Serious illness and marriage : बौलीवुड में ऐसी कई बेहतरीन फिल्में बनी हैं, जहां सच्चे प्यार की खातिर प्रेमी या प्रेमिका ने गंभीर बीमारी, हादसे या शारीरिक अक्षमता के बावजूद एकदूसरे का हाथ थामा और शादी की क्योंकि ऐसी फिल्में हर उम्र की दर्शकों को भावविभोर करती हैं और दर्शक इस से खुद को रिलेट कर पाते हैं.
ऐसी फिल्में बौक्स औफिस पर अच्छा कमाई कर जाती हैं. इस का सब से अच्छा उदाहरण सूरज बड़जात्या की फिल्म 'विवाह' है, जिस में पूनम (अमृता राव) शादी के ठीक एक दिन पहले अपने घर में लगी आग में गंभीर रूप से जल जाती है. अस्पताल के बर्न वार्ड में जब वह जिंदगी की जंग लड़ रही होती है, तब उस का मंगेतर प्रेम (शाहिद कपूर) अस्पताल में ही उस से मांग भर कर शादी करता है. यह फिल्म सच्चे और निस्स्वार्थ प्रेम की सब से बेहतरीन मिसाल मानी जाती है, जिसे दर्शकों ने पसंद किया.
साल 1978 की 'अंखियों के झरोखों से' क्लासिक रोमांटिक फिल्म में लिली (रंजीता कौर) को ल्यूकेमिया यानि ब्लड कैंसर हो जाता है. उस की इस जानलेवा बीमारी का पता चलने के बाद भी उस का प्रेमी अरुण (सचिन पिलगांवकर) उस से पूरी रस्मोरिवाज के साथ शादी करता है और उस के आखिरी पलों तक उस के साथ रहता है.
वर्ष 2016 में आई फिल्म 'सनम तेरी कसम' में भी मुख्य अभिनेत्री सरू (मावरा होकेन) को एक गंभीर और लाइलाज न्यूरोलौजिकल बीमारी हो जाती है. जब उस का परिवार उसे छोड़ देता है, तब उस का प्रेमी इंदर (हर्षवर्धन राणे) उस की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए उस से शादी करता है. इस के अलावा फिल्म 'कल हो न हो', 'बर्फी', 'दिल का क्या कुसूर' आदि कई फिल्में इन्हीं घटनाओं को ले कर बनी, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया.
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