आजकल मार्केट में तरह-तरह के बॉडी शेपर आ रहे हैं, जो महिलाओं को पतला दिखाने में मदद करते हैं. इससे महिला शेप में तो नजर आती है. लेकिन इसके लिए घंटों बॉडी शेपर पहनने पर होने वाली दिक्कतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. अब ऐसे में सवाल उठता है कि आपको पतला आखिर दिखना क्यों है? क्या आप दूसरों को दिखाने के लिए ऐसा कर रही हैं? या फिर फिट रहने के लिए ऐसा करना है? फिट रहने के लिए करना है तो अपनी बॉडी को डाइट और एक्सरसाइज से शेप में लाएं, कुछ देर दूसरों को दिखाने के लिए क्यों तकलीफ सहनी.
बॉडी शेपर और तंग कपड़ों का कष्ट
बॉडी शेपर शरीर को कसकर पतला या शेप में दिखाता है, लेकिन लंबे समय तक इन्हें पहनने से सांस लेने में तकलीफ, पाचन से जुड़ी समस्याएं, ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट और त्वचा की जलन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. सिर्फ बाहरी दिखावे के लिए शरीर को रोज़ाना इस दर्द से गुजारना यकीनन एक अनचाहा दबाव ही है.
समाज के मापदंडों पर खरा उतरने के लिए ऐसा करना गलत है
जब कोई व्यक्ति समाज को खुश करने के लिए अपनी सहजता से समझौता करता है, तो उसके गंभीर परिणाम होते हैं.
समाज के मापदंड कभी स्थिर नहीं रहते; वे बदलते रहते हैं. उनके पीछे भागने से इंसान कभी खुद से संतुष्ट नहीं हो पाता और हमेशा तुलना के जाल में फंसा रहता है.
क्रैश डाइटिंग करना, अत्यधिक तंग कपड़े या बॉडी शेपर पहनना और अनावश्यक कॉस्मेटिक सर्जरी करवाना, ये सब शरीर की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
आत्मसम्मान कम होता है हमारा ऐसा करने से
कई बार हम दूसरों की नजरों में अपनी खुशियां ढूंढने लगते हैं, जैसे कि अगर किसी ने कह दिया कि तुम तो बड़ी शेप में लग रही हो. ऐसे में तुरंत आपके दिमाग में ख्याल आता है कि आज तो लगता है बॉडी शेपर की वजह से मेरा दिन बन गया. अब इसे हर पार्टी में पहनना है, भले ही मुझे कितनी भी दिक्कत क्यों न हो. जब हमारी खुशियां और हमारा मूल्य इस बात पर निर्भर करने लगता है कि दूसरे हमें कैसा देखते हैं, तो हम अपनी असली पहचान और स्वाभिमान खो देते हैं.
होना क्या चाहिए-
दिखावे का दबाव खत्म होना
सुंदरता की परिभाषाएं हर 10 साल में, हर संस्कृति में और सोशल मीडिया के नए ट्रेंड्स के साथ बदल जाती हैं. इनके पीछे भागने से सिर्फ मानसिक तनाव और इनसिक्योरिटी मिलती है. जब प्राथमिकता ‘सेहत’ बन जाती है, तो इंसान दूसरों की राय से मुक्त होकर खुद के लिए जीने लगता है.
सोशल मीडिया और विज्ञापनों का ‘डिजिटल डिटॉक्स’ करें
ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स या इन्फ्लुएंसर्स को अनफॉलो करें, जो ‘परफेक्ट बॉडी’ का झूठा भ्रम बेचते हैं या आपको खुद के बारे में बुरा महसूस कराते हैं.
उन लोगों और विचारों से जुड़ें, जो बॉडी पॉजिटिविटी, सेहत और असली आत्मविश्वास को बढ़ावा देते हैं.
हेल्थ बनाम शो-ऑफ
वजन घटाना या खुद को फिट रखना अपनी सेहत, ऊर्जा और लंबी उम्र के लिए होना चाहिए, न कि समाज के मापदंडों पर खरा उतरने के लिए. अगर आप 80 किलो से 20 किलो वजन अपनी बॉडी को स्वस्थ और हल्का रखने के लिए घटा रही हैं, तो यह एक बेहद पॉजिटिव और खुद के प्रति जिम्मेदार फैसला है.
बाहर से परफेक्ट नहीं, अंदर से फिट बनो
आप बाहर से कॉस्मेटिक सर्जरी करवाकर और बॉडी शेपर पहनकर कितना भी खुद को फिट देखा लें, लेकिन अगर आप अंदर कमजोरी महसूस करती हैं, आपको थकावट रहती है, खुद को हेल्दी नहीं लगता, बहुत जल्दी-जल्दी बीमार पड़ती हैं और बढ़ते हुए वजन को नहीं रोक रहीं, तो बाहर से आप कितनी भी परफेक्ट दिखने की कोशिश कर लें, वो सब बेकार है. इसलिए पहले अपनी बीमारियां ठीक करें, अच्छी नींद लें, अपनी इम्युनिटी सही करें, हेल्दी फील करें.
‘लुक’ से ध्यान हटाकर ‘फिटनेस’ पर लाएं
वर्कआउट या वॉक इसलिए करें ताकि शरीर में फुर्ती आए, स्टैमिना बढ़े और बीमारियां दूर रहें, न कि इसलिए कि कमर का साइज कम करना है.
वजन को सिर्फ एक संख्या की तरह देखें, अपनी सुंदरता का पैमाना न बनाएं.
असली खूबसूरती क्या है?
“अच्छे कपड़े पहनो, पर्सनैलिटी सही करो, जो हो जैसी हो खुश रहो.”
इंसान का आत्मविश्वास, उसका व्यवहार, उसकी सोच और उसका पहनावा उसकी असली पहचान बनाते हैं, न कि उसकी कमर का साइज या कृत्रिम बदलाव.
अंदरूनी ताकत और ऊर्जा ही असल मायने में किसी इंसान की असली पूंजी होती है. जब शरीर और मन अंदर से मजबूत होते हैं, तो चेहरे पर किसी तरह के बनावटी मेकअप या कृत्रिम बदलाव की जरूरत ही नहीं पड़ती—वह निखार और आत्मविश्वास अपने आप छलकने लगता है.
आपकी यह सोच कि “मैं जैसी हूं, खुद से प्यार करूंगी और अपनी सेहत के लिए मेहनत करूंगी, दूसरों को खुश करने के लिए नहीं” आज की हर महिला के लिए एक प्रेरणादायक और संतुलित नजरिया है.
