Accident: सरकार अपने लंबेचौड़े ऐक्सप्रैस वे की खुदबखुद तारीफ करती रहती है और हर अखबार में बारबार 4 लेन, 6 लेन, 8 लेन के हाईवे के उद्घाटनों के फोटो छपते रहते हैं पर ये ऐक्सप्रैस वे जानलेवा भी बनते जा रहे हैं. उत्तर प्रदेश में भगवानों की नगरी की भगवानों द्वारा दी गई सेफ्टी के बावजूद मथुरा, वृंदावन के पास यमुना ऐक्सप्रैस वे पर दिसंबर के मध्य में कुहरे के कारण 2 गाडि़यों में टक्कर हो गई.
इन कारों के ड्राइवर बीच सड़क में कारें खड़ी कर के उतर कर बहस करने लगे तो पीछे से एकएक कर के कई गाडि़यों ने तेज रफ्तार में इन खड़ी कारों में टक्कर मार दी. इन में बसें और ट्रक भी शामिल थे. कम से कम 13 व्हीकल इस हादसे के शिकार हुए. 13 मरे, 100 घायल हुए. कुहरा तो था ही उस से ज्यादा बेवकूफी रही कि पहली 2 कारों के मालिकों ने सुबह 4 बजे सड़क पर बहस करनी शुरू की कि गलती किस की थी. जब दिखना कम हो, बंद गाडि़यों की लाइटें भी बंद हों या टूट चुकी हों तो पीछे से आ रही तेज रफ्तार की गाडि़यों का पाइल अप होना कोई इंपौसिबल बात नहीं है.
ऐक्सप्रैस वे पर चलने का डिसिप्लिन कुछ और होता है पर यहां के लोगों ने तेज रफ्तार वाली गाडि़यां तो खरीद लीं पर यूरोप, चीन, जापान, अमेरिका जहां इन कारों और बसों को डिजाइन किया गया है, वहां का डिसिप्लिन नहीं सीखा. डिजाइनर यह तो सोच कर चलते हैं कि कार, बस ड्राइवर कुछ समझदारी से काम लेंगे पर यहां हर तरह की सेफ्टी को छोड़ कर एक लाल रंग का कपड़ा बांध लेना या किसी देवीदेवता की मूर्ति को डैशबोर्ड पर चिपका लेना ही काफी समझ जाता है.
ऐक्सीडैंट कहीं भी कभी भी हो सकते हैं पर सब से पहले बहसकरना ही गलत है पर इस देश में जहां हर समय कानून की परवाह न करना सिखाया जाता है और झठ व फरेब ही नहीं, दूसरों को तरहतरह की गालियां देना भी धर्म का हिस्सा है वहां ऐक्सीडैंट होने पर समस्या सुलझने की जगह ब्लेम गेम शुरू हो जाता है. कुछ लोग तो गाडि़यों में लकड़ी व लोहे के डंडे रखते हैं और ऐक्सीडैंट कर के पैसा बनाने के लिए जान से मारने की धमकियां तक देते हैं.
यह मौडर्न जमाने का सड़कों के लिए एक खतरनाक रवैया है पर भगवान के आसरे रहने वालों को इस से कोई फर्क नहीं पड़ता कि सही कौन है, गलत कौन है. उन्हें बचपन से रामायण और महाभारत की कहानियों से सिखाया गया है कि सच्चा वह होता है जो जीतता है. रामायण और महाभारत की कथाओं को सत्य की जीत के रूप में पेश किया जाता है बिना लौजिक का इस्तेमाल किए. इन दोनों कथाओं में छलफरेब भी भरा है. जनता जिस की आज की चैलेंज केवल यह धर्म की बकवास रह गई है, अपने आसपास के विवाद बिना लौजिक के, केवल वायलैंस से, सुलझाना चाहती है.
ओसामा बिन लादेन ने न्यूयौर्क के वर्ल्ड ट्रेड सैंटर पर हमला करवा कर दिया, इस से इसलाम को क्या मिला? क्या दुनिया के एक भी देश में इसलाम पहले से ज्यादा खुशियां ला कर मजबूत हुआ? ऐक्सीडैंट होने पर सब से पहले गलती किस की थी की जगह खड़ी हुई समस्या को सुलझाना चाहिए, रास्ता खाली कराना चाहिए, घायलों का इलाज कराना चाहिए, दूसरों को तकलीफ न हो यह देखना चाहिए, अपनों की देखभाल और अपने सामान की सुरक्षा करनी चाहिए, मंदिर पास है तो कतई कोई गारंटी नही है कि कोई दिव्य शक्ति इस कार्य के लिए आएगी.
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