरनाक दृश्य सामने आए जिसे देखने के बाद कई लोगों की आत्मा काँप गई .

स्टूडेंट्स और कौकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरे कई प्रसिद्ध हस्तियां ….

इस आंदोलन और स्टूडेंट पर हो रहे अत्याचार से दुखी कई सारे नेता अभिनेता और स्टैंडअप कॉमेडियन ने पुलिस ओर सरकार का विरोध जताते हुए अपना समर्थन कौकरोच जनता पार्टी और स्टूडेंट को दिली तौर पर दिया , जहां एक और साउथ के चीफ मिनिस्टर विजय थलापति और साउथ के एक्टर प्रकाश राज जंतर मंतर पर समर्थन करने पहुंचे. वही अभिनेत्री शबाना आज़मी स्वरा भास्कर ओर कुनिका सदानंद , पूनम पांडे , आदि कई कलाकारों ने भी जंतर मंतर जाकर स्टूडेंट का समर्थन दिया. इसके अलावा भी कई अलग-अलग पार्टी के नेता और विभिन्न भाषाओं से जुड़ी फिल्मों के अभिनेता भी खासतौर पर जंतर मंतर में कौकरोच जनता पार्टी का समर्थन करने पहुंचे .

सोशल मीडिया पर कई सेलिब्रिटीज ने कौकरोच पार्टी को समर्थन देते हुए सरकार की इस नीति की खुले तौर पर आलोचना की…..

काकरोच जनता पार्टी के जंतर मंतर में चल रहे आंदोलन में स्टूडेंट पर पुलिस द्वारा लाठी चार्ज होते देख सोशल मीडिया पर इस हरकत के खिलाफ खड़े होने वाले की बाढ़ सी आ गई ,जिनमें कई सारे जाने माने कलाकारों ने जैसे नसरुद्दीन शाह, सोनाक्षी सिन्हा , शत्रुघ्न सिन्हा , हुमा खान भूमि पेडणेकर मुनव्वर फारुकी स्टैंड अप कॉमेडियन, दीपिका पादुकोण, राखी सावंत, टीवी एक्ट्रेस अर्चना गौतम ,समय रेना युटुबर, रुबीना दिलैक, जीनत अमान रत्ना पाठक, आलिया भट्ट, सोनी राजदान, अनुराग कश्यप आदि कई सेलिब्रिटीज ने इस अनशन के खिलाफ सोशल मीडिया पर आवाज उठाई.

प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने भी इस बात पर दुख व्यक्त करते हुए कहा नमस्कार दोस्तों मै हमेशा आप को हँसाता रहा हु पर आज जो जंतर मंतर में हुआ उस पर मैं चुप रहूं तो ये गलत होगा , मुझे इस पर याद आई एक घटना काफी सालों पहले लाल किले में हुए सम्मेलन में पंडित जवाहरलाल नेहरू मुख्य अतिथि थे, और कवि दिनकर जी उसकी अध्यक्षता कर रहे थे, मंच पर चढ़ते समय जब नेहरू जी थोड़ा लड़खड़ा गए तब दिनकर जी ने उनको संभाल लिया जब नेहरू जी ने दिनकर जी को धन्यवाद कहा तो दिनकर जी ने कहा धन्यवाद कहने की कोई जरूरत नहीं है,क्योंकि जब जब राजनीति डगमगाएगी तो साहित्य उसको संभाल लेगा.

मैं इस देश की राजनीति से एक ही बात कहना चाहता हूं कि देश के युवाओं का आक्रोश खत्म करने की कोशिश मत करो, जो आग सुलग रही है उसे बुझाने की कोशिश करो, ना कि सुलगाने की, कही ऐसा ना हो कि ये आग पूरे देश के अंदर भड़क जाए और इसमें देश की सेना और पुलिस भी शामिल हो जाये तब आप इसे संभाल नहीं पाओगे ,छोटी सी मांग को बड़ी मत बनाओ ये बच्चे बेकारी बेरोजगारी से परेशान बच्चे है ,इनके घाव पर मरहम लगाओ ना कि इनके घाव को और ज्यादा कुरेदो,ये देश युवाओ के हाथ में है , इसलिए इनको समझो इनको भड़काने की कोशिश मत करो वरना इस आग में इस देश का लोकतंत्र संविधान सुलग जाएगा, अभी भी वक्त है संभल जाओ, इससे पहले की बहुत देर हो जाए.

कवि सुरेन्द्र शर्मा की तरह प्रसिद्ध एक्टर और शो होस्ट शेखर सुमन ने भी काकरोच जनता पार्टी को समर्थन देते हुए और मौजूदा सरकार पर व्यंग्य करते हुए एक गहरी बात कह डाली शेखर सुमन ने सोनम वांगचुक को सपोर्ट करते हुए कहा हम सब जिंदा लाशों में वही एक जीवित इंसान है, शेखर सुमन ने राम मंदिर में चोरी होने वाली खबर को हाइलाइट करते हुए भाजपा नेता का जय श्री राम बोलने पर कटाक्ष करते हुए कहा जय श्री राम का जाप करने वाली पार्टी के रहते भी राम के घर का सामान सुरक्षित नहीं रहता , श्रद्धा के नारे जितने ऊंचे हो रहे हैं चरित्र की दीवार उतनी ही नीचे गिर रही है मंदिर में चोरी देश के दिवालिया पने की पहचान है ,

शेखर सुमन की तरह साउथ के दिग्गज एक्टर कमल हसन ने भी भाजपा सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहां जब तक जर्मनी बर्बाद नहीं हुआ था तब तक वहां की जनता को हिटलर के हर काम में देशभक्ति नजर आती थी, आज हमारे भारत देश का भी यही हाल है देश बर्बादी की कगार पर खड़ा है फिर भी अंधभक्त मोदी मोदी मोदी कहते नहीं थकते.

25 दिनों से अनशन पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा अभी मैं जिंदा हूं मेरी सांसे बाकी है और मरते दम तक में युवाओं के हक के लिए लड़ता रहूंगा.

कॉकरोच जनता पार्टी का यह आंदोलन किसी देश प्रेम से प्रभावित फिल्म से कम नहीं है. फिर चाहे वह शाहरुख खान की जवान हो जिसमें शाहरुख खान ने जनता को फिल्म के जरिए नसीहत दी थी अपना नेता या अपनी सरकार उसी को चुनो जो सही में विश्वास के लायक हो, इसी तरह रंग दे बसंती, अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत सत्याग्रह जो अन्ना हजारे के अनशन पर केंद्रित था, अनिल कपूर की नायक, अमिताभ बच्चन की इंकलाब और सरकार आदि फिल्में जो देश के भ्रष्टाचार को खत्म करने को लेकर बनाई गई थी वैसे ही असल जिंदगी में भी सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके जैसे सामान्य लोगों ने देश के युवाओं का भविष्य सुधारने का बीड़ा उठा लिया है .

इससे यही निष्कर्ष निकलता है कि कॉकरोच जनता पार्टी के इस आंदोलन से नई क्रांति का उदय तो हो ही गया है. ठीक उसी तरह जैसे मंजिल मिले ना मिले इसका गम नहीं मंजिल की जुस्तजू में मेरा कारवा तो है .

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