Breastfeeding : स्तनपान के दौरान निप्पल में दर्द, क्रैक या घाव का ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि इनकी अनदेखी करने से गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण या मास्टिटिस का खतरा बढ़ जाता है. कई बार तेज दर्द के कारण माँ स्तनपान समय से पहले बंद कर देती है, जबकि यह शिशु के ठीक से न जुड़ने या गलत लैचिंग का संकेत होता है, जिसे डॉक्टर की सलाह से ठीक किया जा सकता है.
असल में कटी-फटी त्वचा या घाव के रास्ते कीटाणु आसानी से स्तन के अंदर जा सकते हैं. दरारों से खून आने पर शिशु के पेट में जाना या संक्रमण का जोखिम और अधिक बढ़ सकता है. ये सही है कि मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान बेहद महत्वपूर्ण है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सलाह के अनुसार, शिशु को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू कराना और पहले छह महीने तक केवल मां का दूध देना चाहिए. छह महीने के बाद पौष्टिकता से भरपूर आहार शुरू करते हुए स्तनपान दो साल या उससे अधिक समय तक जारी रखा जा सकता है, लेकिन अगर किसी भी प्रकार की समस्या माँ को स्तनपान कराते समय हो रहा है, तो शिशु को बीच में ही स्तनपान को बंद भी करना जरूरी होता है, जिसे कई बार नई माएँ समझ नहीं पाती और स्तन के निप्पल्स के पास संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और ठीक होने में समय लगता है.
