Mannara Chopra : अंबाला की एक छोटी सी लड़की जिस ने सपने आसमान जैसे देखे थे. आज मुंबई की मन्नारा बन चुकी हैं. यह सफर आसान नहीं था. हर कदम पर उन्हें अपनी जगह बनाने के लिए लड़ना पड़ा. औडिशन, रिजैक्शन और वे रातें जब सबकुछ बहुत मुश्किल लगता था, लेकिन हर बार उन्होंने खुद को उठाया, अपना भरोसा बनाए रखा और अपनी पहचान बनाई.
यह कहानी है मन्नारा के खुद पर यकीन करने और हर दिन एक नए मुकाम को छूने की. मन्नारा ने खुद को किसी एक लेबल में बंधने नहीं दिया. वे बोल्ड भी हैं और संस्कारी भी. वे खुद को अलगअलग रूपों में ऐक्सप्रैस करती हैं. मन्नारा चोपड़ा अकसर अपनी चुलबुली और ऊर्जावान पर्सनैलिटी के लिए जानी जाती हैं.
फिल्म ‘जिद’ से मन्नारा ने बौलीवुड में कदम रखा. ‘थिक्का’ और ‘रोग’ से साउथ का दिल जीता. मन्नारा ने 7 तेलुगु फिल्मों में काम किया. ‘बिग बौस 17’ में कंटैस्टैंट बन कर आईं और 140 कैमरों के सामने वे हंसी, रोईं, लड़ीं और फिर से उठीं, तो
4.5 मिलियन लोगों ने सिर्फ कंटैस्टैंट नहीं उन में अपनी बेटीबहन देखी. घरघर में उन्हें पहचाना जाने लगा. सैकंड रनरअप बन कर निकलीं और लोगों का दिल भी जीत लिया.

बीबी के बाद भी मन्नारा रुकी नहीं. ‘लाफ्टर शैफ्स 2’ की किचन में कोमेडी का तड़का लगाया. ‘सांवरे’, ‘धीरेधीरे…’, ‘तेरा कसूर…’ जैसे गानों में अदाओं से यूट्यूब पर आग लगा दी.
2024-2025 में तेलुगु फिल्म ‘तिरगबदरा’ सामी की.
ओटीटी पर एक फर्जी लव स्टोरी में गैस्ट बन कर महफिल लूटी और अब ‘हाइलाइट्स’ से तमिल सिनेमा में लीड हीरोइन बन कर बदगा आदिवासी समुदाय की कहानी पैनइंडिया ले जा रही हैं.
इतना ही नहीं ‘अजीब दास्तां…’ गा कर सिंगिंग में कदम रखा और न्यूयौर्क की सड़कों पर खुद अपना म्यूजिक वीडियो डाइरैक्ट कर डाला. इंस्टाग्राम पर 4.5 मिलियन लोगों को डेली मोटिवेट करने वाली मन्नारा आज हर उस लड़की की आवाज है जो छोटे शहर से बड़े सपने ले कर निकलती है और और उन्हें पूरा भी करती है.
फैशनेबल और स्टाइलिश मन्नारा ने रैंप पर भी कम जलवे नहीं बिखेरे हैं. मार्च, 2026 में मैसूर फैशन वीक में शोस्टौपर बन कर महफिल लूटी तो बांबे टाइम्स फैशन वीक में सब की नजरें थाम लीं. मैक्स फैक्टर के इंडिया लौंच पर ब्लू वैलवेट ड्रैस और ग्लिटरिंग बूट्स में ग्लैमर का तड़का भी लगाया. चंडीगढ़ और दिल्ली टाइम्स फैशन शो भी किया.
मन्नारा डांस के बड़ेबड़े शो करती हैं. न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी डांस करने जाती हैं. दिल्ली में हाल ही में जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में 9-10 मई, 2026 को शो किया जो बहुत हिट हुआ.
बौलीवुड और साउथ इंडस्ट्री में बड़ा फर्क
मन्नारा बताती हैं कि साउथ इंडस्ट्री में काम करना मेरे लिए बहुत खास रहा क्योंकि वहां प्रोफैशनलिज्म और टीमवर्क का एक मजबूत आधार है. लेकिन बौलीवुड में भी खासकर ‘बिग बौस’ के बाद मु झे एक अलग तरह का प्यार मिला है. यहां मैं अपनी भाषा में खुद को ज्यादा सहजता से ऐक्सप्रैस कर पाती हूं और अपनी निजी जिंदगी के पहलुओं को खुल कर दिखाना मेरे लिए आसान हो जाता है.
इस आजादी ने मु झे और भी सच्चा कनैक्शन बनाने में मदद की है और मैं इसे अपनी ताकत मानती हूं.
बिग बौस 17 का अनुभव
‘बिग बौस 17’ ने वाकई मेरी जिंदगी बदल दी. वहां सब से स्ट्रौंग मैं ने तब महसूस किया जब मैं ने मिर्ची टास्क देखा और तब मैं ने अपने दोस्तों को अपने से दूर जाते हुए देखा और खुद को छलते हुए महसूस किया. वह हर पहलू, वे दर्द, वे धोखे, सब जिंदगी के सार थे.
लेकिन सब से कमजोर मैं ने तब महसूस किया जब मेरे दोस्त मु झे छोड़ कर जा रहे थे. लेकिन फिर मैं ने उस स्थिति को सम झा और मु झे एहसास हुआ कि यहां कोई सच्चा दोस्त नहीं था. सब अपने मतलब के लिए आए थे. तभी मैं ने खुद को गहराई से टटोला, अपनी ताकत पहचानी और वही ताकत मु झे आगे बढ़ने का हौसला देती है.
बिग बौस में दोस्ती और दुश्मनी दोनों बनीं लेकिन असली रिश्ते वही टिके जो भरोसे पर थे. कुछ तो बाहर आ कर ऐसे थे कि लोग कैमरे तक ही सीमित रहे. जैसे ही मु झे पब्लिक में देखते फट से कैमरा औन कर लेते थे. मु झे सम झ आ गया कि ये सब चालबाज लोग थे.
मैं ने अपनेआप को ऐसे लोगों से दूर कर लिया क्योंकि भले ही मैं इस इंडस्ट्री का हिस्सा हूं लेकिन मैं सिर्फ काम और ईमानदारी पर भरोसा रखती हूं न कि सिर्फ दिखावे और टीआरपी पर.
किचन और कौमेडी एकसाथ
मन्नारा कहती हैं कि मैं उन लोगों में से हूं जो किचन में तो जाती हूं, कौन्फिडैंस से जाती हूं लेकिन सच कहूं तो अभी मु झे बस बेसिक्स ही आते हैं. लाफ्टर शैफ्स ने मु झे कुकिंग के प्रति प्यार दिया है और मैं अभी सीख रही हूं लेकिन औनस्क्रीन तो हंसी के तड़के और मेरे अंदाज दोनों चलते हैं. लाफ्टर शैफ्स ने मु झे एक बहुत प्यारी चीज सिखाई.
मु झे लगता है कि दुनिया में 2 तरह के लोग होते हैं– एक वे जो अपनी बातों, अपनी ऊर्जा और अपने स्वभाव से लोगों को हंसाते हैं और दूसरे वे जो किसी और का मजाक बना कर खुद को मजेदार या कूल दिखाने की कोशिश करते हैं.
मैं हमेशा पहली श्रेणी में रहना चाहूंगी. मेरे लिए हास्य का मतलब है लोगों के चेहरों पर मुसकान लाना, न कि किसी को नीचा दिखाना. शायद इसी वजह से लोगों ने मु झे इस शो में इतना प्यार दिया. आज भी जब मैं सड़क पर निकलती हूं, लोग पूछते हैं कि मन्नारा, आप कब वापस आ रही हैं? यह सुन कर दिल बहुत खुश हो जाता है.
ऐक्टिंग के बाद म्यूजिक और डाइरैक्शन
मेरे लिए यह कोई नया शौक नहीं है बल्कि एक लंबा प्लान है. ऐक्टिंग मेरी पहली पहचान है लेकिन म्यूजिक, डांस और डाइरैक्शन तीनों ही मेरे दिल के बहुत करीब हैं. मैं ने न्यूयौर्क में डाइरैक्ट किया, ‘अजीब दास्तां’ गाया और डांस भी मेरी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा है.
मेरे लिए हर रूप में खुद को ऐक्सप्रैस करना, एक प्लान का हिस्सा है जिस से मैं हर इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना चाहती हूं.
जिंदगी का नजरिया
पापा के जाने के बाद जिंदगी का नजरिया सच में बदल गया. उन की एक सीख जो आज भी हर फैसले में याद आती है वह थी कि हमेशा प्यार और ईमानदारी से बात करो.
वे कहते थे कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों लोगों से हमेशा सम्मान और दिल से बात करो क्योंकि यही वह बात है जो जिंदगी में रास्ता दिखाती है.
खुद को कहां देखती हैं
मैं ने ओटीटी फिल्म, म्यूजिक और रिऐलिटी शो सब ऐक्सप्लोर किए हैं और यही तो मेरा सफर है, लगातार कुछ नया करने का. अगले 5 सालों में मैं खुद को एक बड़े प्रोडक्शन हाउस चलाते हुए देखती हूं जहां मैं अलगअलग टेलैंट्स को प्लेटफौर्म दूं.
हौलीवुड भी मेरा एक सपना है लेकिन मैं अपने कदम पूरे आत्मविश्वास से और अपनी पहचान के साथ बढ़ाना चाहती हूं.
छिपा हुआ टेलैंट
अगर मैं एक दिन कैमरा, फोन और मेकअप से दूर होती हूं तो मैं शायद एक शांत जगह पर बैठ कर पेंटिंग करूंगी. फैशन डिजाइनिंग मेरा पुराना पैशन रहा है और स्कूल में मेरा कमर्शियल आर्ट भी एक सब्जैक्ट था तो पेंटिंग मेरे लिए हमेशा एक सुकून भरी और रचनात्मक आउटलेट रही है.
कभीकभी मैं बस अपने अंदर की क्रिएटिविटी को पूरी तरह से जीना चाहूंगी बिना किसी दिखावे के.
वैस्टर्न पसंद है या ऐथनिक
मु झे वैस्टर्न में कैजुअल कपड़े बहुत पसंद हैं जैसे हाई बूट्स, जींस और एक लूज टौप क्योंकि उस में मु झे सच में आराम मिलता है. लेकिन अगर मैं इंडियन पहनूं तो साड़ी मेरी फैवरिट है, अलगअलग ब्लाउज के साथ जो मेरी ग्रेस को और बढ़ाती है.
अगर आप मु झ से पूछें तो मेरे लिए फैशन वही है जिस में मैं खुल कर, कंफर्टेबली बैठ पाऊं, बात कर पाऊं क्योंकि फैशन मेरे लिए सिर्फ कपड़ा नहीं बल्कि मेरी पर्सनैलिटी की आवाज है और मैं हमेशा वह पहनती हूं जिस में मैं खुद को सब से ज्यादा सच महसूस कर सकूं.
सब से बड़ा फर्क
दिल्ली की गलियों में पली बार्बी और मुंबई की मन्नारा में सब से बड़ा फर्क यही है कि दिल्ली ने मु झे जमीन से जोड़ा वहीं मुंबई ने मु झे सपनों की उड़ान दी. लेकिन जो सब से मजेदार आदत है, जो आज भी ‘दिल्ली वाली लड़की’ मु झ में है वह है किसी भी हालात में मजाक करना, लोगों से जुड़ कर बात करना और हमेशा अपनेआप को हलकेफुलके, दिलचस्प अंदाज में रखना.
ऐक्टिंग का रिस्क
मैं वकील बनना चाहती थी क्योंकि मेरी पौलिटिकल साइंस में बहुत दिलचस्पी थी और मैं हमेशा इंडियन पौलिटिक्स और कानून को फौलो करती थी. लेकिन पापा ने मना किया.
वहीं बचपन से ज्वैलरी डिजाइनिंग में मम्मी की मदद की थी और मेरी पेंटिंग भी काफी अच्छी थी तो मैं ने फैशन डिजाइन चुना और आज ऐक्टिंग करते हुए, डांस, म्यूजिक और फैशन के जरीए मैं खुद को ऐक्सप्रैस कर पाती हूं और ला और पौलिटिक्स की जो नींव पापा ने दी थी वह आज भी मेरी हर पब्लिक अपीयरैंस और बातचीत में झलकती है.
कैमरे की दुनिया
मन्नारा बताती हैं कि पीरियड्स, मूड स्विंग्स और ब्रेकअप जैसे हालात में मेरे लिए शूट करना सच में मुश्किल हो जाता है. सब से पहले मेरी बौडी बहुत ज्यादा ब्लोटेड महसूस करती है.
शुरू में जब मैं ने शूटिंग शुरू की तो यह काफी कठिन था क्योंकि आप एक महिला हैं, आप को इन आंतरिक बदलावों का सामना करना पड़ता है लेकिन साथ ही आप को सैट पर इतने सारे लोगों से भी डील करना होता है, हेयर, मेकअप, स्पौट बौय, एडिस और फिर भी मु झे कैमरे के सामने मुसकराना पड़ता है.
हां, उन दिनों सच में मैं बहुत ज्यादा इमोशनल भी महसूस करती हूं. ऐसा लगता है कि बस रो ही दूं लेकिन धीरेधीरे मैं ने इस पर काबू पाना सीख लिया है.
रोल मौडल होना
सब से पहले मैं यह कहना चाहूंगी कि मैं एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नहीं हूं, फिर भी 4.5 मिलियन लोग मु झे फौलो करते हैं क्योंकि वे मु झ पर भरोसा करते हैं, वे मु झे अपने जैसी मानते हैं, रियल लाइफ में भी. मु झे अपने फैंस, अपने क्लब्स से बहुत प्रेरणा मिलती है क्योंकि वे मेरे साथ हर कदम पर हैं चाहे अच्छे हों या बुरे.
मैं सोशल मीडिया को ऐंजौय भी करती हूं लेकिन इसे एक जिम्मेदारी की तरह भी लेती हूं क्योंकि 70त्न औडियंस मेरी महिलाएं हैं जो मु झे एक रोल मौडल की तरह देखती हैं.
इसलिए मैं हमेशा चाहती हूं कि मैं उन के लिए कुछ अच्छा करूं, सोचसम झ कर कदम उठाऊं ताकि मैं उन्हें सच में प्रेरित कर सकूं और एक पौजिटिव बदलाव ला सकूं.
मैं हमेशा पहली श्रेणी में रहना चाहूंगी. मेरे लिए हास्य का मतलब है लोगों के चेहरों पर मुसकान लाना, न कि किसी को नीचा दिखाना. शायद इसी वजह से लोगों ने मु झे इस शो में इतना प्यार दिया…
आज ऐक्टिंग करते हुए, डांस, म्यूजिक और फैशन के जरीए मैं खुद को ऐक्सप्रैस कर पाती हूं और ला और पौलिटिक्स की जो नींव पापा ने दी थी वह आज भी मेरी हर पब्लिक अपीयरैंस और बातचीत में झलकती है.
