महिला दिवस हर साल किसी न किसी रूप में विश्व में मनाया जाता है. महिलाएं आज आजाद है, पर आज भी कई महिलाएं बंद कमरे में अपना दम तोड़ देती है और बाहर आकर वे अपनी व्यथा कहने में असमर्थ होती है. अगर कह भी लिया तो उसे सुनने वाले कम ही होते है. इस पर कई फिल्में और कहानियां कही जाती रही है पर इसका असर बहुत कम ही देखने को मिलता है. आखिर क्या करना पड़ेगा इन महिलाओं को, ताकि पुरुष प्रधान समाज में सभी सुनने पर मजबूर हो? कुछ ऐसी ही सोच रखते है हमारे सिने कलाकार आइये जाने उन सभी से,

तापसी पन्नू

महिलाओं को पुरुषों के साथ सामान अधिकार मिले. ये केवल कहने से नहीं असल में होने की जरुरत है. इसके लिए समय लगेगा, पर होनी चाहिए. महिलाओं को भी अपनी प्रतिभा को निखारने और लोगों तक पहुंचाने की जरुरत है. आज महिला प्रधान फिल्में बनती है, क्योंकि महिलाओं ने अपनी काबिलियत दिखाई है. आज दो से तीन फिल्में हर महीने महिला प्रधान रिलीज होती है और लेखक ऐसी कहानियां लिख रहे है और निर्माता निर्देशक इसे बना भी रहे है.

 

View this post on Instagram

 

Just before confessing “I don’t love you” I don’t know what exactly I am thinking but I realise I make weird faces while at it ? #Thappad

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...