Home gardening : शहरों में बागबानी का चलन तेजी से बढ़ रहा है. लोग अपनी बालकनी, छत और घर की अन्य खाली जगहों को हराभरा बना रहे हैं. बहुत से लोग रंगबिरंगे फूलों के साथसाथ घर पर ही ताजा सब्जियां और हर्ब्स उगाना पसंद कर रहे हैं. वहीं बहुत से लोग कम रखरखाव वाले पौधों को लगाना विशेषरूप से पसंद कर रहे हैं.
बागबानी का चलन आज के समय में सिर्फ एक शौक नहीं रह गया है बल्कि यह मानसिक शांति, पर्यावरण संरक्षण और शुद्ध फ्रेश खानपान के साथसाथ लाइफस्टाइल ट्रेंड भी बन गया है. आजकल लोग आधुनिक तकनीकों और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों का इस्तेमाल कर के इसे आसानी से अपने लाइफस्टाइल का हिस्सा बना रहे हैं.
जिन घरों में छत है वह टैरेस गार्डन बना फूल और सब्जियां उगा रहे हैं, सीमित जगह यानी जैसे फ्लैट्स वाले घरों में मनीप्लांट स्नैक प्लांट, और हैंगिंग बास्केट का उपयोग कर के घर के अंदर ही हरियाली ला रहे हैं. कुछ किचन की बालकनी में किचन गार्डन बना रहे हैं. धनिया, पुदीना, पालक, चैरी टोमैटो जैसी ताजा सब्जियां गमलों या ग्रोबैग्स में उगाना पसंद कर रहे हैं.
रखरखाव
अब आप यहां इनडोर प्लांट लगाएं या आउटडोर, 2 गमले रखें या पूरा गार्डन बनाएं, इन पौधों को स्वस्थ रखने के लिए इन्हें पर्याप्त धूप, सही मात्रा में पानी, उचित खाद और नियमित कटाईछंटाई की आवश्यकता होती है. गमले की मिट्टी में ड्रैनेज अच्छी होनी चाहिए और कीटों से बचाव के लिए समयसमय पर नीम के तेल या दवा का स्प्रे करना पड़ता है.
दैनिक या रैग्युलर तौर पर तो इन का रखरखाव आप कर लेते हैं. लेकिन जब आप को कुछ दिनों या हफ्तों के लिए घर से बाहर जाना हो तो तब क्या? तब इन पौधों को समय पर पानी कैसे मिलेगा? इस तरह की स्थिति तो आती ही है तब उस समय आप के पड़ोसी या हाउस हैल्प काम आती है.
बहुत से लोग अपने पड़ोसियों को पौधों में पानी देने की जिम्मेदारी देते हैं तो कुछ अपनी मेड या हाउस हैल्प को पौधों के रखरखाव की जिम्मेदारी दे जाते हैं, जो सही भी है.
मगर क्या सिर्फ इतना काफी है? पौधों को पानी तो मिल जाएगा लेकिन क्या सही मात्रा में मिलेगा? बहुत से लोगों को यह नहीं पता होता कि पौधे में कितना और कब पानी देना चाहिए. जैसे इनडोर प्लांट्स में पीस लिली ले लीजिए, जिस में रोज नहीं बल्कि उस की मिट्टी को जांच कर पानी दिया जाता है. रोज पानी देने से यह पौधा खराब हो जाता है. यदि आप के पड़ोसी या मेड को यह बात पता न हो तो उस का अच्छा काम भी आप के पौधे के लिए गलत साबित होगा.
तो फिर क्या करें? पहले तो पौधों की जिम्मेदारी देते समय उन्हें उन के रखरखाव जैसे पानी कितना और कब देना है, धूप में किस पौधे को नहीं छोड़ना जैसी खास बातें ठीक से पहले ही बता दें. वे पौधों की बिलकुल उस तरह से तो नहीं रखरखाव करेंगे जैसे आप करते हैं लेकिन हां, सही तौर पर पानी, धूप देना उन्हें जीवित तो रख ही पाएगा.
अब यहां इन सभी बातों से पहले एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि दूसरों को अपने पौधों की जिम्मेदारी देने से पहले आप खुद उन की जिम्मेदारी और ज्ञान लें. आज लाइफस्टाइल या ट्रेंड के चलते सभी पौधे तो लगा लेते हैं लेकिन उन के बारे में कोई जानकारी नहीं रखते. जैसे
उन के शहर के वातावरण के हिसाब से कौन सा पौधा लगाना सही है, उन की अपनी दिनचर्या के हिसाब से वे कौन से पौधे का सही से रखरखाव कर सकते हैं, किस पौधे को कितनी खाद, धूप, पानी आदि की जरूरत है. इस जानकारी के अभाव में उन के पौधे ज्यादा दिन नहीं टिक पाते. सूख जाते हैं, गल जाते हैं या कीटाणुओं का शिकार हो जाते हैं.
इसलिए किसी भी पौधे को अपने घर में लाने से पहले उस के बारे में, उस के रखरखाव के बारे में जानें. देखें कि क्या आप उतना समय, श्रम और ध्यान आप उसे दे सकते हैं या नहीं क्योंकि यह सिर्फ आज के लाइफस्टाइल का हिस्सा नहीं बल्कि लाइफ साइकिल का ऐसा अंग है जिस पर पूरी लाइफ, आप की, हम सब की सांसें टिकी हैं. ग्रीन रिवौल्यूशन, ग्लोबल केयर, क्लाइमेट चेंज आदि के नाम पर सिर्फ पौधे लगाना काफी नहीं है बल्कि उन्हें बचाना भी जरूरी है.
जानकारी के लिए
साथ ही अब घर से बाहर जाने पर आप पड़ोसी या मेड के अलावा भी एक नई टैक्निकल मदद ले सकते हैं, जो एक स्मार्ट और आसान तकनीक है. जैसे पानी की बचत के लिए ‘स्मार्ट ड्रिप इरिगेशन’ और मिट्टी की नमी मापने वाले सैंसर, जिस से आप पौधों की देखभाल अपने स्मार्टफोन से भी कर सकते हैं.
