Letter Writingआज के दौर में जब बात, वीडियो कॉल या इमोजी के जरिए पल भर में कह दी जाती है, ऐसे में हाथ से पत्र लिखने की आदत धीरे-धीरे कम होती जा रही है। लेकिन परिवार को पत्र लिखना केवल एक पुरानी परंपरा नहीं, बल्कि भावनाओं को व्यक्त करने का एक सुंदर तरीका है। कागज पर लिखी चिट्ठी अपनापन बढ़ा देती है। अपने हाथों से लिखे शब्द और छोटे-छोटे चित्र किसी भी दादा-दादी, नाना-नानी या चचेरे भाई-बहनों के चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं।
पत्र लेखन सिखाना बच्चों के लिए क्यों जरूरी है?
• पत्र लिखते समय बच्चे गहराई से सोचते हैं कि वे सामने वाले को क्या बताना चाहते हैं। इससे वह अपनी भाषा अपनी भावनाओ को शब्दो में पिरोना सिखते है।
• यह खेल खेल में बच्चों की हैंडराइटिंग, स्पेलिंग और सेंटेंस बनाने की स्किल डवलप करती है।
• आज के बच्चों को हर चीज ‘इंस्टेंट’ चाहिए। पत्र लिखकर डाकपेटी में डालना और फिर जवाब का इंतजार करना, उन्हें जीवन में पेसेंश सिखाता है।
इसे कैसे मजेदार और खास बनाएं?
• सिर्फ सादे कागज पर लिखने के बजाय बच्चों को रंग-बिरंगे स्केच पेन, स्टिकर्स या ग्लिटर दें। अगर बच्चा छोटा है और ज्यादा लिख नहीं सकता, तो वह अपने दादा-दादी के लिए एक सुंदर सा चित्र बना सकता है, जैसे—सूरज, पहाड़ या पूरे परिवार की एक छोटी सी ड्राइंग।
• बच्चों से कहें कि वे अपनी चिट्ठी में कुछ खास बातें लिखें, जैसे: वे अपने कजिन्स या दादा-दादी को कितना मिस कर रहे हैं।
• चिट्ठी तैयार होने के बाद उसे लिफाफे में बंद करें, उस पर पता लिखें और स्टैम्प डाकटिकट लगाएं। सबसे मजेदार हिस्सा तब होता है जब आप बच्चे को अपने साथ ले जाकर उसे लाल रंग के लेटर बॉक्स में डालने का मौका देते हैं। यह अनुभव उन्हें उनकी जड़ों से जोड़ती है और उन्हें हमेशा याद रहेगा।
जब आप यह पत्र भेजें, तो परिवार के उस सदस्य जैसे दादा-दादी या कजिन्स को फोन करके पहले ही बता दें। उनसे कहें कि जब उन्हें यह पत्र मिले, तो वे भी बच्चे को हाथ से लिखकर ही इसका जवाब दें। जब आपके बच्चे के नाम से घर पर कोई डाक आएगी, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा!
परिवार को पत्र लिखना केवल शब्दों का आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि रिश्तों में प्यार, सम्मान और अपनापन बढ़ाने का एक खूबसूरत माध्यम है। इसलिए हर बच्चे को कभी-न-कभी अपने परिवार के लिए एक प्यारा सा पत्र ज़रूर लिखना चाहिए।
