Menstrual health awareness : वैसे  तो आजकल सभी लड़कियों को पहले से ही थोड़ीबहुत पीरियड्स के बारे में जानकारी होने लगी है लेकिन फिर भी मां होने के नाते आप का फर्ज बनता है कि आप अपनी बेटी को इस के बारे में पूरी जानकारी दें ताकि उस के मन में जो सवाल हैं उन्हें आप से पूछ सके और जब उस की पहली माहवारी आए तो उसे किसी तरह की कोई परेशानी न हो.

बेटी को कैसे बताएं कि पीरियड्स क्या होते हैं

आप बेटी को बताएं कि शरीर का एक अंग गर्भाशय (यूटरस) होता है, जिस से हर महीने कुछ दिनों के लिए खून निकलता है. यह एक नैचुरल प्रोसैस है जो हर लड़की के जीवन में प्यूबर्टी के समय होता है. इस का संबंध शारीरिक विकास से है, इसलिए इस बारे में चिंता या किसी तरह के डर की जरूरत नहीं.

पीरियड्स आने से पहले मिलते हैं कुछ संकेत उन्हें पहचाने

जब लड़कियों की ब्रैस्ट में उभार आना शुरू हो जाता है और ब्रैस्ट का विकास होने लगता है तो उस के 2 साल बाद लड़कियों को पहली माहवारी आती है. अगर 9 साल की उम्र में ब्रैस्ट बड्स का विकास होता है तो 12 से 13 साल की उम्र में पीरियड्स हो सकते हैं. पीरियड्स शुरू होने से पहले अंडर आर्म्स में बाल आने लगते हैं.

इस के अलावा वैजाइना में भी हेयर ग्रोथ शुरू हो जाती है जो पहले पीरियड्स का संकेत होती है. वैजाइनल डिस्चार्ज होना पहले पीरियड्स का साफसाफ संकेत होता है. अगर आप की बेटी को वैजाइनल डिस्चार्ज होने लगे तो सम झ लीजिए कि आने वाले 6 महीनों में उस के पीरियड्स शुरू हो सकते हैं.

अगर आप की बेटी में भी ये संकेत दिखने लगें तो उसे पीरियड्स के बारे में सब बातें समझाएं.

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पहली माहवारी कब आती है

अधिकतर लड़कियों को उन की पहली माहवारी 12 से 14 साल की उम्र के बीच आती है. लेकिन अगर उस से पहले आ जाए तो भी नौर्मल ही है. अब कई लड़कियों को 9 या 10 साल की उम्र में भी पीरियड्स आ जाते हैं. आप यह सम झ लें कि जब आप की बिटिया की ब्रैस्ट डैवलप होनी शुरू हो जाती है उस के करीब 2 साल बाद मैंस्ट्रुअल साइकल भी शुरू हो जाता है.

क्या करें जब पहली बार दिखे पीरियड ब्लड

बेटी को बताएं कि जब टौयलेट का उपयोग करने के बाद खून देखे या कपड़ों पर दाग लगें. अपने अंडरवियर में टिशू पेपर अस्थाई रूप में रखे. घर में मौजूद अपने से बड़े किसी ऐसे विश्वसनीय व्यक्ति को इस बारे में बताए जो आप को सैनिटरी नैपकिन लेने में मदद कर सके. पर्सनल हाइजीन के आधार पर पीरियड्स हाइजीन प्रोडक्ट्स की रेंज पीरियड अंडरवियर, सैनिटरी नैपकिन और टैंपोन से ले कर मैंस्ट्रुअल कप तक होती है. इस के आलावा उसे पहले ही एक पीरियड्स किट बना कर दें ताकि कोई समस्या न हो और वह उसे आसानी से यूज कर सके.

पैड यूज करना बताएं

बेटी को पैड यूज करना बताएं. उसे बताएं इसे पैंटी पर चिपकाया जा सकता है जिस के बाद यह एक जगह टिका रहता है निकल जाने का डर नहीं रहता. टैंपोन या मैंस्ट्रुअल कप की तरह इसे इंसर्ट नहीं करना पड़ता. यह कई साइज में आता है. आप अपनी बौडी और साइज के अनुसार इसे ले सकती हैं. टीनऐजर के लिए भी यह आता है.

पैड यूज करना भी सिखाएं

यदि आप पैड से शुरुआत कर रही हैं तो उसे पैड दिखाएं और उसे अंडरवियर पर स्टिक करना सिखाएं.

पहली माहवारी आने से पहले ही इस की प्रैक्टिस शुरू कर दें. और्गेनिक कौटन पैड्स ही लें, जिस में कोई फ्रैगरैंस, डाई या क्लोरीन ब्लीच न हो.

पीरियड अंडरवियर के बारे में बताएं

बेटी को बताएं कि यह एक विशेष प्रकार का दोबारा इस्तेमाल होने वाला इनरवियर है जो पैड, टैंपोन या कप की जगह सीधे पीरियड्स के रक्त को सोख लेता है.

यह सामान्य अंडरवियर जैसा दिखता है लेकिन इस में 3-4 परतें होती हैं जो नमी को सोखती हैं, बदबू रोकती हैं और लीकेज से 360 डिग्री सुरक्षा देती हैं.

यह रैश फ्री होता है और पैड की तरह खिसकने का डर नहीं रहता. इसे पहन कर आप सो सकती हैं, ट्रैवल कर सकती हैं या स्कूल/औफिस जा सकती हैं. इसे धो कर बारबार इस्तेमाल किया जा सकता है.

अगर बेटी स्पोर्ट्स में ऐक्टिव है तो टैंपोन और मैंस्ट्रुअल कप अच्छा औप्शन है

टैंपोन और मैंस्ट्रुअल कप सैनिटरी पैड की तुलना में अधिक स्वच्छ, आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल (विशेषकर कप) विकल्प हैं. स्वीमिंग, डांसिंग या स्पोर्ट्स जैसी ऐक्टिविटी में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने वाली गर्ल्स के लिए ये सही हैं. इसलिए अगर आप की बेटी भी इन ऐक्टिविटीज में हिस्सा लेती है तो उसे टैंपोन और मैंस्ट्रुअल कप के बारे में पूरी जानकारी दें और उसे इन्हें यूज करना बताएं.

स्कूल के लिए पीरियड किट तैयार करें

एक पीरियड किट तैयार करें और उसे

उस के स्कूल बैग में रख दें ताकि जब कभी उस के पीरियड्स स्कूल में शुरू हो जाएं तो वह घबरा न जाए.

कुछ ऐक्स्ट्रा सैनिटरी पैड्स (2-3), लीक होने या दाग लगने की स्थिति में एक साफ अंडरवियर (पैंटी) साथ रखें.

छोटे वाइप्स या सैनिटाइजर क्लीनिंग के लिए बहुत जरूरी हैं. पैड डिस्पोज करने के लिए एक छोटा बैग (जिप लौक), न्यूजपेपर में लपेट कर भी डिस्पोज किया जा सकता है.

दर्द के लिए एक पेनकिलर

यह सारा सामान आप एक छोटे पाउच में रख सकती है और उसे हमेशा अपने बैग में रखें.

पीरियड ट्रैक करने के लिए एक डायरी बनाएं

ट्रैक में क्याक्या नोट करें?

पीरियड का पहला दिन- ब्लीडिंग कब शुरू हुई.

ब्लीडिंग की अवधि- ब्लीडिंग कितने दिनों (जैसे 2-7 दिन) तक चली.

लक्षण- दर्द, मूड में बदलाव (चिड़चिड़ापन) या शारीरिक लक्षण.

फ्लो- ब्लीडिंग कम, सामान्य या ज्यादा रही.

क्या करें जब हों पीरियड क्रैंपस

बेटी को बताएं कि पीरियड्स के दौरान उसे थोड़ा दर्द भी हो सकता है लेकिन इस से घबराना नहीं है अगर दर्द हो तो गरम पानी से सिंकाई की जा सकती है. इस के आलावा गरम चाय आदि पीने पर भी दर्द कम होगा. कोई पेन किलर भी ली जा सकती है.

कब है डाक्टर से सलाह लेने की जरूरत

अगर 7 दिनों से अधिक समय तक लगातार ब्लीडिंग हो रही हो, 2 पीरियड्स के बीच का अंतर 20 दिनों से कम है, चक्कर आना/थकान महसूस होने जैसी शिकायत हो, आप को पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द का अनुभव हो, लेट पीरियड्स के साथ 45-60 दिन से अधिक अंतराल हो, तो डाक्टर यानी गाइनेकोलौजिस्ट की सलाह लेना जरूरी होती है, बेटी को यह भी सम झाएं.

पीरियड हाइजीन और डाइट के बारे में बताएं

अपनी बेटी को पीरियड्स के दौरान अपने गुप्तांग की साफसफाई के बारे में भी जरूर बताएं. उसे बताएं कि साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना होता है हर 2-3 घंटे में या जब गंदा हो जाए तो तुरंत पैड को चेंज करना होता है और उस जगह को पानी से अच्छी तरह वाश कर के ही पैड को चेंज करें.

बेटी को मैंस्ट्रुअल क्रैंप्स और पीरियड्स के दौरान होने वाली परेशानियों के बारे में भी बे िझ झक बताएं ताकि समय आने पर वह इस का अच्छे से सामना कर सके.

इस के अलावा पीरियड्स के दौरान कैसी डाइट लेनी चाहिए इस के बारे में भी जानकारी जरूर दें. अगर वह किसी भी तरह की असुविधा महसूस करती है या उसे कोई सवाल पूछना हो तो वह नोटबुक में नोट्स लिख सकती है या आप से सलाह ले सकती है.

अपनी बेटी को मैंस्ट्रुअल जर्नी से अवगत कराते समय किसी भी तरह की  िझ झक महसूस न करें. अगर आप की बेटी को 16 साल की उम्र तक पीरियड्स न आएं तो उसे किसी अच्छे गाइनेकोलौजिस्ट के पास जरूर ले जाएं. पीरियड्स को ले कर बेटी के किसी भी तरह के सवाल को ध्यान से सुनें और सम झदारी से जवाब दें.

धार्मिक मिथक तोड़ें

पीरियड्स को ले कर समाज में कई मिथक होते हैं जैसे पीरियड्स के दौरान आप को अशुद्ध और गंदा माना जाता है लेकिन यह सही नहीं है.  आप अपनी बेटी को बताएं कि यह शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है. इस में कुछ भी गंदा नहीं है. इस दौरान साफसफाई का बस विशेष ध्यान रखना होता है. पीरियड्स के दौरान पेट दर्द, थकान आदि चीजें सामान्य हैं. इन से घबराने की जरूरत नहीं है.

पहली माहवारी आने के बाद अगर आप का किसी लड़के के साथ कोई संबंध बन रहा है तो अब प्रैगनैंसी हो सकती है यह भी बेटी को बताएं मांओं को लगता है कि मेरी बेटी बहुत छोटी है और उस का इन सब बातों से कोई मतलब नहीं है. यह सही हो सकता है लेकिन फिर भी एक मां होने के नाते आप की जिम्मेवारी बनती है कि आप उसे हर तरह का सहीगलत पहले ही सम झा दें जैसेकि उसे आप इस तरह भी सम झा सकती हैं जैसे उस से कहें कि बेटा, पीरियड्स शुरू होने का मतलब है कि अब तुम वयस्क बनने की राह पर हो.

इस का एक वैज्ञानिक पहलू यह भी है कि अब तुम्हारा शरीर बच्चा पैदा करने के काबिल हो चुका है. इसलिए किसी भी लड़के के साथ शारीरिक जुड़ाव के गंभीर परिणाम हो सकते हैं जैसेकि अनचाही प्रैगनैंसी. दूसरे शब्दों में उसे बताएं कि पीरियड्स शुरू होने का मतलब है कि शरीर अब गर्भधारण करने में सक्षम हो गया है.

बेटी को स्पष्ट रूप से सम झाएं कि किसी भी लड़के के साथ शारीरिक संबंध बनाने से चाहे वह पहली बार ही क्यों न हो, प्रैगनैंसी की पूरी संभावना होती है. इसलिए अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान देना अभी सब से जरूरी है.

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