Healthy Monsoon : मौनसून गरमी से राहत ले कर आता है और इस मौसम का खासकर यूथ लड़कियां खूब आनंद लेती हैं. मसलन, अधिक समय तक बारिश में भीगना, पानी में दोस्तों के साथ मस्ती करना, कालेज या जौब पर जाते हुए भी पानी में भीगते हुए जाना आदि क्योंकि वे मौनसून की पहली फुहार का आनंद लेती हैं, जिस का वे तेज गरमी में इंतजार करती रहती हैं.
यह सही है कि बारिश में भीगना जितना अच्छा लगता है, उतना ही लंबे समय तक गीले कपड़ों में और नमी भरे माहौल में रहना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. कई बार डाक्टर के चक्कर लगाने पड़ते है, ऐसे में बारिश में भीगने के साथसाथ खुद को किसी भी प्रकार की त्वचा संबंधी बीमारी से दूर रख कर बारिश का भरपूर आनंद कैसे लिया जाए, बता रही हैं नोएडा के मदरहुड अस्पताल की प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञा डा. उमा मिश्रा.
वे कहती हैं कि बरसात के मौसम में नमी, पसीना, उमस और कपड़ों का ठीक से न सूख पाना कई तरह के संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है, जिस में त्वचा पर रैशेज, इंटीमेट पार्ट्स में इन्फैक्शन, मासिकधर्म के दौरान होने वाली परेशानियां, यूरिन इन्फैक्शन आदि समस्याएं हो जाती हैं, जिन्हें लड़कियां नजरअंदाज कर देती है.
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त्वचा संबंधी समस्याएं
मौनसून में त्वचा की समस्याएं सब से ज्यादा देखने को मिलती हैं. लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने से त्वचा में खुजली, लालपन, रैशेज और फंगल इन्फैक्शन हो सकता है. स्तनों के नीचे, जांघों के बीच, कमर के आसपास और बगल जैसे हिस्सों में ज्यादा नमी जमा होती है, इसलिए इन जगहों पर संक्रमण का खतरा अधिक रहता है.
जो लड़कियां कई घंटों तक गीली जींस, लैगिंग्स, मोजे या जूते पहनती हैं, उन के पैरों में फंगल संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है.
यदि समय पर इलाज न कराया जाए तो यह समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है. इस मौसम में खेलकूद करने वाली और लंबे समय तक बाहर रहने वाली छात्राओं को विशेष सावधानी रखने की जरूरत होती है.
वैजाइनल और इंटीमेट पार्ट्स में संक्रमण
लड़कियों के निजी अंगों में कुछ अच्छे बैक्टीरिया स्वाभाविक रूप से मौजूद होते हैं जो वहां का संतुलन बनाए रखते हैं, लेकिन गीले कपड़े, पसीना और लगातार बनी रहने वाली नमी इस संतुलन को बिगाड़ सकती है और संक्रमण का खतरा बढ़ा सकती है. मौनसून के दौरान कई लड़कियों को खुजली, जलन, असामान्य वैजाइनल डिस्चार्ज, दुर्गंध या यूरिन करते समय असुविधा महसूस हो सकती है. ये फंगल या बैक्टीरियल संक्रमण के संकेत हो सकते हैं.
लूज और कौटन के कपड़ों का प्रयोग जरूरी
तंग और सिंथैटिक कपड़े पहनने से समस्या और बढ़ सकती है क्योंकि ये कपड़े नमी को रोक कर रखते हैं और हवा का प्रवाह कम कर देते हैं. सब से अधिक आम समस्या यह है कि बारिश के मौसम में कई बार अंडरगारमैंट्स पूरी तरह सूख नहीं पाते, फिर भी लड़कियां उन्हें पहन लेती हैं. इस से त्वचा में जलन और फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
बारबार वैजाइना की सफाई करना या सुगंधित इंटीमेट वाश का इस्तेमाल करना संक्रमण से बचा नहीं पाता क्योंकि जरूरत से ज्यादा सफाई और तेज कैमिकल वाले उत्पाद इंटीमेट पार्ट्स के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ सकते हैं. अकसर युवा लड़कियां शर्म के कारण इन समस्याओं के बारे में खुल कर बात नहीं करतीं, जबकि समय पर डाक्टर से सलाह लेने से समस्या जल्दी ठीक हो सकती है और गंभीर होने से बच सकती है.
मौनसून में पीरियड्स के दौरान होने वाली परेशानियां
बारिश के मौसम में पीरियड्स के दौरान असुविधा बढ़ सकती है. उमस और पसीने के कारण सैनिटरी पैड नम हो जाते हैं, जिस से इंटीमेट अंगों के आसपास त्वचा में जलन और रैशेज होने का खतरा बढ़ जाता है खासकर स्कूल और कालेज जाने वाली लड़कियां जो समय पर पैड नहीं बदल पातीं उन में संक्रमण की संभावना अधिक रहती है. इसलिए मानसून में मासिकधर्म स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, जो लड़कियां मैंस्ट्रुअल कप का उपयोग करती हैं, उन्हें हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इस के अलावा इस मौसम में शारीरिक गतिविधि कम होने, खानपान में बदलाव और धूप कम मिलने के कारण कुछ युवतियों को ज्यादा दर्द, पेट फूलना और थकान महसूस हो सकती है.
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन (यूटीआई)
मौनसून के दौरान युवा लड़कियों में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन (यूटीआई) भी काफी आम हो जाता है. लंबे समय तक पेशाब रोक कर रखना, कम पानी पीना और लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना यूटीआई का खतरा बढ़ा सकता है. इस के अलावा भीगते हुए यात्रा के दौरान या सार्वजनिक शौचालयों की सफाई को ले कर चिंता के कारण पेशाब रोक कर रखने पर भी मूत्राशय पर दबाव पड़ता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
बढ़ती है प्रजनन संबंधी समस्या
डाक्टर उमा कहती हैं कि कई बार बारबार इन्फैक्शन होने पर इन लड़कियों के बाद में प्रजनन पर भी प्रभाव पर सकता है. इन्हें नजरअंदाज करना ठीक नहीं. लड़कियों को अपने पेरैंट्स, स्कूल की अध्यापिकाओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ खुल कर बातचीत को बढ़ावा देना चाहिए ताकि वे जरूरत पड़ने पर बिना बेझिझक डाक्टर की मदद ले सकें.
रखें कुछ बातों का ध्यान
बारिश में भीगें और उस का आनंद उठाएं मगर कुछ बातों का ध्यान हमेशा रखें. बारिश में भीगने के बाद जितनी जल्दी हो सके गीले कपड़े बदल कर सूखे कपड़े पहन लें.
ढीले और सूती आरामदायक कपड़े तथा अंडरगारमैंट्स पहनें, इस से हवा का प्रवाह बना रहता है और नमी कम होती है, टाइट और सिंथैटिक कपड़ों स इंटीमेट पार्ट्स को साफ पानी से धीरेधीरे साफ करें और उन्हें सूखा रखें, बहुत ज्यादा सुगंधित उत्पादों का प्रयोग इन जगहों पर करने से बचें.
सैनिटरी पैड समयसमय पर बदलें, भले ही ब्लीडिंग कम हो. यात्रा के दौरान अतिरिक्त पैड या अन्य स्वच्छता उत्पाद साथ रखें.
बारिश के मौसम में लोगों को कम प्यास लगती है, इसलिए वे अकसर कम पानी पीते हैं. पर्याप्त पानी पीने से यूरिनरी ट्रैक स्वस्थ रहता है और यूटीआई का खतरा कम होता है.
गीले मोजे और जूते फंगल संक्रमण का कारण बन सकते हैं. जूतों को अच्छी तरह सुखाएं और गीले मोजों को तुरंत बदलें.
लगातार खुजली, असामान्य स्राव, पेशाब में जलन, रैशेज या दुर्गंध जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें. समय पर इलाज से समस्या जल्दी ठीक होती है और किसी प्रकार के कौंप्लिकेशन से बचा जा सकता है.
इस प्रकार मौनसून का मौसम आनंद और ताजगी ले कर आता है और इस का आनंद यूथ उठाते भी हैं. लेकिन हमेशा ध्यान रखना है कि बारिश का पानी जितना सुकून देता है, उतनी बीमारियों को भी साथ ले कर आता है क्योंकि बारिश में नमी और पसीने के कारण फंगस, बैक्टीरिया और कीटाणुओं को पनपने के लिए अनुकूल वातावरण मिलता है.
इस मौसम में त्वचा के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और गीले कपड़े या प्रदूषित पानी के संपर्क में रहने से त्वचा से जुड़े इन्फैक्शन तेजी से फैलते हैं. ऐसे में छोटीछोटी सावधानियां अपना कर, शरीर के शुरुआती संकेतों को पहचान कर और समय पर इलाज करवा कर लड़कियां पूरे मौनसून का आनंद ले सकती हैं और स्वस्थ रह सकती हैं क्योंकि जागरूकता, स्वच्छता की आदतें और समय पर चिकित्सा सलाह ही मौनसून से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव का सब से प्रभावी तरीका हैं.
