अकसर एक मां अपनी बेटी को सिखाती है कि अगर पति दो बातें बोलता भी है, तो सुन लेना चाहिए, उसका जवाब नहीं देना चाहिए. चाहे लड़की अपने पति से कम पढ़ीलिखी हो या ज्यादा. पति का आदेश सिरआंखों पर, लेकिन क्यों ?

किसी भी मामले में लड़कियां से लड़कों से कम नहीं है. हर क्षेत्र में लड़कियां ही आगे हैं, फिर शादी  के बंधन में लड़कियां ही क्यों समझौता करे. यह रिश्ता बराबरी का है, तो सिर्फ लड़कियों को ही क्यों ऐसे पाठ पढ़ाए जाते हैं. आज के जमाने में लड़कियों में काफी बदलाव आया है. पैरेंट्स की भी सोच बदली है.

लेकिन हां जब तलाक (Divorce) की बात आती है, तो यह आम लोगों में थोड़ा पेंचिदा मामला हो जाता है, समय के साथ इसमें भी बदलाव धीरेधीरे आ ही जाएगा. कहा जाता है, सिनेमा समाज का दर्पण होता है. वाकई कुछ ऐसी फिल्में हैं, जो हमारे समाज के लिए बेहद प्रेरणादायक हैं और ये फिल्में हर किसी को देखना चाहिए. खासकर हर लड़की या शादीशुदा महिलाओं को ये फिल्म अपनी लिस्ट में शामिल करना चाहिए. जो तलाकशुदा महिलाओं पर आधारित है. कैसे एक औरत शादी टूटने के बाद समाज का सामना करती है और दुनिया में अपना एक वुजूद बनाती है.

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