stress-free life : आज के लाइफस्टाइल में स्ट्रैस से बचना आसान नहीं. इस की वजह है सख्त डैडलाइन, लगातार आने वाले नोटिफिकेशन, औफिस में लंबे समय तक काम करना और पर्सनल व प्रोफैशनल जिम्मेदारियों में बैलेंस बनाने का दबाव किसी भी प्रोडक्टिव इंसान को थका सकता है. हालांकि हम अकसर अच्छी परफौर्मैंस की उम्मीद करने से पहले स्ट्रैस वाला टाइम बीतने का इंतजार करते हैं लेकिन सच तो यह है कि स्ट्रैस के ऐसे ही पलों के बीच इफैक्टिवली काम करना सीखना ही सब से कीमती हुनर है.
असल में तनाव के दौरान मस्तिष्क ‘सर्वाइवल मोड’ में चला जाता है. हाइपोथैलेमस और ऐमिग्डाला मिल कर कोर्टिसोल और ऐड्रेनालाइन जैसे हारमोन छोड़ते हैं जो दिल की धड़कन बढ़ाते हैं. इस से तात्कालिक ऊर्जा तो मिलती है लेकिन लंबे समय तक रहने पर सोचनेसम झने की क्षमता कमजोर हो सकती है.
स्ट्रैस को करें मैनेज
इस बारे में लाइफ कोच की ऐक्सपर्ट डा. प्रिया कौल कहती हैं कि इस में अच्छी बात है कि स्ट्रैस को मैनेज करने के लिए हमेशा अपने लाइफस्टाइल में बहुत बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती है. हमारी छोटीछोटी और सोचीसम झी आदतें ही मुश्किल दिनों में भी हमारा फोकस, इमोशनल बैलेंस और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में काफी मदद कर सकती हैं.
